सद्‌गुरु एक्सक्लूसिव

क्रिया योग क्यों पुरुषों द्वारा ही किया जाता था – अब यह कैसे बदल रहा है?

सदियों से क्रिया योग के मार्ग पर लगभग विशेष रूप से पुरुष ही चले। सद्‌गुरु बताते हैं कि यह जानबूझकर था या परिस्थितियों के कारण। और आज की महिलाओं के लिए वे एक स्वाभाविक लाभ की ओर इशारा करते हैं जो महिलाओं को अपनी ऊर्जा की साधना को पुरुषों से बेहतर प्रज्वलित करने का अवसर देता है।

प्रश्न: महिलाओं के लिए क्रिया योग के मार्ग पर चलने के लिए क्या चाहिए? क्या अतीत में महिला योगी हुई हैं?

सद्‌गुरु: ऐसी महिलाएं हुई हैं जिन्होंने क्रिया योग का मार्ग चुना, लेकिन उनकी संख्या बहुत कम रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि क्रिया योग साधना के कुछ चरणों में अनुशासन और दृढ़ता की बहुत अधिक जरूरत होती है। आमतौर पर इसमें आने वाली कठिनाई की वजह से महिलाओं ने क्रिया योग नहीं चुना। जैविक रूप से, महिलाएं क्रिया योग के मामले में थोड़ी नुकसान में भी हैं।

क्रिया योग का जो सामान्य रूप पारंपरिक रूप से सिखाया जाता था वह ज्यादातर पुरुषों के लिए डिज़ाइन किया गया था, क्योंकि अधिकतर साधक पुरुष होते थे। उदाहरण के तौर पर अगर ईशा योग केंद्र में आने वाला हर व्यक्ति केवल तीन फुट ऊँचा होता, तो हम केवल साढ़े तीन फुट ऊंचे दरवाज़े बनाते ताकि हर कोई आराम से अंदर आ सके। समस्या तब होती जब एक दिन कोई छह फुट लंबा व्यक्ति आता।

आमतौर पर, केवल पुरुष ही क्रिया योग का मार्ग चुनते थे क्योंकि इसके लिए एक निश्चित अनुशासन और पारंपरिक जीवन से दूरी की आवश्यकता होती है, जो उन दिनों इस संस्कृति में महिलाओं के लिए संभव नहीं था। पंद्रह साल की उम्र तक, अधिकांश महिलाओं के बच्चा हो जाता था और वे उस तरह के वातावरण में नहीं होती थीं जिसकी क्रिया योग मांग करता है। इसलिए, परंपरागत रूप से यह स्थापित हुआ कि क्रिया योग केवल पुरुषों के लिए है – ऐसा इसलिए नहीं था कि योग की प्रकृति वैसी है, बल्कि उस समय की सामाजिक परिस्थितियों के कारण ऐसा हुआ।

विभिन्न गुरुओं द्वारा जो भी अभ्यास डिज़ाइन किए गए थे वे पुरुष-उन्मुख थे क्योंकि उनके शिष्य मुख्यतः पुरुष थे, और उन्होंने उसी के अनुसार प्रक्रियाओं को तैयार किया। इसका मतलब यह नहीं है कि किसी भी महिला ने क्रिया योग का मार्ग नहीं चुना है – कुछ ने चुना है। लेकिन वे बहुत कम संख्या में थीं, इसलिए उनके लिए ज्यादा अभ्यास नहीं बनाए गए।

अगर किसी महिला में थोड़ी सी भी भक्ति है, तो उसकी क्रिया आसानी से प्रज्वलित हो जाती हैं।

जो सिस्टम हमने यहाँ बनाया है वे महिलाओं के लिए भी उपयुक्त हैं, और वे अपने अभ्यास के साथ अच्छा कर रही हैं। तो, क्या कोई महिला क्रिया योग के मार्ग पर चल सकती है? हाँ, वह चल सकती है, लेकिन अगर वह क्रिया योग को पूर्ण मार्ग के रूप में अपनाना चाहती है, तो वह थोड़ी सी नुकसान में है। अगर वह करने को तैयार है तो उसे थोड़ी अतिरिक्त कोशिश करनी होगी।

जो कोई भी प्रगति करना चाहता है, उसके लिए हमेशा सबसे अच्छा ये होगा कि इन चार आयामों में उचित तालमेल बैठाए - ज्ञान, कर्म, क्रिया, और भक्ति। महिलाओं में, भावनात्मक आयाम आमतौर पर अधिक प्रभावी होता है। इस लाभ का उपयोग करना अच्छा है।

मैं जो देखता हूँ वह यह है कि अगर किसी महिला में थोड़ी सी भी भक्ति है, तो उसकी क्रिया आसानी से प्रज्वलित हो जाती हैं। अगर उसमें भक्ति नहीं है, तो कई महिलाओं के लिए केवल क्रियाओं से अपनी ऊर्जा को गति देना बहुत कठिन हो जाता है।

एक पुरुष आमतौर पर ज्ञान, क्रिया, और कर्म के साथ अधिक सहज होगा। एक महिला आमतौर पर भक्ति और क्रिया के संयोजन के साथ अधिक सहज होती है बजाय ज्ञान और क्रिया के संयोजन के, लेकिन यह हर महिला या हर पुरुष के लिए सच नहीं है। लोग दोनों पहलुओं के बीच झूलते रहते हैं।

हम पुरुषों और महिलाओं को बिना कोई भेद किए क्रिया योग सिखाते हैं। लेकिन अगर लोग अभ्यास के एक निश्चित स्तर पर पहुँच जाएँ, तो मैं पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग तरह के अभ्यास भी सुझाऊंगा क्योंकि कुछ पारंपरिक अभ्यास महिलाओं के लिए उपयुक्त नहीं हैं। उनके जीव विज्ञान के लिए ऐसे अभ्यासों को करना अनुकूल नहीं होगा। यह सिस्टम  को परेशान कर देगा। उसी के अनुसार, अभ्यास को तैयार किया जा सकता है।

ऐसा नहीं है कि अतीत के गुरु महिलाओं के लिए अभ्यास बनाना नहीं चाहते थे, उन्होंने ऐसा इसलिए नहीं किया क्योंकि उनके शिष्यों में कोई महिला नहीं थी।