हो सकता है आपके साथ ऐसा कभी हुआ हो कि आप एक अजीब, स्पष्ट सपने से जागते हैं और सोचते हैं कि यह कहां से आया, या यह आपको क्या बताने की कोशिश कर रहा है। क्या इसका कोई गहरा अर्थ है?
सद्गुरु इसे पूरी तरह पलट देते हैं। हम गलत सवाल पूछ रहे हैं। सपनों में अर्थ खोजने के बजाय, हमें सबसे पहले यह पता करना चाहिए कि हम सपने देखते क्यों हैं। उनकी अंतर्दृष्टि सोते हुए मन के बारे में हमारी पारंपरिक समझ को चुनौती देती है।
सद्गुरु सुझाते हैं कि सपने भविष्यवाणी के बारे में कम और प्रक्रिया के बारे में अधिक हैं - हमारी इच्छाओं और संचित यादों की रात्रि से मुक्ति जिसे हम कर्म के रूप में जानते हैं।
सद्गुरु: आपके मन और अस्तित्व के अलग-अलग पहलू हैं जिन्हें हम सपने कहते हैं। आपने निश्चित रूप से लोगों को यह कहते सुना होगा, ‘मेरा एक सपना है।’ लेकिन अभी, हम ज्यादातर उन सपनों के बारे में बात कर रहे हैं जो आप सक्रिय रूप से नहीं बनाते - वे कहीं से आपके पास आते हुए लगते हैं। इन सपनों को चार मुख्य श्रेणियों में बांटा जा सकता है।
90 प्रतिशत से अधिक सपने केवल एक मुक्ति हैं। जब मैं मुक्ति कहता हूं, तो आपको समझना होगा कि अधिकांश मानव मन जो कुछ भी अच्छा, सुंदर, आकर्षक या मूल्यवान मानते हैं, उसकी इच्छा करने से खुद को रोक नहीं सकते। मन द्वारा दिन भर पैदा की जाने वाली अधिकांश इच्छाएं सचेतन भी नहीं होतीं। वे केवल इसलिए हो रही हैं क्योंकि मन कई चीजों की इच्छा करने के उस मोड में है। यह आपका सौभाग्य है कि आपकी सभी इच्छाएं सच नहीं होतीं। यदि होतीं, तो आप बड़ी परेशानी में होते।
इस प्रकार के सपने उन सभी चीजों की अतिशयोक्ति हैं जिनकी आप इच्छा करते हैं। या दूसरे शब्दों में, यह एक मुक्ति है। यदि यह मुक्ति आपके सपने में नहीं होती, तो इच्छा बड़ी निराशा और मजबूरी में बदल सकती है। इस अर्थ में, सपना आपके लिए काम कर रहा है।
आप रात में इन इच्छाओं को तब मुक्त कर सकते हैं जब आप गहरी नींद में होते हैं क्योंकि शरीर आराम में होता है, इसलिए मन की गतिविधि के लिए बहुत ऊर्जा उपलब्ध होती है। मन इस समय और ऊर्जा का उपयोग करके खुद को निकालता है। नब्बे प्रतिशत सपने इस श्रेणी में आते हैं। इसके बारे में कुछ करने की जरूरत नहीं, कुछ याद रखने लायक़ नहीं, याद रखने की जरूरत भी नहीं - इसे जाने दें।
लेकिन अगर आप दैनिक आधार पर बहुत सारे सपने देखते हैं, तो आपको अपने दिन को देखना चाहिए। आपको अधिक सचेतन होना चाहिए। जितने अधिक सचेतन आप दिन में होंगे, रात में उतने कम सपने आएंगे। आप अपने आसपास की चीजों की जितनी अधिक अचेतन रूप से इच्छा करेंगे, सपने देखना उतना अधिक होगा। अगर आप दिन भर पर्याप्त रूप से ध्यान करते हैं, तो रात में काफी कम सपने आएंगे।
सपनों की एक और अभिव्यक्ति है जो ‘प्रारब्ध’ पर आधारित है।
मानव तंत्र में स्मृति का एक विशाल भंडार है, जिसे हम कार्मिक संरचना या कार्मिक शरीर कहते हैं, जो अनिवार्य रूप से स्मृति है। अगर आपकी सारी कार्मिक स्मृति अभी आपके जीवन में सक्रिय हो जाए, तो आपका मन टूट जाएगा। यह किसी के लिए भी संभालना बहुत मुश्किल है।
