अनजाने में गलती हो जाए तो क्‍या करें?

अनजाने में गलती हो जाए तो क्‍या करें
अनजाने में गलती हो जाए तो क्‍या करें

सद्‌गुरुएक साधक सद्‌गुरु से प्रश्न पूछ रहे हैं कि उनकी पत्नी से अनजाने में एक गलती हो गई है, जिससे सीबीआई जांच शुरू हो गई है। कैसे निपटें ऐसी गलती से?

प्रश्न : सद्‌गुरु, मैं एक संस्थान में एक ऑफिसर के तौर पर काम करता हूं। मेरी पत्नी भी उसी संस्थान में काम कर रही हैं। मेरी पत्नी से अनजाने में एक छोटी सी गलती हो गई, जिसकी वजह से हमारे संस्थान के कुछ लोग जो फील्ड में काम करते थे, सीबीआई जांच के घेरे में आ गए। इस समस्या से कैसे निपटा जाए?

भारत में लोग पद की जिम्मेदारी नहीं समझ पाए हैं

सद्‌गुरु : कोई भी व्यक्ति जानबूझकर किसी जांच के घेरे में आना नहीं चाहता। यह हमेशा अनजाने में ही होता है। यह एक सरकारी प्रक्रिया है, जिस पर मैं बात नहीं करना चाहता, लेकिन हम इसके इंसानी पहलू पर चर्चा करेंगे। मुझे लगता है कि भारत में ज्यादातर लोग एक बात ठीक तरह से नहीं समझ पाए हैं। उन्हें लगता है कि नौकरी बस एक प्रिविलेज है, विशेषाधिकार है, कोई जिम्मेदारी नहीं। जब आप कोई पद लेते हैं तो उसके साथ आपको कुछ विशेषाधिकार तो मिलता है, लेकिन वो अधिकार बाद में आता है, सबसे पहली चीज होती है जिम्मेदारी। जिम्मेदारी का मतलब है कि अगर काम ठीक तरीके से हुआ तो उसका श्रेय आपको मिलेगा और गलत हुआ तो उसकी भी जिम्मेदारी आपकी ही होगी।

सिर्फ इमानदारी नहीं, जानकारी भी चाहिए

जब हम कोई पद लेते हैं, तो उससे जुड़ी सुविधाओं का लाभ उठाते हैं, कई अधिकारों का हम अपनी जिंदगी मेंं आनंद लेते हैं। अगर आनंद हम ले रहे हैं, तो जब चीजें गड़बड़ होंगी तो उसकी जांच भी होगी ही।

जब आप नौकरी करते हैं तो बात सिर्फ आपके ईमानदार होने की नहीं है, बल्कि आप जो भी कर रहे हैं उसे कैसे किया जाए, इस बारे में भी आपको अच्छी तरह से जानकारी होनी चाहिए।
यह सब जिम्मेदारी भरे पद का ही हिस्सा है। इसके अलावा कोई और अलग तरीका है ही नहीं। अगर मुझसे पूछा जाए तो मैं तो कहूंगा कि अफसोस की बात है कि इस देश में कई सारी जांचें हुईं ही नहीं। बहुत सारे लोग कई तरह की बड़ी-बड़ी गलतियां करके छूट जाते हैं। सभी तो नहीं – क्योंकि बहुत से तो असल में भ्रष्ट ही हैं, वो एक अलग बात है – पर कई लोग बड़ी बड़ी गलतियां कर रहे हैं। वे ऐसा जानबूझकर नहीं करते बल्कि शायद अज्ञानता की वजह से करते हैं। जब आप कोई जिम्मेदारी भरा पद लेते हैं तो माना जाता है कि आप अपने काम को जानते होंगे। अफसोस यह है कि भारत में माना जाता है कि आपके लिए अपनी नौकरी के बारे में जानना जरूरी नहीं है। जब तक आप सामने वाले से पैसे नहीं लेते, आप एक अच्छे इंसान हैं। अगर देश को आगे बढऩा है तो यह चीज बदलनी चाहिए। जब आप नौकरी करते हैं तो बात सिर्फ आपके ईमानदार होने की नहीं है, बल्कि आप जो भी कर रहे हैं उसे कैसे किया जाए, इस बारे में भी आपको अच्छी तरह से जानकारी होनी चाहिए। जब चीजें गड़बड़ होती हैं, तो जांच तो होगी ही। सवाल है कि इससे कैसे निपटा जाए? संभवत: वे यह जानने की कोशिश करते हैं कि आपने यह गड़बड़ जानबूझकर की या अनजाने में। दरअसल, इस देश में आपको आपकी गलतियों के लिए दंडित नहीं किया जाता, बल्कि आपको केवल तभी सजा दी जाती है, जब आपने चोरी की होती है। और वो सजा भी आपको तभी मिलती है, जब आपका कहीं कोई कनेक्शन नहीं होता।

भारत में गलती पर सज़ा नहीं मिलती

एक देश के रूप में हम उस मुकाम पर नहीं पहुंच पाए हैं, जहां लोगों को उनकी भूलों पर सजा दी जाती हो। अगर आप अमेरिका में हों और गलती करें तो आपको जेल जाना पड़ता है।

