
उन इलाक़ों में जहाँ तंत्र परंपरा का बहुत गहरा प्रभाव है, रहस्यमय नाग दोष आमतौर पर कल्पना और भय को जन्म देता है। सद्गुरु इसकोलाहल से बाहर निकलकर अदृश्य ऊर्जाओं के प्रति एक संवेदनशीलता को उजागर करते हैं जो अनोखे तरीकों से प्रकट होती है।
अपनी निश्चलता, बोध और आध्यात्मिकता से जुड़े गुणों के लिए आराध्य सांप को, इतिहास में देवताओं के समकक्ष एक गहन प्रतीक के रूप में स्थान मिला है। यह दिलचस्प लेख विशिष्ट रहस्यमयी शक्तियों और आध्यात्मिक क्षेत्र में उनके स्थान केविषय में बताता है।
सद्गुरु: एक ऐसी चीज है जिसे नाग दोष कहा जाता है। आप अस्तित्व की कुछ शक्तियों के प्रभाव में आ सकते हैं।
आम तौर पर मैं इन चीजों के बारे में बात करने से बचता हूँ, क्योंकि ऐसे लोग हैं जिनकी कल्पना बेहद सक्रिय है जो इन चीजों के बारे में पागल हो जाएंगे और इनका कई तरीकों से दुरुपयोग करेंगे। पहले ही बहुत से ऐसे लोग हैं जो कुछ भी बकवास करते हैं, और दावा करते हैं कि सद्गुरु मुझसे यह करवा रहे हैं। अगर मैं उन्हें ये सभी आयाम बताऊं, तो उनकी कल्पना बेकाबू हो जाएगी।
जो लोग ध्यानलिंग के पास एक क्षण के लिए भी बैठे हैं, वे नाग दोष से प्रभावित नहीं हो सकते।
नाग दोष के बारे में कहें तो - कुछ खास समय में, कोई इंसान ऐसी शक्तियों से प्रभावित हो सकता है। जो लोग ध्यानलिंग के पास एक क्षण के लिए भी बैठे हैं, वे नाग दोष से प्रभावित नहीं हो सकते। उन आयामों को अलग तरीके से फिक्स किया गया है।
खास मकसद के लिए ऊर्जा-रूप बनाने और उन्हें खुला छोड़ देने का एक पूरा विज्ञान और कला है। ये भूत, जिन्न, या जिन्नात नहीं हैं, सभी प्राणी हैं। मैं जिसका जिक्र कर रहा हूँ वह कोई प्राणी नहीं बल्कि एक शक्तिशाली ऊर्जा-रूप है जो किसी ने बनाया था और दुनिया में घूमने के लिए छोड़ दिया। ऐसा इसलिए है क्योंकि कुछ साधनाओं को करने के लिए इन रूपों की आवश्यकता होती है।
अतीत में कई देवियां बनाई गई थीं, और वे अभी भी मौजूद हैं। आज भी ये शक्तियां हैं जिनका आह्वान किया जा सकता है। आप में से कुछ ने राकिणी, डाकिनी, शंकिनी, रंकिणी के बारे में सुना होगा। ये सभी अतीत के योगियों द्वारा बनाए गए बहुत शक्तिशाली स्त्री रूप हैं, जो जीवन के विभिन्न आयामों और प्रकृति के गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
खास मकसद के लिए ऊर्जा-रूप बनाने और उन्हें खुला छोड़ देने का एक पूरा विज्ञान और कला है।
वे लगभग जीवित प्राणियों की तरह हैं, जिन्हें खास मकसद के लिए बनाया गया। यदि आप दुनिया में कहीं भी उनका आह्वान करते हैं, तो वे बहुत शक्तिशाली तरीके से प्रकट होंगी, यहाँ तक कि भौतिक रूप से भी, और वे कई तरीकों से उपयोग की जाती हैं।
इसी तरह, सर्प के विभिन्न रूप, मुख्य रूप से कोबरा, कुछ साधना के लिए प्रतिष्ठित किए गए हैं। वे कहीं भी हो सकते हैं, लेकिन अधिकांश लोग कभी उनके संपर्क में नहीं आएंगे। लेकिन कभी-कभी, ग्रहणशीलता के कुछ स्तरों में, ये चीजें उन्हें प्रभावित कर सकती हैं। यही नाग दोष है।
सर्प की पीड़ा मुख्य रूप से दुनिया के इस हिस्से में होती है, जहाँ योगियों ने कई ऊर्जा-रूप बनाए। वे यहाँ मंडराते रहते हैं, और कभी-कभी, लोग उनके प्रति ग्रहणशील हो सकते हैं।
आपमें से जो पहले के सम्यमा कार्यक्रम में रहे होंगे, उन्होंने देखा होगा कि कम से कम 25 प्रतिशत लोग सांप बन गए थे जो कभी-कभी आंखें बंद करके हर जगह रेंग रहे थे। हमने कभी सांपों के बारे में बात नहीं की, लेकिन जैसे ही मैंने इस संभावना को खोला, वे सभी जिन्हें थोड़ी-बहुत यह पीड़ा थी, सीधे यहां खिंचे चले आए।
खास तौर से उन इलाक़ों में जहाँ कुछ तांत्रिक प्रथाएं प्रचलित थीं, नाग दोष बहुत आम है।
आम तौर पर तमिलनाडु में हमने उन अधिकांश लोगों की देखभाल की जो सर्प से पीड़ित थे। जैसे ही हमने उस ऊर्जा को खोला, उनके झुण्ड के झुण्ड आ गए, हालांकि उस समय, कोई आश्रम नहीं था, कोई सर्प-प्रतीक नहीं था। कार्यक्रम सराय और खुले हॉल में आयोजित किए जाते थे, लेकिन उनमें से बहुत से लोग इसकी ओर खिंचे चले आए। वे ठीक-ठीक नाग दोष वाले लोग नहीं थे बल्कि वे थे जिनमें सर्प का एक मजबूत आयाम था।
जब लोगों को सर्प की यह पीड़ा होती है, तो शरीर और मन में कुछ प्रभाव हो सकते हैं। सबसे हल्का रूप लगातार त्वचा की बीमारियां हैं, जिन पर इलाज का कोई असर नहीं होता। वे बस नाग मंदिर के चारों ओर तीन चक्कर लगाते हैं, और यह चला जाता है। खास तौर से उन इलाक़ों में जहाँ कुछ तांत्रिक प्रथाएं प्रचलित थीं, नाग दोष बहुत आम है।
प्रश्न: इतने सारे जानवर हैं। केवल नाग दोष ही क्यों है?
