क्या चुम्बक पहनने से बीमारी ठीक हो सकती है?

क्या चुम्बक पहनने से बीमारी ठीक हो सकती है?

सद्‌गुरुआजकल बहुत से लोग ऐसे हैं जो अपने शरीर पर चुंबक पहनते हैं। इसके पीछे का क्या कोई वैज्ञानिक तर्क है? क्या इससे वाकई लाभ हो सकता है? सद्‌गुरु बता रहे हैं कि धरती खुद ही एक बड़ा चुम्बक है, और कैसे हम खुद को धरती की सीधा में ला सकते हैं।

प्रश्न: मेरा सवाल चुंबकीय शक्ति के बारे में है। चुंबक मानव शरीर पर किस तरह असर डालते हैं और क्या चुंबकीय शक्ति में उपचारी गुण होते हैं?

धरती खुद सबसे बड़ा चुम्बक है

सद्‌गुरु : अगर आप अपने शरीर पर कोई चुंबक पहनें, तो वह आपके शारीरिक मापदंडों में थोड़ा-बहुत बदलाव ला सकता है मगर उसका वास्तव में कोई अर्थ नहीं है।

अगर आप चुंबक पर ही रहते हैं, तो आपको किसी और चुंबक की क्या जरूरत है? यह धरती बहुत बड़ी चुंबक है और आपका शरीर इसी चुंबक का एक हिस्सा है।
यह कुछ ज्यादा ही एकतरफा तरीका है। इंसानी शरीर इससे कहीं अधिक जटिल है। किसी इलेक्ट्रिकल ट्रांसमिटर के पास खड़े होने भर से भी आपके शरीर में बदलाव आते हैं। यहां तक कि अगर आप किसी पेड़ के पास खड़े होते हैं, तब भी आपके शारीरिक सिस्टम में मापने लायक बदलाव होंगे।

हम जिस ग्रह पर रहते हैं, वह खुद एक चुंबक है, इसलिए यह बहुत हास्यास्पद है कि कुछ कारोबारी छोटे-मोटे चुंबकों से आपका जीवन बदलने का दावा करते हैं। अगर आप चुंबक पर ही रहते हैं, तो आपको किसी और चुंबक की क्या जरूरत है? यह धरती बहुत बड़ी चुंबक है और आपका शरीर इसी चुंबक का एक हिस्सा है।

धरती के साथ तालमेल

इंसानी शरीर पर धरती का काफी प्रभाव पड़ता है। मसलन, खड़े होने या धरती पर लेटने पर आपके शरीर के शारीरिक मापदंड अलग-अलग तरह से काम करते हैं।

जब लोग अपने निवास के आस-पास एक छोटे घेरे में ही गुजर-बसर करते थे, तो उनका शरीर कुदरती तौर पर धरती की उस खास जगह के तालमेल में आ जाता था।
आपके शरीर पर धरती की चुंबकीय शक्ति के प्रभाव और उसकी दिशा के कारण ही आपको उत्तर की तरफ सिर करके (उत्तरी गोलार्ध में) सोने से मना किया जाता है क्योंकि वह आपके लिए अच्छा नहीं है।

कुछ अभ्यास ऐसे हैं जिनके जरिए आप खुद को उस जगह के साथ सीध में ला सकते हैं, जिस जगह पर आप रहते हैं। मगर वे सिर्फ उन दिनों असरदार होती थीं, जब लोग अधिक घूमते नहीं थे। अपने रहने के स्थान से वे दस मील से अधिक दूर नहीं जाते थे। जब लोग अपने निवास के आस-पास एक छोटे घेरे में ही गुजर-बसर करते थे, तो उनका शरीर कुदरती तौर पर धरती की उस खास जगह के तालमेल में आ जाता था। अगर हम आपको एक जगह पर बहुत मजबूती से धरती के साथ सीध में ले आयें, तो उसके बाद अलग-अलग जगहों की यात्रा करने पर आपके अंदर अपने शरीर को फिर से उन स्थानों के साथ सीध में लाने के लिए जरूरी जानकारी और काबिलियत होनी चाहिए। वरना आपका शरीर किसी न किसी तरह से परेशान होगा।