ऐसा मेरे साथ चालीस साल पहले हुआ था। अचानक, मुझे एक विशाल अनुभव हुआ [उनका आत्मज्ञान], और कई जन्मों की स्मृति मेरे मन से गुजरी। क्योंकि मेरे पास अपार अनुभव था, इसलिए मैं उसे संभाल सका। नहीं तो जब छिपी हुई स्मृति सक्रिय हो जाती है तो मन टूट जाता है।
प्रकृति, या आपके तंत्र ने, केवल उस आवंटित स्मृति तक पहुंचने का तरीका विकसित किया है जिससे अभी निपटा जाना है। इसे प्रारब्ध कहते हैं। हमारी दादी माँ की पीढ़ी के दौरान यह एक बहुत सामान्य शब्द था। यदि कुछ उस तरह नहीं हो रहा था जैसा लोग सोचते थे कि होना चाहिए, तो वे कहते थे, "अय्यो प्रारब्ध" - मतलब आवंटित स्मृति खेल रही है।
तो, दूसरे प्रकार का सपना प्रारब्ध का खेलना है। यह आपके दिन-प्रतिदिन के व्यवहार, आपके विचारों, आपकी भावनाओं, और आपका शरीर कैसा महसूस करता है, इनमें खेलता है। यदि आप अपने शरीर को ध्यान से देखें, तो आप देखेंगे कि हर दिन, यह अलग महसूस करता है - क्योंकि जो कुछ भी होता है उसे प्रारब्ध बनाता है।
मानसिक संरचना में होने वाली हर स्मृति की मुक्ति शारीरिक संरचना में एक संवेदी पैटर्न बनाती है। जो प्रारब्ध खेल रहा है वह तय करता है कि आपका शरीर कैसा महसूस करेगा। अगर आप सचेतन हैं और अपने शरीर को देखते हैं, तो आप जान जाएंगे कि उस दिन क्या होने वाला है।
आप में से कईयों ने शायद देखा होगा कि कुछ दिनों में जब कोई तीव्र समस्या आई, आप सुबह से ही अजीब महसूस कर रहे थे और फिर कहीं न कहीं दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इसे नोटिस करने के लिए आपको आत्मज्ञानी या अति-सचेतन होने की जरूरत नहीं। लेकिन, क्योंकि लोग इसे समझना नहीं जानते, वे समस्या में चले जाते हैं। जो लोग इसे पढ़ना जानते हैं वे ऐसे दिनों में पीछे हट जाएंगे, क्योंकि कार्मिक स्मृति या प्रारब्ध न केवल इस बात को प्रभावित करता है कि आपका शरीर, मन और ऊर्जा कैसे काम करेंगे, बल्कि आपके आसपास क्या होगा, इसे भी प्रभावित करता है।
यह प्रारब्ध की अभिव्यक्ति है, और वही रात में सपनों के रूप में होता है। इन सपनों में सभी प्रकार की अजीब चीजें मिली हुई हो सकती हैं - लोग जो आपके आसपास हैं और दूसरे जिन्हें आप नहीं जानते; परिचित और अपरिचित स्थितियां, सब घालमेल करती हुई। आप इस तरह के सपने याद कर सकते हैं - आप अपने घर में हैं लेकिन कोई अजीब व्यक्ति मौजूद है। या आप किसी अजीब जगह हैं लेकिन आपका पूरा परिवार वहां है।
जो आप जानते हैं और जो आप नहीं जानते, जो आप सचेतन रूप से याद रखते हैं और जो आप सचेतन रूप से याद नहीं करते - यह सब सपने में उलझ जाता है। यह प्रारब्ध की मुक्ति है, और इसका कुछ अर्थ हो सकता है।
आपको सपने की छवियों पर गौर नहीं करना है, आपको सपने के अवशेष पर गौर करना है। क्या यह केवल आपकी छुपी हुई इच्छाएं हैं जो निकल रही हैं, या किसी दूसरी स्मृति ने इसके होने में भूमिका निभाई है? छवियों को मत निहारिए। छवियां महत्वपूर्ण नहीं हैं, लेकिन वे शरीर पर जो अवशेष छोड़ती हैं वह मायने रखता है। जब आप सुबह उठते हैं, तो आप कैसा महसूस करते हैं?
