सद्‌गुरु: भारत में एक सुंदर नीति कथा मशहूर है। एक व्यक्ति एक पेड़ की डाल पर बैठकर उसी डाल को काट रहा था। उस आदमी की हालत सोचिए कि अगर वह इसमें कामयाब हो जाता है, तो वह गिर जाएगा यानी उसकी हार होगी। फिलहाल इस धरती पर हमने आर्थिक इंजन को जिस तरह से बेलगाम छोड़ रखा है, उसकी हालत कुछ ऐसी ही हैं। अगर वह मंज़िल पर पहुँच गई तो हम फ़ेल हो जाएँगे। यह कितना बेतुका है कि हम फ़ेल होने के लिए प्रार्थना करें? हम अभी उसी मुकाम पर हैं।

बौद्धिक रूप से इसे समझकर लोग मूर्खतापूर्ण चीजें करने लगेंगे। अगर आप अनुभव से इस पर पहुंचेंगे, तो यह एक समाधान होगा।

अधिकांश लोग समझ नहीं पाए हैं कि इस धरती पर जीवन कोई लेन-देन नहीं है, वह बस एक दूसरे का एक विस्तार है। समाज में हम लेन-देन कर सकते हैं, मगर जब जीवन की बात आती है, तो यह जीवन का एक समूह है, वे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग नहीं हैं। जिसे आप मेरा शरीर कहते हैं, वह बस इस धरती का एक टुकड़ा है। दुर्भाग्य से, अधिकांश लोग तब तक इस बात को समझ नहीं पाते, जब तक कि वे मिट्टी में नहीं मिल जाते। आप सिर्फ अपने मनोवैज्ञानिक ढांचे में एक अलग इंसान हैं। शारीरिक रूप से आप एक अलग इंसान नहीं हैं। एक जीवन शक्ति के रूप में आप एक अलग इंसान नहीं हैं। आप इस दुनिया में बाकी सभी चीजों के साथ मिलकर घटित हो रहे हैं। यह एक सच्चाई है, जिसे आज के भौतिक विज्ञानी साबित कर रहे हैं। भौतिकी(फिजिक्स) आपको बताती है कि सब कुछ हर पल एक दूसरे से जुड़ा होता है। मगर यह ऐसी चीज है, जो आपके अनुभव में अवश्य आनी चाहिए। बौद्धिक रूप से इसे समझकर लोग मूर्खतापूर्ण चीजें करने लगेंगे। अगर आप अनुभव से इस पर पहुंचेंगे, तो यह एक समाधान होगा।

अगर दुनिया के लीडर्स ध्यान करने लगें

मैं एक बार अमेरिका के एक बहुत एक्टिव पर्यावरण कार्यकर्ता के साथ था, उसने मुझसे पूछा, ‘सद्गुरु हमें क्या करना चाहिए? हम सभी कुछ न कुछ कर रहे हैं, लेकिन हम जानते हैं कि उससे कुछ नहीं होगा।’ मैंने कहा, ‘दुनिया के सभी नेताओं को ध्यान करना चाहिए।’ जब हम ध्यान कहते हैं, तो पश्चिम में लोग पूछते हैं, ‘मैं किस चीज का ध्यान करूं? किसी पेड़ का या धरती या दुनिया का?’ ध्यान किसी चीज के बारे में नहीं है। ध्यान का मतलब है, खुद को तरल बनाना। अभी आप एक कंक्रीट ब्लॉक की तरह हो गए हैं, जो बाकी हर चीज से अलग है। जब आप ध्यान में बैठते हैं, तो धीरे-धीरे कुछ समय बाद, आप साफ-साफ जान जाते हैं कि आप जो हैं, वह एक अलग अस्तित्व नहीं है। वह हर चीज के साथ एक है। अगर धरती के नेताओं में यह एक जीवंत अनुभव बन जाए तो सभी समस्याएं ठीक हो सकती हैं। चाहे कितना भी नुकसान हो चुका हो, उसे ठीक करने में ज़्यादा मेहनत नहीं लगेगी। पच्चीस सालों में हम उसे काफी हद तक पलट सकते हैं। आपके और मेरे मरने से पहले हम इसे ठीक कर सकते हैं, मगर इसके लिए टॉप लेवल सपोर्ट की जरूरत है।

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