सद्गुरु: केवल नाग दोष ही क्यों? दुनिया के इस हिस्से में, सांप को आध्यात्मिक प्रक्रियाओं के लिए प्रतीक के रूप में चुना गया था क्योंकि इसमें ऐसे गुण हैं जो आध्यात्मिकता से जुड़े हैं। प्राचीन काल से ही आप देखते हैं, विष्णु को सोने के लिए सांप का सेज चाहिए। शिव सांप के बिना कुछ नहीं कर सकते। यह हमेशा उनके साथ रहा है। कृष्ण की लड़ाई एक जानवर से हुई तो वह भी एक सांप था। ईव को लुभाने की बात थी – तो यह एक सांप था। यह संयोग नहीं है - लोग किसी न किसी तरह इन चीजों के बारे में जानते थे।
दुनिया के इस हिस्से में, सांप को आध्यात्मिक प्रक्रियाओं के लिए प्रतीक के रूप में चुना गया था क्योंकि इसमें ऐसे गुण हैं जो आध्यात्मिकता से जुड़े हैं।
यहाँ जब लोग शिव और सांपों के बारे में बात करते थे, तो यह बहुत खास था - वे ठीक से जानते थे कि वे किस बारे में बात कर रहे थे, और यह संस्कृति का हिस्सा बन गया। इन सब के बावजूद, लोगों ने सांपों के लिए ज्यादा प्रेम विकसित नहीं किया। इस संस्कृति में साल में एक बार, नाग पंचमी पर, आप सांपों की पूजा करते हैं। कुछ लोग बांबी में दूध डालते हैं (पारंपरिक रूप से कुछ लोग इस दिन चींटियों के बिल के ऊपर दूध चढ़ाते हैं, ये सोचकर कि साँप यहीं रहता है) और चींटियों को घुटन में डाल देते हैं। फिर भी लोगों ने सांपों के लिए पर्याप्त प्रेम विकसित नहीं किया, जो एक दुखद बात है।
लेकिन आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले लोग सांपों से क्यों जुड़े और किसी अन्य जानवर की तुलना में उन्होंने सांप के रूप क्यों बनाए? उन्होंने कोई अन्य जानवर, हाथी या सूअर क्यों नहीं बनाए? हालाँकि सूअर के रूप भी हैं। लोगों ने जीवन पर कुछ स्तरों की महारत हासिल करने के लिए विशिष्ट साधनाओं के लिए सूअरों को प्रतिष्ठित किया, और आज भी वे बहुत जीवंत हैं। इसी तरह, लोगों को वराह (सूअर को संस्कृत में वराह कहते हैं) पीड़ा हो सकती है।
लेकिन सांपों के साथ बहुत कुछ किया गया क्योंकि, आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए, अंतिम लक्ष्य इतना निश्चल हो जाना है कि आप खुद को जो भी मानते हैं वह खत्म हो जाए। आप एक व्यक्ति के रूप में केवल इसलिए मौजूद हैं क्योंकि गतिविधि बहुत अधिक है। यदि आप निश्चल हो जाते हैं, तो सीमित ‘आप’ गायब हो जाएगा।
आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए, अंतिम लक्ष्य इतना निश्चल हो जाना है कि आप खुद को जो भी मानते हैं वह खत्म हो जाए।
अंतिम लक्ष्य निश्चल होना है। एक जानवर जो निश्चलता में सक्षम है, वह सांप है। यदि आप आधे घंटे के लिए बैठते हैं, तो आपको खुद को बार-बार व्यवस्थित करना पड़ता है। योगियों ने हमेशा सांपों से ईर्ष्या की क्योंकि वे घंटों तक पूरी तरह से निश्चल बैठ सकते हैं।
एक दूसरा पहलू यह है कि सांप में बोध की एक विशेष क्षमता होती है, विशेष रूप से कोबरा में। यदि आप अपनी ऊर्जा को एक खास तरीके से बढ़ाते हैं, तो वे आपकी ओर आकर्षित होते हैं। कई योगियों ने यह अनुभव किया है। जब वे बैठे और ध्यानस्थ हो गए और उनका एक निश्चित आयाम सक्रिय हो गया, तो उन्होंने अपने आस-पास कोबरा को पाया।
सांप और आध्यात्मिकता इसलिए जुड़ गए क्योंकि इस संस्कृति में, लोगों ने हमेशा शिव और सांप को साथ देखा। जब उन्होंने एक निश्चित स्तर का अनुभव प्राप्त किया और कोबरा इस ऊर्जा से आकर्षित हुए, तो फिर से इसने लोगों के दिमाग में आध्यात्मिकता और सांपों के बीच के संबंध को मजबूत किया। सांप आध्यात्मिकता के कुछ आयामों के प्रति बहुत संवेदनशील होता है।
