दीपावली – इसी अमावस्या को क्यों?

दीपावली – इसी अमावस्या को क्यों?
दीपावली – इसी अमावस्या को क्यों?

दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जो बहुत सी वजहों से महत्वपूर्ण है। अमावस्या की अंधियारी रात को रोशन करने के अलावा यह अध्यात्म की साधना करने वालों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसे ऐतिहासिक कारणों से भी मनाया जाता है। आइये जाने दीपावली के महत्व को और साथ ही एक सरल दीपावली साधना भी…

दीपावली का ऐतिहासिक महत्व

सद्‌गुरुदीपावली कई सांस्कृतिक वजहों से मनाई जाती है लेकिन ऐतिहासिक रूप से इसे नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है क्योंकि इस दिन नरकासुर नामक एक क्रूर राजा का वध कृष्ण ने किया था। इसलिए उस दिनको बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है। बुराई जरूरी नहीं है कि किसी राक्षस के रूप में ही आए। बेचैनी, निराशा, अवसाद या कुंठा जैसी चीजें किसी राक्षस के मुकाबले कहीं ज्यादा आपका नुकसान कर सकती हैं। दिवाली यह याद दिलाने के लिए है कि इन राक्षसी बुराइयों को खत्म करने की जरूरत है।

दीपावली का आध्यात्मिक साधना में महत्व

सूर्य की परिक्रमा करते हुए पृथ्वी कुछ ख़ास पड़ावों से गुजरती है, जिससे साल में दो संक्रांतियां और सम्पात आते हैं। संक्रांति वो समय होता है, जब पृथ्वी के आकाश में सूर्य की गति दक्षिण से उत्तर की ओर, या फिर उत्तर से दक्षिण की ओर हो जाती है। जबकि सम्पात तब होता है, जब दिन और रात बराबर होते हैं।

संक्रांतियों और सम्पातों के बीच में पड़ने वाली साल की चार तिमाहियों में से यह चौथी तिमाही है। सौर-चंद्र कैलेंडर के हिसाब से यह साल का तीसरा पड़ाव है। सम्पात के बाद दीपावली पहली अमावस्या होती है।

दो संक्रांतियों के बीच, दक्षिणी संक्रांति या फिर दक्षिणायन को साल के आधे हिस्से के रूप में देखा जाता है, जो साधना के लिए उपयुक्त माना जाता है और उत्तरी भाग या उत्तरायण, जो दिसंबर से जून तक होता है – को फल प्राप्ति के समय के रूप में देखा जाता है, जब साधक अपनी साधना के फलीभूत होने की प्रतीक्षा करता है। ये नियम उत्तरी गोलार्ध में मानव शरीर के बर्ताव को देखकर निर्धारित किये गए थे।

स्त्री चाहती है कि उसके आस-पास की हर चीज रोशन हो, वरना वह निराशा में चली जाती है। पुरुष अंधकार में बैठ सकते हैं, पुरुष प्रकृति अंधकार में बैठकर मनन कर सकती है।
साधना के इन दो भागों को बाद में, खेती पर आधारित समुदायों में सांस्कृतिक तौर पर – काम और फसल कटाई के – दो भागों के रूप में देखा गया। कटाई का मौसम अगली तिमाही में संक्रांति नामक एक और त्यौहार से शुरू होता है। इसलिए यह रोशनी का त्यौहार है, क्योंकि यह साल का सबसे अंधेरा हिस्सा होता है। यह सत्य है, कि साल के इस हिस्से में उत्तरी गोलार्ध को सूर्य की रोशनी सबसे कम मिलती है। लेकिन यह सिर्फ रोशनी और अंधेरे के अर्थों में ही साल का सबसे अंधेरा चरण नहीं होता। इसके अलावा, यह साधना करने वाले लोगों के लिए भी सत्य है। साधना करते हुए पचास, साठ फीसदी रास्ता तय करने के बाद यह वास्तव में अंधेरी रात की तरह आता है। पहले तीस, चालीस फीसदी बहुत बढ़िया होते हैं, अगले बीस, तीस फीसदी ठीक-ठीक होते हैं। जब आप साठ फीसदी का आंकड़ा छूते हैं, तभी शंका उभरती है, ‘हे भगवान, क्या मैंने अपनी पूरी जिंदगी बर्बाद कर ली?’

