बुरी नजर से कैसे बचें?

बुरी नजर से कैसे बचें

सद्‌गुरुसद्‌गुरु से प्रश्न पूछा गया कि क्या नजर लगना एक सच्चाई है? और अगर ऐसा होता है तो इससे कैसे बचाव कर सकते हैं? जानते हैं सद्‌गुरु से

पल्लवी: सद्‌गुरु, जब कोई व्यक्ति हमें ईर्ष्या की नजर से देखता है तो हम कहते हैं कि ‘बुरी नजर लग जाती है।’ क्या वाकई ‘बुरी नजर’ जैसी कोई चीज होती है? अगर ऐसा सचमुच है तो क्या हमें इसकी चिंता करनी चाहिए और हम इससे अपना बचाव कैसे कर सकते हैं?

सद्‌गुरु: अगर आप अपने माथे पर लाल रंग से आंख बना लें तो बुरी नजर नहीं लगेगी। यही वजह थी कि भारतीय महिलाएं अपने माथे पर लाल रंग की बड़ी बिंदी लगाती थीं। धीरे-धीरे इसका आकार घटता गया। पिछली पीढ़ी तक यह काफी बड़ी हुआ करती थी। धीरे-धीरे यह नाममात्र के बिंदु तक आ गई। पहले यह बिंदी एक खास तरह के पदार्थ से बनाई जाती थी। इसे बनाने के लिए हल्दी व चूने का इस्तेमाल होता था, जिसको लगाने से त्वचा पर कोई नुकसान न हो। खासकर अगर कोई महिला बहुत सुंदर होती थी तो उसके चेहरे पर बड़ी सी बिंदी लगाते थे। क्योंकि स्वाभाविक तौर पर लोगों की नजर वैसे इंसान पर पड़ती है, जो शारीरिक रूप से सुंदर हो। तो इस तरह बुरी नजर का असर उस महिला के स्वास्थ्य, खुशहाली व दूसरी चीजों पर कम पड़ता था, इसलिए बड़ी बिंदी लगाई जाती थी।

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मन की शक्ति चीज़ों को प्रभावित कर सकती है

आप इन सब चीजों में मत पडि़ए, क्योंकि तब आप यह सोचना शुरु कर देंगे कि ‘ओह! मेरे पेट में दर्द इसलिए हो रहा है, क्योंकि उसने मुझे देखा।’ हां, लोग चीजों को प्रभावित कर सकते हैं।

अगर आपने खुद को इस तरीके से बना रखा है कि कोई बाहरी प्रभाव आपके भीतर होने वाली चीजों को तय नहीं करता, तो फिर इससे कोई फर्क नही पड़ता कि कौन आपकी तरफ देखता है।
अगर मैं एक गिलास पानी लेकर उसे एक मिनट तक देखूं, तो पानी का मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर बदल जाएगा और इस बात को हम साबित कर सकते हैं। यह बदलाव सकारात्मक भी हो सकता है और नकारात्मक भी। दोनों ही स्थितियां संभव हैं।

शकिसी बिंदु पर फोकस किया हुआ मन बेहद क्तिशाली होता है। खतरनाक है या नहीं, यह उसकी मंशा पर निर्भर करता है। अगर आपके मन में एक खास तरह की एकाग्रता है और इसे ऊर्जावान कर दिया जाए, अगर आप अपने विचारों को सशक्त करने में सक्षम हों, तो विचार बेहद शक्तिशाली हो उठते हैं। एक क्रोधित मन या, एक कामुक मन या एक बेहद प्रेममय मन – ये सभी बेहद शक्तिशाली मन हैं।

