लीला – एक जुनून का रास्ता

लीला कृष्णा

कृष्ण के सम्पूर्ण जीवन में, उनके मित्रों, रिश्तेदारों और अन्य सभी लोगों से संबंधों को एक ख़ास नाम से जाना जाता है – वह नाम है लीला। कृष्ण की लीलाओं में उनके आस-पास मौजूद सभी लोग शामिल हैं। इन लोगों में ऐसा क्या खास है, जो इन्हें कृष्ण की लीलाओं का एक हिस्सा बनाता है? क्या कृष्ण के जीवन-प्रसंगो से प्रेरणा ले कर हम अपना जीवन भी लीला-मय बना सकते हैं?  

यह एक जुनून का रास्ता है और अगर आपके भीतर जुनून नहीं है, एक तरह का पागलपन नहीं है तो आप इस रास्ते पर चल ही नहीं पाएंगे।
कृष्ण तत्व को गहराई से जानने के लिए, उसका रस पाने के लिए, और कृष्ण की चेतना को अपने भीतर अनुभव करने के लिए – हमें लीला की जरुरत है। लीला का मतलब क्या है? दरअसल, यह रसिक जनों का रास्ता है। गंभीर लोगों के लिए ये नहीं है। जब हम रस और आनंद की बात करते हैं, तो हम केवल हल्के-फुल्के मज़ाक की बात नहीं करते। रस का मतलब है जीवन के एक अथाह और गंभीर पहलु की खोज करना और उसको जानना। लेकिन इस खोज का तरीका क्रीड़ापूर्ण और मजाकिया होगा, मस्ती से भरा होगा। ऐसा नहीं हुआ तो आप कृष्ण को महसूस ही नहीं कर पाएंगे।

कभी आपने सोचा है कि जीवन के गंभीर पहलुओं से दुनिया के ज्यादातर लोग आज तक अछूते क्यों हैं? क्योंकि वे रसिया नहीं हैं; उन्हें क्रीड़ापूर्ण ढंग से जीना नहीं आता, वे मस्ती का अनुभव नहीं कर पाते।

भीम कृष्ण के भक्त थे। जालंधरा नाम की एक युवती कृष्ण से गोपनीय तरीके से मिलना चाहती थी। उसे लगा की भीम उसे कृष्ण से मिलवा सकते हैं। एक बार रात के अंधेरे में चुपचाप वह भीम के पास आई। भीम को लगा की वह उनसे मिलने आई है। उन्होंने सोचा, चलो अच्छा है। इस महिला से मिलना अच्छा अनुभव होगा। भीम मन ही मन खुश हो रहे थे, तभी उसने भीम से कहा के उसे कृष्ण से मिलना है। भीम निराश हो गए और कहने लगे – “अगर तुम्हे कृष्ण से ही मिलना था तो तुमने इतनी रात को मुझे यहां अकेले में क्यों बुलाया? जाओ और उनसे मिल लो। वह तो सुबह से शाम तक लोगों से मिलते रहते हैं। वह सभी महिलाओं, पुरुषों और बच्चों से मिलने और उनसे प्रेम करने को आतुर हैं। तुम जानती ही हो उनके पास तमाम औरतें आती हैं, और पुत्र प्राप्ति का वरदान मांगती हैं। क्या तुम्हे भी पुत्र चाहिए? जाओ और उनसे मिलो। तुम मेरे साथ यहां भला क्या कर रही हो!”

जिस रसिक और क्रीड़ापूर्ण व मजाकिया अंदाज की बात हमने अभी की है, वह यही है। इन लोगों का कृष्ण के प्रति बहुत ज्यादा झुकाव और समर्पण था। लेकिन कृष्ण के बारे में बात करने का उनका तरीका ऐसा ही था – बेहद मजाकिया और रस से भरा।

