
30 जुलाई 2025, नई दिल्ली — अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली में एक जीवंत और प्रेरक सत्र में सद्गुरु ने छात्रों के साथ विस्तार से बातचीत की जो आज के युवा चिकित्सा पेशेवरों के लिए कुछ सबसे जरूरी और व्यक्तिगत विषयों पर केंद्रित थी।
छात्रों ने अनेक विषयों पर सवाल पूछे जिनमें शामिल विषय थे - मन की मूलभूत प्रकृति, मानवीय ध्यान का महत्व, मोबाइल की लत, और आध्यात्मिक प्रक्रिया कैसे किसी को बेहतर डॉक्टर बनने में सहायता कर सकती है। बातचीत में चिकित्सा प्रैक्टिस में करुणा की भूमिका भी शामिल थी।
जब सद्गुरु ने अपनी युवावस्था में चिकित्सा के क्षेत्र में किए गए आपातकालीन स्वयंसेवा के अपने अनुभव को सुनाया तो बातचीत ने एक दिलचस्प मोड़ लिया। उन्होंने होम्योपैथी और एक्यूपंक्चर जैसी वैकल्पिक और पूरक प्रणालियों पर अपने विचार भी साझा किए, और राशिफल के विषय को भी छुआ।
योग के विज्ञान, व्यक्तिगत अनुभव, और व्यावहारिक प्रासंगिकता को एक साथ लाते हुए, इस सत्र ने उपस्थित लोगों को इसके समाप्त होने के बाद तक सोचने के लिए बहुत कुछ दिया।
24 जुलाई 2025, ब्रुसेल्स– दुनिया के सबसे प्रसिद्ध इलेक्ट्रॉनिक संगीत महोत्सव में, 24 जुलाई 2025 को ब्रुसेल्स, बेल्जियम में एक अनूठी लेकिन गहन मुलाकात हुई। ब्राजीलियन डीजे अलोक अचकर पेरेस पेट्रिलो सद्गुरु से मिले, जिससे प्राचीन ज्ञान और आधुनिक उत्सव का एक अनूठा मेल बना।
अपनी बातचीत के दौरान, सद्गुरु ने टुमॉरोलैंड के दर्शकों के सामने एक मौलिक सवाल रखा - "बस मुझे यहां एक भी चीज़ दिखाएं जो चमत्कार नहीं है," जिसका जवाब स्वीकारोक्ति भरी हंसी, तालियों और जयकारों से मिला। उन्होंने अपनी बात को विशिष्ट हास्य के साथ समझाते हुए कहा, "आपके माता-पिता, वे बहुत कंजूस लोग हैं... उन्होंने आपको सिर्फ़ एक-एक कोशिका दी, वे दस लाख भी दे सकते थे। उस एक कोशिका से, देखिए आप कैसे बने हैं - क्या यह चमत्कार नहीं है?"
सद्गुरु ने आगे जोर देकर कहा, "आप एक चमत्कार हैं, मैं एक चमत्कार हूं, हर कोई एक चमत्कार है, लेकिन दुर्भाग्य से वे खुद को इस तरह अनुभव नहीं करते।" उन्होंने इस पहचान की कमी का कारण मानसिक कंडीशनिंग बताया, समझाते हुए कि "वे विचारों के मालिक नहीं हैं - विचार उनके मालिक हैं।"
चमत्कारों को फिर से परिभाषित करते हुए, सद्गुरु ने पूछा, "चमत्कार क्या है? यदि यहां कुछ ऐसा होता है जिसे आप तार्किक रूप से समझ नहीं सकते, तो वह चमत्कार है, है न?" उन्होंने महोत्सव में आए लोगों को उनकी ब्रह्मांडीय स्थिति की याद दिलाई, "अभी हम यहां एक गोल ग्रह पर बैठे हैं, यह धरती लगभग हज़ार मील प्रति घंटे की गति से घूम रही है... क्या यह चमत्कार नहीं है?"
उनकी मुलाकात के बाद, अलोक ने अपने लाखों फॉलोअर्स के साथ एक विचार साझा करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। "'गु' का मतलब अंधकार है, और 'रु' का मतलब दूर करने वाला है। तो गुरु वह है जो आपका अंधकार दूर करता है," उन्होंने लिखा, और बात जोड़ते हुए लिखा, "आपसे मिलना बहुत अच्छा था!"
