क्यों थे भीष्म पितामह एक अजेय योद्धा?

क्यों थे भीष्म पितामह एक अजेय योद्धा?

सद्‌गुरुपिछले ब्लॉग में आपने पढ़ा धर्म और अधर्म के बारे में। आज जानते हैं भीष्म के धर्म के बारे में। बड़े बड़े महारथी योद्धा, भीष्म से उम्र में छोटे हो कर भी भीष्म को युद्ध में पराजित नहीं कर पाते थे। क्या था इसका कारण? और क्यों था भीष्म को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त?

भीष्म की शक्ति

इसी के आधार पर उन्होंने सारे नियम बनाए। उन्होंने दैनिक जीवन के सरल नियमों को भी अपनी चरम प्रकृति तक पहुंचने का सोपान बना लिया। भीष्म ने इतनी भीषण प्रतिज्ञा कर डाली, उनकी प्रतिज्ञा को हम भीषण इसलिए नहीं कहते क्योंकि वह ब्रह्मचारी बन गए या सारा राजपाट  त्याग दिया, उनकी व्यक्तिगत असुविधा या क्षति के लिए भी हम उसे भीषण नहीं कहते बल्कि इसलिए कहते हैं क्योंकि वह जिस कुरुवंश और देश से इतना प्रेम करते थे, उन्होंने उसे दांव पर लगा दिया। जो चीज उनके लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण थी, उन्होंने उसे ही दांव पर लगा दिया और कहा कि यही उनका धर्म और मोक्ष प्राप्ति का रास्ता है।

जैसे-जैसे हम महाभारत की कहानी में आगे बढ़ते हैं, आपको तमाम ऐसी परिस्थितियां दिखाई देती हैं, जहां भीष्म लगभग अतिमानव या सुपरमैन नजर आते हैं। यदि कोई मनुष्य अपने भीतर मौजूद जीवन के बीज को रूपांतरित करने के लिए तैयार है, वह कोशिका जो एक और मनुष्य के निर्माण में समर्थ है, उसे वह जीवन शक्ति में रूपांतरित करने के लिए तैयार है, तो वह परमाणु बल की तरह शक्तिशाली हो जाता है। आपको पता ही है एक परमाणु कितनी ऊर्जा पैदा कर सकता है।

कई बार लोगों ने कहा कि वे भीष्म से नहीं लड़ सकते क्योंकि वह एक ब्रह्मचारी हैं। वे उन्हें नहीं मार सकते थे क्योंकि उन्होंने अपने शरीर के हर बीज को एक जीवनी शक्ति में रूपांतरित कर दिया था, जिसके कारण वह अपनी इच्छा से मृत्यु को प्राप्त कर सकते थे। ऐसा इसीलिए कहा गया था कि भीष्म के पास अपनी मृत्यु का समय चुनने की शक्ति थी। वह अनश्वर या अमर नहीं थे, मगर वह अपनी मृत्यु का समय और स्थान चुन सकते थे, जो एक तरह से अमरता की तरह ही है। अमरता एक अभिशाप की तरह है। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि अगर आपको हमेशा के लिए जीना पडे, तो यह आपके लिए कितनी बड़ी यातना होगी? तो अमरता तो एक अभिशाप है, लेकिन अपनी इच्छा से मरने का विकल्प एक वरदान है।

महाभारत – अपने समय से काफी आगे

यह अपनी ऊर्जा और प्रकृति की ऊर्जा का लाभ उठाने की एक प्रक्रिया है। महाभारत में दूसरा उदाहरण अस्त्र हैं, जो शक्तिशाली हथियार होते थे। कहा जाता था कि अस्तित्व के सबसे छोटे कण को युद्धभूमि में सबसे बड़ी शक्ति बनाया जा सकता था। यह परमाणु बम की तरह लगता है, हालांकि वे उस समय भी तीर-धनुषों का प्रयोग करते थे। कुछ अस्त्रों के असर के बारे में बताते हुए ऐसी बातें कही गईं कि ‘चाहे आप इस अस्त्र से पूरी दुनिया को नष्ट न करें, गर्भ में मौजूद शिशु तब भी झुलस जाएंगे।’ यह भी परमाणु हथियारों के असर जैसा लगता है।

या तो उनके पास बहुत ही शानदार कल्पनाशक्ति थी, या उनके पास वाकई इस तरह का ज्ञान था। क्या उनके पास इस तरह के हथियार थे, क्या उन्होंने ऐसे हथियार कहीं देखे थे या किसी ने कहीं से आकर उन्हें ये बातें बताई थीं? यह हम नहीं जानते मगर आपको एक खास जागरूकता और सतर्कता के साथ इस कहानी को देखना चाहिए। यह कहानी कुछ लोगों की लड़ाई की या किसी व्यक्ति के राजपाट, पत्नी या बच्चे की इच्छा की नहीं है। इस कहानी के कई आयाम हैं।


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