अगर आप बारह महीनों में ज्ञान प्राप्त करने का इरादा रखते हैं, तो यह अंधकारमय चरण है। इसी वजह से, लोगों ने इसे रोशन करने का फैसला किया। इसीलिए, इसे रोशनी का त्यौहार कहा जाता है। यह देखकर बहुत अच्छा लग रहा है कि आपने तेल के दीये जलाए हैं। बस मैं सोच रहा था कि आपको पेड़ों को इस तरह छेड़ना नहीं चाहिए था। जब कोई चीख-चिल्ला रहा हो, तो आप जश्न नहीं मना सकते।

इस दिन का आध्यात्मिक महत्व यह है, कि इस दिन से शुरू होने वाले अगले चरण को सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसलिए हर जगह रोशनी की जाती है, क्योंकि यह सबसे अंधकारमय समय होता है। इस‍ दिन देवी काली या चामुंडी या भैरवी, आप उन्हें जो भी नाम दें, इस स्त्रैण ऊर्जा ने एक दानव राज का संहार किया था।

अमावस्या का अंधेरा स्त्री प्रकृति को निराश करता है

तो मारने के लिए किसी को न खोजें। इसका मतलब यह है कि जब अंधेरा आता है, तो स्त्री प्रकृति तुरंत निराशा और अवसाद में घिर जाती है। जैसे ही अंधेरा होता है, स्त्री प्रकृति अवसाद में चली जाती है। वह चाहती है कि उसके आस-पास की हर चीज रोशन हो, वरना वह निराशा में चली जाती है। पुरुष अंधकार में बैठ सकते हैं, पुरुष प्रकृति अंधकार में बैठकर मनन कर सकती है। इसलिए देवी के रूप में स्त्रैण ऊर्जा ने सभी दानवों का संहार कर दिया।

इस दिन का आध्यात्मिक महत्व यह है, कि इस दिन से शुरू होने वाले अगले चरण को सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसलिए हर जगह रोशनी की जाती है, क्योंकि यह सबसे अंधकारमय समय होता है।
सभी दानव दरअसल अंधकार में होते हैं। किसी ने कभी दिन की रोशनी में कोई दानव नहीं देखा। आपको पता है? क्या किसी ने कभी दिन में भूत या दानव या शैतान देखा है? वे सिर्फ अंधेरे में दिखते हैं। आपने कभी दिन में किसी ऐसी चीज के बारे में नहीं सुना होगा, है न? टेनेसी में भी नहीं। यह सब सिर्फ अंधेरे में होता है।

तो देवी मां ने जाकर काले दानव को मार डाला और वह जगह रोशनी से जगमगा उठी। इसलिए लोग प्रतीकात्मक रूप में इस रात को रोशनी जलाते हैं, जो इस महीने और साल की सबसे अंधेरी रात होती है। उत्तरी गोलार्ध में यह रात साल की सबसे अंधेरी रात होती है, इस रात को सबसे ज्यादा अंधकार होता है।

अगली तिमाही, जो फसल कटाई और पल्लवन के साथ शुरू होती है, संक्रांति के बाद शुरू होती है। जब फूल खिल रहे हों, तब किसी को सहायता की जरूरत नहीं होती। अभी सारे विचार आपमें उठते हैं – इस समय अगर आप अपने आस-पास देखें, तो शीतकाल दुनिया के अंत की तरह लगता है। इस समय आपको ज्यादा रोशनी की जरूरत होती है। लोग अब भी यही करते हैं, रोशनी जलाते हैं, मगर उनके अंदर वही जागरूकता या वही समझ नहीं होती। चाहे आप आंख मूंदकर इसे करें, फिर भी कुछ हद तक यह असरदार होता है। अगर आपने सही जागरूकता के साथ इसे किया, तो यह बिल्कुल अलग तरीके से असरदार हो सकता है।

दिया जलाना बन सकता है साधना भी

दीपावली के दिन दिए जलाने की परम्पारा को हम साधना के रूप में रूपांतरित कर सकते हैं। दियों के इस त्यौहार पर एक सरल साधना की जा सकती है। इस दिन आप कम से कम तीन दिये जलाएं –

  • पहला दिया उस व्यक्ति के लिए जिससे आप अथाह प्रेम करते हैं
  • दूसरा दिया खुद अपने लिए
  • तीसरा दिया उस व्यक्ति के जिससे आप घृणा करते हैं

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  • Omkar Narayan

    What happens with above given Sadhna???