महाशिवरात्रि की रात - जीवन को उल्लास मय बनाने की प्रेरणा

सद्गुरु आज के स्पॉट में बता रहे हैं कि ऐसा क्या था जिसने इस रात को उनके जीवन को सबसे महत्वपूर्ण रात बना दिया और साथ ही बता रहे हैं अपनी भावी योजना।
मैंने कई कार्यक्रमों में भाग लिया है, लेकिन अभी तक मैंने ऐसा कोई आयोजन नहीं देखा। महाशिवरात्रि 2019 की यह रात कई मायनों में अतुलनीय थी, अब तक की सबसे अनोखी रात थी।
महाशिवरात्रि - प्रेरणा का स्रोत
इस रात से आपको प्रेरणा मिलनी चाहिए कि आप अपने तन व मन की सीमाओं से परे जाकर सच्चे व पूरे जोशमय ढंग से जी सकें। अपने तन की सीमाओं से परे जाकर काम करने का भी एक तरीका है। अपने मनोवैज्ञानिक ढांचे से बाहर निकल कर काम करने का भी एक तरीका है। इसी तरीके को हम दुनिया के सामने लाना चाहते हैं। आदियोगी इसी को दर्शाते हैं। योग विज्ञान भी इसी के बारे में है।
मैं चाहता हूं कि आपमें से हर व्यक्ति योग वीर बने और आने वाले बारह महीनों में योग सरल साधनों के जरिए कम से कम सौ लोगों को रूपांतरित करे। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम कितने अस्पताल बनवाते हैं या हमारा मेडिकल साईंस कितनी तरक्की करता है, लेकिन इंसान की सेहत तब तक नहीं सुधरने वाली, जब तक हर व्यक्ति अपनी सेहत की कमान खुद अपने हाथ में न ले ले। हर व्यक्ति अपने कल्याण, अपनी खुशी व अपनी परम मुक्ति के लिए खुद जिम्मेदार है। सरकार, कॉर्पोरेट्स व प्रशासन सिर्फ आपके कल्याण व बेहतरी का बुनियादी ढांचा उपलब्ध करा सकते हैं, लेकिन कल्याण का स्रोत खुद आपके भीतर छिपा है। अपनी भीतरी प्रकृति की कमान खुद संभालने पर ही मनुष्य वाकई मुक्त हो सकते हैं। हम चाहते हैं कि यह अनुभूति और यह संभावना हर इंसान के लिए उपलब्ध हो।
सद्गुरु द्वारा लिखी गयी कुछ कविताएं
मुझे अपने दिल पर गर्व था।
ऐसा दिल जो एक चट्टान की तरह मजबूत और स्थिर था।
फिर वे बिना बुलाएआए, और मेरे दिल को धड़का दिया
और कर दिया लहुलुहान।
यह धड़कने लगा हर जीव और पत्थर के लिए।
एक सौ बारह चालें, इस नश्वर पिण्ड को पस्त करने (मात देने) के लिए।
पर मुझे इन चालों में फंसा दिया। चालबाज हैं वो, फंस गया मैं उनकी चाल में।
उस किसी भी चीज के बारे में,
मैं न तो सोच सकाता हूं,
न कुछ कर सकता हूं,
जो मेरा या मेरे लिए है।
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सभी मीठे स्वरों को सुनने के बाद,
सभी अद्भुत दृश्यों को देखने के बाद,
सभी सुखद संवेदनाओं की अनुभूति के बाद।
मैंने अपना सारा बोध खो दिया,
उनके लिए जो नहीं हैं, पर अनुपम हैं,
उनके समान कोई दूसरा नहीं।
ना वे प्रेम हैं, ना ही करुणा।
उनसे सांत्वना व आराम न मांगें।
वे तो पूर्णता के लिए हैं।
आईये, उस निराकार के परम आनंद को जानिए।
तृप्ति का आनंद नहीं।
यह खेल है खुद को मिटाने का।
क्या आप एक ऐसे खेल के लिए तैयार हैं
जहां से वापसी नहीं होती।
क्या आप खुद को दफनाने के लिए,
अपने भव्य दाह संस्कार के लिए वहां रहेंगे।
शमशान के चंडाल - मेरे शिव, की आतिशबाजियां ।
क्या आपको उनपर विश्वास नहीं है,
जो निश्चल हैं।
उन्होंने मुझे अपनी निश्चलता से अंदर खींच लिया।
मुझे लगा कि वे ही मार्ग हैं।
सावधान, वे अंत हैं।