 जिस दिन आप कोई पद संभालें, उसी दिन से आपको पता हो कि आपने एक जिम्मेदार पद लिया है और इसमें आपसे कोई गलती होती है तो आपको उसकी कीमत चुकानी होगी। यह बात हर चीज पर लागू होती है।
 अपने यहां ऐसा है कि अगर आप ड्राइविंग नहीं जानते और फिर भी गाड़ी चला रहे हैं और आप अपनी गाड़ी से किसी को मार देते हैं तो अगले ही दिन आप पांच हजार रुपए देकर फिर से सडक़ पर गाड़ी चला सकते हैं। ऐसा अगर किसी और देश में हो तो आपको कुछ साल जेल में बिताने पड़ेंगे। अगर आप कार चला रहे हैं तो आपको पता होना चाहिए कि कार कैसे चलाई जाती है। बिना ड्राइविंग जाने आपको इतनी पावर अपने हाथ में नहीं लेनी चाहिए। यही बात किसी भी जिम्मेदारी का पद लेने पर भी लागू होती है। अगर हम चाहते हैं कि यह देश एक काम करने वाला देश बने तो यह बात व्यवहार में लागू होनी चाहिए। गलती होने पर सिर्फ सफाई देने से काम नहीं चलेगा। सफलता और असफलता के बीच फर्क सिर्फ इतना है कि जो लोग असफल होते हैं, वे हर चीज के लिए सफाई देते हैं, जबकि सफल लोगों को कुछ भी स्पष्ट करने की जरुरत नहीं होती। अगर हम सफल होना चाहते हैं, तो लोगों को उनकी गलती की सजा मिलनी चाहिए। बेशक इस मामले में गलती की गंभीरता भी देखी जानी चाहिए। छोटी गलतियों को छोड़ भी दें तो भयंकर भूलों के लिए सजा मिलनी ही चाहिए। आपको अपने काम के बारे में पता होना चाहिए। जिस दिन आप कोई पद संभालें, उसी दिन से आपको पता हो कि आपने एक जिम्मेदार पद लिया है और इसमें आपसे कोई गलती होती है तो आपको उसकी कीमत चुकानी होगी। यह बात हर चीज पर लागू होती है। आपके पूरे जीवन पर लागू होती है। अगर आप अपने परिवार के प्रति कोई गलती करते हैं तो उसकी भी एक कीमत चुकानी पड़ती है। यहां तक कि आपका परिवार भी आपको नहीं बख्शता। क्या वे माफ करते हैं?

गलतियों से सीखना होगा हमें

जहां तक इस हालात से मिले सदमे से निपटने का सवाल है, तो सदमा हालात की वजह से नहीं होता। लोगों को लगता है कि परिस्थितियां चोट पहुंचाने वाली होती हैं।

लेकिन अगर आप रिएक्ट करेंगे तो आप जो कुछ कर भी सकते हैं, वह भी नहीं कर पाएंगे। आप सब तरफ उछल-कूद करते रहेंगे और नतीजा आने से पहले हो सकता है आप मर चुके होंगे, भले ही नतीजा सकारात्मक ही आ जाए। 
नहीं, परिस्थितियां तो अपनी जगह होती हैं, लेकिन आप सदमे में आ सकते हैं। सुखद व दुखद दोनों ही अनुभव कभी बाहरी दुनिया में नहीं, बल्कि हमारे अपने भीतर होते हैं। परिस्थितियां तो बस परिस्थितियां होती हैं, अगर हम गलती करते हैं तो कम से कम हमें यह तो पता होना चाहिए कि उन गलतियों के नतीजों का सामना कैसे करें। इतना ही नहीं, हमें उनसे सीखने की कोशिश भी करनी चाहिए, क्योंकि यह कोई ऐसी अकेली गलती नहीं होगी, जो आप जीवन में करेंगे। हर इंसान से गलती होने की हमेशा संभावना होती है। इसलिए अगर आप नौकरी में बने रहना चाहते हैं, तो यह भी सीखना चाहिए कि गलती होने के बाद उसे कैसे ठीक किया जाए, उसे कैसे सुधारा जाए। क्योंकि अगर आपने दूसरा कोई गलत कदम उठा लिया तो कल को पता नहीं क्या होगा।

सदमे का मतलब है कि आप अपनी भीतरी अवस्था को भी बाहर की अवस्था की तरह बना रहे हैं। फिलहाल आज दुनिया में जो भी परिस्थितियां हैं – आपकी नौकरी या किसी को भी लेकर या आपके परिवार में जो कुछ भी चल रहा है, उसका वास्तव में आपके लीवर, किडनी, दिल या किसी और अंग से कोई लेना-देना नहीं होता। आप जिस तरह से सोचते या महसूस करते हैं और चीजों के प्रति अपनी प्रतिक्रिया देते हैं, उसी से सारी चीजें चलती हैं। सदमे का मतलब है कि आप जिस तरह से चीजों को लेकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं, उसमें ये सारे अंग अलग तरीके से काम कर रहे हैं। जीवन की पूरी प्रक्रिया का सार ही यही है कि घटनाओं के प्रति आपकी प्रतिक्रिया किसी बाध्यता से नहीं चेतना से संचालित हो। अगर आपकी प्रतिक्रिया सचेतन होगी, तो आप जो सबसे बेहतर कर सकते हैं, करेंगे और उसके नतीजे का इंतजार करेंगे।

गलती करने के बाद रिएक्ट करने से समय बर्बाद होगा

लेकिन अगर आप रिएक्ट करेंगे तो आप जो कुछ कर भी सकते हैं, वह भी नहीं कर पाएंगे। आप सब तरफ उछल-कूद करते रहेंगे और नतीजा आने से पहले हो सकता है आप मर चुके होंगे, भले ही नतीजा सकारात्मक ही आ जाए। सदमा लोगों को मार सकता है। तो अपनी गलतियों को सुधारने के लिए जो हम बेहतर कर सकते हैं, हमें वहीं करना चाहिए और इंतजार करना चाहिए, कुछ न कुछ होगा। अगर आपके पास नौकरी है तो आप ऑफिस जाएंगे। अगर नौकरी नहीं है, तो आप रोज किसी नदी, झील में जाकर तैर सकते हैं।


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