धरती रुपी चुम्बक से जुड़ने के तरीके

मगर हम सब जिस विशाल चुंबक पर रहते हैं और जिससे बने हैं, उसके साथ जुड़ाव बढ़ाने के कई तरीके हैं, जो कलाई पर छोटे चुंबक पहनने से कहीं अधिक फायदेमंद हैं।

सुबह अपनी साधना खत्म करने के बाद अपने पैरों को उस गड्ढे के अंदर डालकर उसे अपने टखनों से ठीक ऊपर तक भर दीजिए और तीस-चालीस मिनट तक मिट्टी में गड़े हुए वहां बैठे रहिए।
अगर आपके पास एक बगीचा और थोड़ी एकान्तता है, तो आप अपने बगीचे में दो फीट गहरा एक गड्ढ़ा खोद लीजिए। सुबह अपनी साधना खत्म करने के बाद अपने पैरों को उस गड्ढे के अंदर डालकर उसे अपने टखनों से ठीक ऊपर तक भर दीजिए और तीस-चालीस मिनट तक मिट्टी में गड़े हुए वहां बैठे रहिए।

आपका सिस्टम अच्छी तरह इस विशाल चुंबक के साथ सीध में आ जाएगा, और आपको अपने शरीर पर चुंबक लेकर घूमने की जरूरत नहीं होगी। इस क्रिया के कई लाभ हैं। सेहत के मामले में धरती के तालमेल में खुद को लाने पर शरीर में कोई एलर्जी नहीं होगी। एलर्जी बुनियादी तौर पर यह दर्शाती है कि आपके भीतर कोई चीज इस धरती की जीवन बनाने वाली सामग्री के तालमेल में नहीं है, और आप इस धरती पर थोड़े से एलियन या बाहरी जीव बनते जा रहे हैं।

पृथ्वी, सूर्य और चंद्र के तालमेल में होने से मिलती है तन्त्र पर महारत

आपने सुना होगा कि कुछ योगी गर्दन तक मिट्टी में दबकर साधना करते थे। आपको उस हद तक जाने की जरूरत नहीं है, मगर धरती के संपर्क में रहना सेहत, खुशहाली और कुछ खास आध्यात्मिक क्रियाओं के मामले में बहुत लाभदायक हैं।

आप सिर्फ पैरों को मिट्टी में गाड़ने से शुरुआत कर सकते हैं और अगर यह आपके लिए असरदार होता है, तो इसे गर्दन तक कर सकते हैं! मड बाथ लेना भी एक ऐसा तरीका हो सकता है, जो आपके शरीर की सतह से जुड़ा है।
जब लोग कुछ खास काबिलियत हासिल कर लेते हैं, जैसे वे अपने शरीर को हवा जितना हल्का बना लेते हैं, पानी पर चलते हैं या ‘अलौकिक’ मानी जाने वाली दूसरी चीजें करते हैं, तो यह सब एक तरह से अपने भौतिक अस्तित्व को खगोलीय पिंडों के साथ सीध में लाने की क्षमता ही है।

 इंसान के साथ होने वाली घटनाओं में नौ खगोलीय पिंड एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन नौ में से, पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं। अगर आपका सिस्टम कम से कम इन तीन के तालमेल में है और आप किसी भी दिन चंद्रमा तथा सूर्य के साथ पृथ्वी के बदलते संबंध के प्रति जागरूकता से संवेदनशील हैं और आप उसके अनुसार अपने सिस्टम को एडजस्ट या व्यवस्थित करना जानते हैं, तो आप तंत्र विद्या में महारत हासिल कर सकते हैं। यह क्षमता और काबिलियत सिर्फ उन शक्तियों के तालमेल में होने से आती है, जो आपके भौतिक शरीर को आकार देती हैं, और जो उसकी प्रकृति और रूप निर्धारित करती हैं।

आप सिर्फ पैरों को मिट्टी में गाड़ने से शुरुआत कर सकते हैं और अगर यह आपके लिए असरदार होता है, तो इसे गर्दन तक कर सकते हैं! मड बाथ लेना भी एक ऐसा तरीका हो सकता है, जो आपके शरीर की सतह से जुड़ा है। आप इनमें से कोई भी तरीका आजमा सकते हैं मगर पैरों वाला तरीका सबसे आसान है।


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