यही कारण है कि जो लोग अपने जीवन को बारीकी से देख रहे हैं वे सभी नशीली दवाओं और उत्तेजकों से बचते हैं। नशीली दवाएं और उत्तेजक आपके तंत्रिका तंत्र को कुछ बिल्कुल अलग संकेत देती हैं, इसलिए आप कुछ भी नोटिस नहीं कर सकते।
प्रारब्ध पर आधारित दूसरे प्रकार का सपना कई चीजों का संकेत दे सकता है यदि आप इसे ध्यान से देख सकें। प्रारब्ध को देखना अच्छा है, विशेष रूप से यदि कुछ आपके स्वास्थ्य या आपके शरीर के विनाश या नुकसान की संभावना से संबंधित है।
प्रारब्ध पर आधारित दूसरे प्रकार का सपना कई चीजों का संकेत दे सकता है यदि आप इसे ध्यान से देख सकें। प्रारब्ध को देखना अच्छा है, विशेष रूप से यदि कुछ आपके स्वास्थ्य या आपके शरीर के विनाश या नुकसान की संभावना से संबंधित है।
तीसरे प्रकार का सपना तब आता है जब आप अपने जीवन में अनुभव की कुछ अवस्थाओं को छूते हैं। आप में से कईयों ने शायद देखा होगा कि एक शक्तिशाली अनुभव से गुज़रने के बाद - मान लीजिए आपको शांभवी में दीक्षित किया गया, या आप भाव स्पंदन या सम्यमा कार्यक्रम से गुज़रे, या किसी दूसरी दीक्षा प्रक्रिया से – हो सकता है आपके सपनों का पैटर्न, प्रकार और मात्रा बदल जाए।
एक शक्तिशाली अनुभव का मतलब है कि आपने अपने भीतर कुछ सीमा पार की है। आपने अपने भीतर सीमाओं की कई परत बना रखी हैं। जब आप एक परत पार करते हैं, तो सपने का पैटर्न काफी बदल सकता है। जो स्मृति का भंडार पहले से निष्क्रिय था, वो अब सक्रिय हो सकता है। अचानक, अब मधुमक्खियों का छत्ता खुल गया है जिससे आपको निपटना है।
ऐसा तब होता है जब एक शक्तिशाली अनुभव एक निश्चित बाधा को तोड़ता है और स्मृति की एक खेप निकाल लाता है। ये बाधाएं आपकी सुरक्षा के लिए हैं। यदि वे सभी एक साथ खुल जाएं, तो आपका मन टूट जाएगा।
स्मृति या कार्मिक पदार्थ के इस भंडार को ‘संचित’ कहा जाता है। जब संचित का एक हिस्सा आपके जीवन में आता है, तो यह जीवन पहले की तुलना में एक बड़े दायरे में फैलता है। पहले, आपका जीवन स्मृति की एक निश्चित मात्रा के भीतर खेल रहा था, लेकिन एक बड़े अनुभव से सीमा के टूटने के बाद, आपका जीवन अपना दायरा बढ़ाता है।
यदि आप इसे कुशलता से संभालते हैं, तो बड़ा दायरा एक महान चीज़ है। यदि आप इसे अकुशलता से संभालते हैं, तो यह परेशानी का कारण बनता है। यही वह चीज है जिसके साथ इंसान संघर्ष कर रहा है: मानव जीवन का दायरा दूसरे जीवों की तुलना में बड़ा है। यदि आप किसी दूसरे जीव की तरह होते, तो आप केवल खा-पी और सोकर ही ठीक से रह सकते थे। क्योंकि आपके जीवन का दायरा बड़ा है, आप परेशान हैं।
इसी तरह, जब स्मृति का एक बड़ा दायरा खुलता है, और अगर आप इसे सही तरीके से संभालते हैं, तो यह बहुत अद्भुत होगा, लेकिन अगर आप ऐसा नहीं कर पाते, तो यह दर्दनाक होगा। लेकिन भले ही यह दर्दनाक हो, अंतिम रूप से यह अभी भी आपके लिए अच्छा है। योग करने में दर्द होता है, लेकिन हम फिर भी इसे करते हैं क्योंकि, अंतिम रूप से यह हमारे लिए अच्छा है। इसीलिए हम इसे कर रहे हैं।