6 जुलाई 2025, लंदन – यह उत्सुकता वर्षों से बनी हुई थी। जब लंदन में सद्गुरु के साथ सत्संग की घोषणा हुई, तो ब्रिटेन और यूरोप भर से आए साधकों ने ज्ञान, ध्यान और आनंद से भरी एक अविस्मरणीय शाम के लिए इस बहुप्रतीक्षित अवसर का पूरा लाभ उठाया।
सद्गुरु ने उपस्थित लोगों को अपनी खुद की बनाई और थोपी गई सीमाओं से ऊपर उठने की चुनौती दी और एक संदेश दिया जो विविध साधकों की सभा में गूंज उठा। सद्गुरु ने सभी को असहजता को अपनाने और सीमाओं को तोड़ने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा, "यदि आप उन रेखाओं को पार करना चाहते हैं जो प्रकृति ने रखी हैं, तो बहुत सी चीज़ें तैयार करनी होंगी। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि जो सीमाएं आपने अपने ऊपर थोपी हैं, उन्हें आपको हटाना होगा।
जो कुछ भी इस क्षण तक आपके बोध में है, जो कुछ भी आप समझते हैं, जो आपके बोध का परिणाम है, और जो कुछ भी आप वास्तविक मानते हैं, वह जीवन के एक खास आयाम के भीतर है।
अगर आप इसे तोड़ते हैं, तो सब कुछ थोड़ा उल्टा-पुल्टा हो सकता है या कुछ इस तरह से अलग हो सकता है जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की थी। हो सकता है कि यह आपके तार्किक दायरे में न आए। क्या यह ठीक है? अगर आप अपनी खींची हुई सारी रेखाएँ हटा दें, तो मैं आपको प्रकृति द्वारा खींची गई रेखाएँ हटाने में मदद करूँगा। तब जीवन एक छोटी-मोटी घटना नहीं, बल्कि शानदार हो जाता है। चीज़ों का एक शानदार प्रवाह।
इस शाम का प्रभाव तत्काल और गहरा था। एक प्रतिभागी ने कहा, "उन्हें व्यक्तिगत रूप से देखकर धन्य हुआ।" एक अन्य प्रतिभागी ने कहा, "वहाँ व्यक्तिगत रूप से होना सचमुच जादुई था।" तीसरे ने सद्गुरु के बारे में अपनी धारणा का वर्णन इन शब्दों में किया, "आप सचमुच प्रकाश हैं।"
5 जुलाई को, ईशा योग केंद्र में, जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री श्री जुएल ओराम का स्वागत किया गया, उन्होंने ईशा के सामुदायिक सशक्तिकरण के रूपांतरणकारी पहलों के प्रभाव पर प्रकाश डाला।
मंत्री महोदय ने ईशा के ग्रामीण आउटरीच कार्यक्रमों द्वारा समर्थित एक निकटवर्ती आदिवासी गाँव का दौरा करने से पहले ईशा योग केंद्र के प्राण-प्रतिष्ठित स्थलों का दर्शन किया। उन्होंने आदिवासी समुदाय के सदस्यों, विशेषकर महिलाओं की उल्लेखनीय उद्यमशीलता की यात्रा को प्रत्यक्ष रूप से देखा, जिन्होंने अपनी छोटी-छोटी शुरुआत को फलते-फूलते व्यवसायों में बदल दिया है।
मंत्री ओराम आदियोगी के पास आदिवासी उद्यमियों द्वारा संचालित दुकानों से विशेष रूप से प्रभावित हुए, जिनकी शुरुआती पूंजी मात्र ₹200 से बढ़कर ₹1 करोड़ से अधिक का कारोबार बन गई है। उन्होंने आदिवासी समुदायों को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने और कर-भुगतान करने वाले उद्यमी बनाने के लिए ईशा के प्रयासों की सराहना की।
मंत्री ने कहा कि इस तरह की पहल प्रधानमंत्री और सद्गुरु द्वारा परिकल्पित विकसित भारत के दृष्टिकोण के साथ पूरी तरह मेल खाती है, और उन्होंने देश भर में इसी तरह के प्रयासों को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।