इनके शक्तिशाली होने का कारण प्रेम या गुस्सा नहीं, बल्कि बस इतना है कि वे एक बिंदु पर केंद्रित हो जाते हैं। अगर कोई चीज एक बिंदु पर केंद्रित हो जाती है तो अचानक उसकी ताकत बढ़ जाती है। जागरूकता की वजह से भी मन एक बिंदु पर केंद्रित हो सकता है, या साधना की वजह से, या फिर गुस्से के चलते भी हो सकता है। गौर कीजिए कि जब आप किसी व्यक्ति से नाराज होते हैं तो आपका मन एक बिंदु पर केंद्रित हो जाता है। हो सकता है कि प्रेम में मन भटके, लेकिन गुस्से और नफरत में यह एक बिंदु पर टिक जाता है, जिसकी वजह से यह प्रभावशाली हो सकता है। तो जब व्यक्ति गुस्से, नफरत व लालच की बहुत तीव्र अवस्था में होता है और वह वाकई किसी चीज पर अपना मन केंद्रित करता है, तो दूसरे व्यक्ति के साथ कुछ चीजें हो सकती हैं। मैंने कहा कुछ हो सकता है, ऐसा नहीं कि वो होकर रहेगा।

नजर से बचने के लिए क्लेश नाशन क्रिया करवा सकते हैं

यह इस पर भी निर्भर करता है कि आप कितने नाजुक हैं। अगर आपने खुद को इस तरीके से बना रखा है कि कोई बाहरी प्रभाव आपके भीतर होने वाली चीजों को तय नहीं करता, तो फिर इससे कोई फर्क नही पड़ता कि कौन आपकी तरफ देखता है। आप खुद को उससे मुक्त रख सकते हैं। अगर आप अपने आसपास की हर चीज से हरदम प्रभावित होकर नाजुक हो गए हैं, तो कुछ खास लोग आप पर असर डाल सकते हैं। वे सिर्फ आपको देखकर ही आपको बीमार बना सकते हैं। ऐसा बिल्कुल संभव है। इससे बचने के लिए हमारे पास आसान सा तरीका है। इसके लिए हम लोग व्यक्ति को अग्नि स्नान कराते हैं, जिसे हम ‘क्लेशनाशन’ कहते हैं। दरअसल, जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के प्रभाव में होता है, तो सबसे पहला प्रभाव उसकी सबसे बाहरी परत में होता है। फिर संभव है कि धीरे-धीरे यह उसके भीतर उतरता जाए और फिर उसे परेशान करे। यह एक बीमारी का रूप भी ले सकता है, इससे मृत्यु तक हो सकती है। कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिनके देखने भर से सामने वाले की मृत्यु हो सकती है।

मन ऐसा ही होता है। यह कई तरह से आश्चर्यजनक काम कर सकता है, इसमें जबरदस्त संभावनाएं छिपी हैं। लेकिन लोग इससे अलग तरीके का काम लेते हैं। ऐसी जो भी चीजें बनाई जाती हैं, जो जीवन के स्तर को आगे बढ़ा सकती हैं, जो जीवन बचा सकती हैं, उसे सुंदर बना सकती हैं, वही चीजें जीवन को बर्बाद भी कर सकती हैं। रोज ऐसा हो रहा है।

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आपकी नजर से दूसरे सुखी हो सकते हैं

तो बेहतर होगा कि आप खुद को ऐसा बनाएं कि कोई भी चीज, या व्यक्ति, आप जैसे भी हैं या जो भी हैं, उसे प्रभावित न कर पाए। यही चेतना का मतलब है। अगर आप चेतनापूर्ण हो गए तो आप स्वाभाविक तौर पर अपने भीतर असुखद चीजों के बदले सुखद चीजों को ही पसंद करेंगे। एक बार अगर आपने सुखद चीजों को चुन लिया तो फिर आपके भीतर से भी सुखद अहसास ही बाहर आएगा। तब जो भी आपके संपर्क में आएगा, वह सुखद अनुभूति से भर उठेगा। अगर आप अचेतन हैं, सिर्फ तभी आप अप्रिय चीजों को चुनेंगे। अगर आप सचमुच चेतनापूर्ण हैं, तो मधुरता आपकी स्वाभाविक पंसद होगी। अगर आप अपने भीतर यह चीज ले आएं और तब आप किसी चीज को देखें तो सुखद चीजें घटित होंगी। लेकिन अगर आप खुद अपने भीतर अप्रियता से भरे हैं, ईर्ष्या से भरे हैं, और तब आप किसी चीज को देखेंगे तो बुरी चीजें ही घटित होंगी। तो क्या ऐसी चीजों का वजूद है? बिल्कुल है। लेकिन क्या आपको खुद को इन चीजों से प्रभावित होने देना चाहिए? बिल्कुल नहीं।

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