आपके भीतर स्मृति के नए दायरों का खुलना बहुत दर्दनाक हो सकता है क्योंकि आप अपने जीवन को फास्ट-फॉरवर्ड मोड पर डाल रहे हैं। जो अगले जन्म में संभाला जाना चाहिए था, आप इस जन्म में संभालने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि आप जल्दी में हैं। आप एक और जन्म नहीं चाहते। आप इसी जन्म में सारे कर्म बंधन ख़त्म करना चाहते हैं।
यह अधिक जटिल हो जाता है, लेकिन यदि आप इसे सही तरीके से संभालते हैं, तो यह बहुत अच्छा है। नहीं तो, आध्यात्मिक मार्ग पर प्रवेश करने के बाद, ऐसा लगता है कि ब्रह्मांड की हर चीज़ आपको हर दिशा से लात मार रही है। जब आप एक ऐसा आयाम खोलते हैं जिसे आपने पहले संभाला नहीं था तो ऐसा ही होता है।
अगर आप पहले की राह पर चलते रहते हैं, तो जीवन आरामदायक लगता है, लेकिन आप ठहराव का शिकार होंगे। अगर आप अगले सोपान पर जाते हैं, तो आप आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन आपको बहुत बड़ी चुनौतियों का सामना करना होगा।
सपनों के संदर्भ में, यह पूरी तरह अलग तरीके से होता है। एक बार जब संचित आपके सपनों में प्रकट होना शुरू कर देता है, तो आपके बिल्कुल विचित्र, अर्थहीन सपने आएंगे।
एक और तरह का सपना है, जो सामान्य अर्थ में सपना नहीं है। अब, उदाहरण के लिए, हमारे पास लिंग भैरवी है। वो एक सपना हैं। हमने उनका सपना देखा। आप किसी चीज का सपना इस तरह देखते हैं कि वह वास्तविकता बन जाए - यह आपकी चेतना और ऊर्जा को एक निश्चित तरीके से स्थापित करने का सपना है।
ऑस्ट्रेलिया में, आदिवासी लोग सृष्टि के समय को ‘ड्रीमटाइम’ कहते हैं। सृष्टिकर्ता ने इसका सपना देखा। भारत में, हम इसे माया या भ्रम कहते हैं - भ्रम को सपना कहा जा सकता है। या हम इसे लीला, एक खेल कहते हैं। सृष्टिकर्ता अपनी माया बुन रहा है और खेल रहा है।
लीला और माया शब्द सृष्टि का सबसे सटीक वर्णन करते हैं। और जिसे हम तंत्र कहते हैं उसका पूरा विज्ञान किसी चीज़ का सपना देखना और उसे धीरे-धीरे वास्तविकता में लाना है। पहले आप इसे अपने मन में बनाते हैं, फिर धीरे-धीरे इसे सामने लाते हैं, और आखिरकार यह वास्तविकता बन जाती है।
सभी देवता इसी तरह बनाए गए थे। किसी ने उन्हें एक विशेष उद्देश्य के लिए अपने मन में बनाया, फिर रूप और आकार दिया, और अब वे सभी के अनुभव में उतने ही वास्तविक हैं, न केवल एक के। जब आपका सपना सभी के लिए एक जीवंत अनुभव बन जाता है, तो वह वास्तविकता होती है। इसलिए नहीं कि आप शक्तिशाली प्रभाव के जरिए उन्हें प्रभावित करने या सम्मोहित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें कुछ भी जानने की जरूरत नहीं।
