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महात्मा का अर्थ है महान-आत्मा। कोई महात्मा तभी बनता है, जब वह अपनी सभी पहचानों से परे जाकर केवल एक 'जीवन' के रूप में कार्य करता है।
जब आप अपने आप से ही बहुत ज्यादा भरे होते हैं, तब आप ग्रहणशील नहीं हो सकते। आप जितने कम होंगे, उतना ज्यादा ग्रहण करेंगे। जितने ज्यादा होंगे, उतना कम ग्रहण करेंगे।
भीतर की ओर मुड़ना कोई यात्रा नहीं है, क्योंकि कोई दूरी ही नहीं है।
आत्मज्ञान का बीज हर जीव में मौजूद है। आत्मज्ञान केवल एक बोध है।
प्रेम कोई लेन-देन नहीं है। यह आपकी भावनाओं की एक खास उमंग और मिठास है।
वह करने की कोई जरूरत नहीं है जो दूसरे कर रहे हैं। आपको वह करना चाहिए जो वास्तव में आपके लिए मायने रखता है।
उसकी तलाश करिए जिसे आप सर्वोच्च मानते हैं। इस दृष्टि के साथ जीना ही अपने आप में एक ऊपर उठाने वाली, मुक्तिदायक और आनंदमयी प्रक्रिया है।
आध्यात्मिक प्रक्रिया का पहला मूलभूत सिद्धांत यह है कि आप अपनी सभी धारणाओं को छोड़ दें।
अगर आप यह समझ जाते हैं कि परमाणु से लेकर ब्रह्मांड तक लगभग सब कुछ आपकी समझ से परे है, तो स्वाभाविक रूप से आप नतमस्तक हो जाएंगे और विनम्र होकर चलेंगे।
जब आपके रिश्ते दूसरों से खुशियां निचोड़ने के बजाय अपना आनंद बांटने के लिए हो जाते हैं, तब हर किसी के साथ आपके शानदार रिश्ते होंगे।
खुलेपन का मतलब है कोई निष्कर्ष न होना – हर चीज को बस वैसे ही देखना जैसी वह वास्तव में है।
शांति हमारी आंतरिक स्थिति का ही एक स्वाभाविक परिणाम है।