अगर तुम्हे कृष्ण से ही मिलना था तो तुमने इतनी रात को मुझे यहां अकेले में क्यों बुलाया? जाओ और उनसे मिल लो। 
अगर आप भी इस क्रीड़ापूर्ण और रस से भरे मार्ग पर चलकर जीवन के तमाम पहलुओं की खोज करना चाहते हैं, तो आपको प्रेम से परिपूर्ण होना होगा। आपके दिमाग में आनंद और मस्ती हो शरीर में जोश। जब ऐसा होगा, तभी लीला संभव है। लीला का मतलब सिर्फ किसी के साथ नाचना भर नहीं है। लीला का मतलब है कि आप जिंदगी के साथ नृत्य करने के इच्छुक हैं। आप अपने शत्रु के साथ भी नृत्य कर सकते हैं, और उस शख्स के साथ भी जिससे आप प्रेम करते हैं। यहां तक कि मृत्यु के क्षणों में भी आपकी नृत्य करने की इच्छा है। जब ऐसा होगा, तभी लीला की गुंजाईश हो सकती है।

यदि हम सब कुछ बेहद हल्के-फुल्के अंदाज में बेहद मजाकिया तरीके से कर रहे हैं, तब भी कुछ लोग बीच में ही अपने लक्ष्य से भटक सकते हैं। एक बार तीन दोस्त भालू का शिकार करने निकले। इनमें एक फ्रांस का था, दूसरा अंग्रेज था और तीसरा इटली का था। फ्रांस के व्यक्ति ने अपनी राइफल उठाई और निकल पड़ा। थोड़ी देर में वह एक भालू को मारकर अपने केबिन के अंदर खींचता हुआ लाया। उसका इंतज़ार कर रहे उसके दोस्तों ने पूछा – ‘तुम्हें गए हुए बस दस मिनट ही हुए हैं, और तुम एक भालू को मारकर ले आये। तुमने यह सब किया कैसे ?’ फ्रांस के इस व्यक्ति ने बताया – ‘जैसे ही मैं बाहर निकला, मुझे रेल का एक ट्रैक दिखाई दिया। मैं उस पर चलने लगा। अचानक मुझे एक भालू दिखाई दिया। मैंने तुरंत गोली चला दी और भालू को मारकर ले आया।’ अंग्रेज यह सुनकर उत्साहित हुआ। उसने भी राइफल उठाई और निकल पड़ा। 10 मिनट में वह भी एक भालू को मारकर ले आया। बाकी दोनों दोस्तों ने उससे पुछा – ‘अरे, तुम भी एक भालू को मारकर ले आये? तुमने क्या किया?’ अंग्रेज कहने लगा – ‘बस, मैंने भी एक ट्रैक देखा, और में उस पर चलने लगा। मुझे भी अचानक एक भालू दिखाई दिया और मैंने उसे गोली मार दी।’ इटली का व्यक्ति बड़े ध्यान से पूरी बात सुन रहा था। पूरी कहानी से प्रेरित हो कर वह भी निकल पड़ा। थोड़ी देर बाद एक अजीब सा नज़ारा देखने को मिला। इटली का वह व्यक्ति घायल अवस्था में केबिन में लौट रहा है। पूछने पर उसने बताया –’मुझे भी एक ट्रैक दिखाई दिया। मैंने भी उस पर चलना शुरू कर दिया। अचानक एक ट्रैन आई और मुझे टक्कर मार दी।’

थोड़ा सा उन्माद, थोड़ा सा पागलपन तो चाहिए ही कृष्ण के रास्ते पर चलने के लिए।
कहने का मतलब यही है, कि आपको लक्ष्य से नहीं भटकना है। अगर हम सब कुछ मस्ती में करना चाहते हैं, अगर हम लीला करना चाहते हैं तो – हमारा मन प्रेम से, दिमाग मस्ती से और शरीर जोश से – भरा होना चाहिए। यह एक जुनून का रास्ता है, और अगर आपके भीतर जुनून नहीं है, एक तरह का पागलपन नहीं है, तो आप इस रास्ते पर चल ही नहीं पाएंगे। अगर आपको ऐसा लगता है, कि आप समझदार और संतुलित हैं, तो कृष्ण आपके लिए नहीं हैं। थोड़ा सा उन्माद, थोड़ा सा पागलपन तो चाहिए ही कृष्ण के रास्ते पर चलने के लिए।
आगे जारी…
Images courtesy: Shivani Naidu

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