जब आप देवी मंदिर में जाते हैं, तो यह सीधे आपके चेहरे पर आकर लगता है। आपको कुछ भी मानने की जरूरत नहीं क्योंकि वो वास्तविकता हैं। लेकिन कुछ सालों पहले वह केवल एक सपना थीं। यह सपना अब प्रकट वास्तविकता है। हम सभी एक सपने की तरह घटित हुए जिसे भौतिक अभिव्यक्ति मिली। लेकिन आप सामग्री का उपयोग किए बिना भी सपने को अभिव्यक्ति दे सकते हैं। यह सामान्य अर्थ में सपना नहीं है - यह सृष्टि है। पूरी सृष्टि इसी तरह होती है।
आप भ्रम के साथ खेल सकते हैं। मान लीजिए मैं गेंद से खेलना चाहता हूं। शुरू में कोई गेंद नहीं है, लेकिन मैं इस तरह खेलना शुरू करता हूं जैसे गेंद मौजूद हो। यदि मैं इसे पर्याप्त तीव्रता के साथ करूं, तो कुछ समय बाद, गेंद मौजूद होगी जिसे आने वाला कोई भी महसूस कर सकता है।
यह सृष्टि है, और इसकी जड़ें भी आपके सपने में धंसी है क्योंकि जब आप संचित की सीमाओं को पार करते हैं, तो आप सृष्टि के स्रोत के आयाम को छू रहे होते हैं। आमतौर पर जब आप इसे छूते हैं, मन अभिभूत हो जाएगा जब तक कि इसे एक निश्चित तरीके से प्रशिक्षित न किया गया हो। यही वह है जिसे कुछ लोग ‘नो-माइंड’ कहते हैं।
जिस क्षण आप ऐसी ऊर्जा की मौजूदगी में आते हैं जो आपकी समझ से परे है, आपका मन जम जाएगा। यह भ्रम नहीं है - यह एक अवस्था है जहां मन अस्तित्व में नहीं होता जब तक कि वह एक निश्चित स्तर की तैयारी से नहीं गुजरा हो।
जैसा कि पारंपरिक शब्दों में लोग कहते हैं, "आप भगवान का सामना करते हैं," आपका मन जम जाता है। कितना व्यर्थ हो गया। आपने वहां तक पहुंचने के लिए इतना कुछ किया, और जब आप वहाँ पहुँचते हैं, तो आप जम जाते हैं। यह अभी भी उपयोगी है। लेकिन अगर आपका मन पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित है और आपने पर्याप्त साधना की है, तो जब आप उस स्थान को पार करते हैं जहां कोई स्मृति नहीं है, तो आप अभी भी अपने आप को सचेतन रूप से संचालित कर सकते हैं।
अभी, आपका मन जिस तरह काम करता है, वह केवल स्मृति के कारण ही है। जब आप उस सीमा को पार कर जाते हैं जहाँ स्मृति समाप्त हो जाती है और केवल बोध ही शेष रह जाता है, तो लगभग सभी मन ठहर जाएँगे। अधिकांश मन केवल मौजूदा स्मृति पर ही काम करते हैं। यदि वह स्मृति छीन ली जाए, तो वे कुछ भी करना नहीं जान पाएँगे।
योग के माध्यम से आप मन को उस स्थिति के लिए प्रशिक्षित करते हैं जहाँ अगर स्मृति या कर्म संरचना समाप्त हो जाए, तब भी आपका मन बना रहेगा। फिर, यदि आपका शरीर मिट जाए – यानी अगर आप मर जाते हैं - तब भी आपका मन बना रहेगा। अब आप जहाँ चाहें वहाँ जा सकते हैं। नहीं तो आप अपनी प्रवृत्तियों के अनुसार चलते हैं।
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ये चार प्रकार के सपने हैं। अंतिम को वास्तव में सपना नहीं कहा जा सकता - यह अस्तित्व का दूसरा किनारा है। इसलिए, सपना चाहे जो भी हो, उसे अनदेखा करना सीखें। अगर आप सपनों में अर्थ खोजने लगेंगे, तो आप मतिभ्रम में पड़ जाएँगे और अपने जीवन का अर्थ खो देंगे।