
सेल्फ-हेल्प इंडस्ट्री लगातार सुधार के ज़रिए समाधान का वादा करती है, फिर भी सबसे सफल लोग भी अक्सर उतने ही खोए हुए महसूस करते हैं जितने बाकी सब। लेकिन क्या होगा अगर कोई भी नया तरीक़ा मौलिक समस्या को कभी हल न कर सके? क्या होगा अगर हम अपने दिमाग के शोर को वास्तविकता समझने लगें? सद्गुरु बताते हैं कि हम क्यों थक जाते हैं उस चीज़ को पाने की कोशिश में जो पहले से ही मौजूद है।
सद्गुरु: यहाँ हम जो कुछ भी कर रहे हैं उसका उद्देश्य क्या है? मूल रूप से, जीवन को वैसे जानना जैसा वह है, उस तरह नहीं जैसा आप इसके बारे में सोचते हैं। आप कैसे भी सोच सकते हैं, लेकिन यह उस तरह से नहीं है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि इसे वैसे समझें जैसा यह है। अगर आप नहीं जानते कि अस्तित्वगत क्या है और मनोवै
अगर आप नहीं जानते कि अस्तित्वगत क्या है और मनोवैज्ञानिक क्या है, तो आप खोए हुए हैं। इस स्पष्ट अंतर को स्थापित करना कि मनोवैज्ञानिक क्या है और अस्तित्वगत क्या है, आपके जीवन में जल्दी नहीं होता।
आप इतनी सारी चीज़ों से गुज़रते हैं जो आपकी अपनी बनाई हुई हैं, लेकिन आप सोचते हैं कि यह आपके साथ हो रहा है। आपके अस्तित्व की नियति इस बात में है कि आप अपने जीवन को कैसे अनुभव करते हैं, यह नहीं कि आप कहाँ रखे गए हैं।
तो, हम अपने जीवन को कैसे अनुभव करते हैं? एक स्तर पर, यह इस बारे में है कि हम अपनी मनोवैज्ञानिक संरचना को कैसे संभालते हैं। अगर हम उसे संभाल लें, तो इसका मतलब यह नहीं कि सब कुछ सुलझ गया, लेकिन आप उस जगह पहुँच जाते हैं जहाँ आपको दुख का डर नहीं होता। जब दुख का डर नहीं होता, आप पूरी गति से चलते हैं। वरना, जब तक दुख का डर है, हर कदम आधा-अधूरा होता है।
‘मेरे साथ क्या होगा?’ कुछ नहीं होगा। आप कुछ लेकर नहीं आए, और कुछ लेकर नहीं जाएंगे। कुछ पाने को नहीं, कुछ खोने को नहीं – लेकिन बीच में, कितना तमाशा बनाते हैं, क्योंकि आप मनोवैज्ञानिक चीजों को अस्तित्वगत समझ रहे हैं।
दो सहेलियाँ मिलीं, एक ने दूसरे से पूछा, "क्या तुम अपनी अंगूठी गलत उंगली में नहीं पहने हो?" दूसरी महिला ने कहा, "हाँ, मैंने गलत आदमी से शादी की है।" किसी ने कभी सही आदमी से शादी नहीं की है। ऐसी कोई चीज़ नहीं है। कृष्ण की दो पत्नियाँ भी हमेशा शिकायत करती थीं। बाकी सब सोचते थे कि वह सबसे महान आदमी हैं, लेकिन उनकी पत्नियाँ शिकायत करती थीं, क्योंकि वे जानती थीं कि उन्होंने सही आदमी से शादी नहीं की है।
अगर आप जानते हैं कि आप अस्तित्व में हैं, तो कोई समस्या नहीं है। आप सोच सकते हैं, भाव ला सकते हैं, काम कर सकते हैं, खा सकते हैं, सो सकते हैं – आप यह सब कुछ केवल इसलिए कर सकते हैं क्योंकि आप अस्तित्व में हैं।
लेकिन जब आप खाना खा रहे हैं, तो आप खाने वाले नहीं बन जाते। जब आप सोच रहे हैं, तो आप सोचने वाले नहीं बन जाते। यही दुनिया की समस्या है। अगर आप कुछ करते हैं – मान लेते हैं मैं मोटरसाइकिल चलाता हूँ, लोग कहते हैं, ‘ओह, वह मोटरसाइकिल चालक है।’ अगर मैं गेंद मारता हूँ, तो वे कहते हैं, ‘वह गोल्फ खिलाड़ी है।’ यह सब चीज़ें हैं जो आप करते हैं। आप हज़ार चीज़ें कर सकते हैं, लेकिन आपको वह बनने की ज़रूरत नहीं है।
जब तक आप अपने द्वारा किए गए कामों के आधार पर खुद को लेबल करते रहेंगे, तब तक आप कभी भी अस्तित्वगत रूप से यह अनुभव नहीं कर सकेंगे कि आप क्या हैं। आप बहुत सी चीज़ें कर सकते हैं या नहीं कर सकते, लेकिन आप वह नहीं बन जाते। आप कार्य नहीं हैं। आप हज़ार अलग-अलग काम कर सकते हैं, लेकिन वे आप नहीं हैं। अस्तित्वगत रूप से, आप बस हैं।
आप जो हैं – उसकी प्रकृति को आप नहीं जानते – यह एक वास्तविकता है। जब आप अपनी प्रकृति को नहीं जानते, तो जो भी आप करते हैं वह अर्थहीन होता है, अस्तित्वगत रूप से। यह सामाजिक रूप से प्रासंगिक हो सकता है, लेकिन अस्तित्वगत रूप से, यह प्रासंगिक नहीं है।
इसीलिए सफल लोग दुखी होते हैं। जो अपने जीवन में सफल नहीं हैं वे दुखी होते हैं क्योंकि वे दूसरों से अपनी तुलना करते हैं। तो फिर सफल लोग क्यों दुखी होते हैं? महलों में रहने वाले लोग क्यों दुखी होते हैं? धरती के सबसे अमीर लोग क्यों दुखी होते हैं? क्योंकि आपके पास जो भी है या आप जो भी करते हैं, वह इस बात को ठीक नहीं कर सकता कि आप अंदर से कैसे हैं।
आपकी अस्तित्वगत प्रकृति आपके अनुभव में तभी आएगी जब आप यह तय कर लेंगे कि आप अंदर से कैसे हैं। यह अंतिम नहीं है, लेकिन अगर आप यह तय कर लेते हैं कि आप कैसे होंगे, तो कम से कम आप खुद के रास्ते में बाधक नहीं हैं। दूसरी चीज़ें अभी भी रास्ते में बाधा हैं, लेकिन आप खुद अपने रास्ते में बाधा नहीं हैं – यही महत्वपूर्ण है। क्योंकि एक बार जब आप रास्ते में बाधा होते हैं, तो कोई और इसे हटा नहीं सकता। अगर दूसरी चीज़ें रास्ते में बाधा हों, तो हम उन्हें हटा सकते हैं।
एक बार जब आप खुद अपने रास्ते में बाधा नहीं हों, तो जीवन अपने तरीके से खिल जाएगा। आपको ज्यादा कुछ नहीं करना होगा। अगर आप रास्ते में बाधा नहीं हैं और आप यहाँ बैठते हैं, तो यह हो जाएगा। क्योंकि यह जीवन के बारे में है। और आप जीवन हैं।