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आपको जो मिलता है, उससे आप केवल जीविका कमा सकते हैं। लेकिन जो आप देते हैं, केवल उसी से आप जीवन बनाते हैं।
आपको खुशी पैदा करने की जरूरत नहीं है। अगर आप दुख पैदा न करें, तो खुश ही रहेंगे।
अगर आप विवाह को एक संस्था कहेंगे, तो स्वाभाविक है कि लोग इससे बाहर निकलना चाहेंगे।
ईश्वर भी आपकी भीतरी खुशहाली तय नहीं कर सकते। यदि आप स्वयं को दुःख न पहुंचाने का निश्चय कर लें, तब कोई भी आपको दुखी नहीं कर सकता।
अकेलापन इसलिए महसूस नहीं होता क्योंकि आप अकेले हैं। अकेलापन इसलिए लगता है क्योंकि आप अपने आस-पास की हर चीज को अस्वीकार करते हैं।
बिजनेस इंसान की खुशहाली के लिए बनाए गए थे। इंसान बिजनेस की खुशहाली के लिए पैदा नहीं हुए हैं।
आत्मविश्वास और मूर्खता का मेल बहुत खतरनाक है, लेकिन अक्सर ये दोनों साथ ही पाए जाते हैं।
अपनी यादों या कल्पना के कारण दुखी होने का मतलब है कि आप उस चीज से दुखी हैं जिसका अस्तित्व ही नहीं है।
योग सुपर-ह्यूमन बनने के बारे में नहीं है, बल्कि यह जानने के बारे में है कि मनुष्य होना ही अपने आप में सुपर है।
अगर आप अपना जीवन इसकी सर्वोच्च संभावना तक पहुंचने के प्रयास में जीते हैं, तो उस प्रयास में ही मुक्ति है।
शांति और आनंद ऐसी चीजें नहीं हैं जिन्हें आप जीवन के अंत में प्राप्त करते हैं। ये तो जीवन का आधार हैं।
अपने भीतर आप कैसे हैं, यह आपके द्वारा तय होना चाहिए। आध्यात्मिक होने का यही अर्थ है।