महाभारत कथा : पांडव बच निकले लाक्षागृह से

महाभारत कथा : पांडव बच निकले लाक्षागृह से

सद्‌गुरुअब तक की कथा: शकुनि ने पांडवों से छुटकारा पाने के लिए एक चाल सोची। कौरवों ने पांडवों के लिए काशी में एक महल बनवाया जो बेहद ज्वलनशील पदार्थ से बना था। धृतराष्ट्र ने सुझाव दिया कि पांडवों को आध्यात्मिक खोज के लिए वहां जाना चाहिए। पांचों भाई अपनी मां कुंती के साथ उस महल में रहने गए। विदुर ने एक गुप्त चेतावनी भेजी और एक आदमी भेजा जिसने उस महल से सुरक्षित बच निकलने के लिए एक सुरंग बनाई।

पांडवों की जगह एक निषाद स्त्री और उसके पांच पुत्र जल गए

अब आगे : कुंती ने एक निषाद स्त्री से मित्रता कर ली, जिसके पांच बेटे थे। वह अक्सर उन्हें महल में आमंत्रित करती, खूब खिलाती-पिलाती और उनकी देख-भाल करती।

भीम ने नाव खेने के लिए चप्पू खोजे, मगर वहां कोई चप्पू नहीं था। सहायक ने कुछ लीवर चलाए और नाव धीरे-धीरे आवाज करते हुए धारा के प्रतिकूल बढ़ने लगी।
एक दुर्भाग्यपूर्ण रात को उसने मेहमानों यानी निषाद स्त्री और उसके पांच बेटों के पेय में कुछ मिला दिया। मेहमानों के नींद में चले जाने के बाद पांडव और उनकी मां सुरंग से बच निकले और महल में आग लगा दी। गुप्तचर, आदिवासी स्त्री और उसके पांच बेटे आग में जलकर मर गए। विदुर ने पांडवों के बच निकलने में मदद करने के लिए कुछ लोग भेज दिए थे। महाभारत में इस घटना के बारे में एक अविश्वसनीय वर्णन है, जिसमें कहा गया है, ‘वे एक नाव में चढ़े, जहां एक सहायक पर्दे में उनका इंतजार कर रहा था। भीम ने नाव खेने के लिए चप्पू खोजे, मगर वहां कोई चप्पू नहीं था। सहायक ने कुछ लीवर चलाए और नाव धीरे-धीरे आवाज करते हुए धारा के प्रतिकूल बढ़ने लगी।’ वे हैरान थे। उन्हें पता नहीं चल रहा था कि यह सब हकीकत में हो रहा है या वे मर चुके हैं।

विदुर के सहायकों ने पांडवों को जंगल तक पहुंचा दिया

बिना किसी पतवार के, आवाज करते हुए, धारा की उल्टी दिशा में चलने वाली नाव का वर्णन किसी मोटरबोट की तरह लगता है।

जब सुरंग खोदने वाले कंकन ने निषाद स्त्री और उसके पांच बेटों के शव देखे, तो उसने सोचा कि कुंती और उसके पुत्र क्या कभी इस अपराध से दोषमुक्त हो पाएंगे।
हम नहीं जानते कि यह कल्पना है या वाकई उनके पास एक मोटरबोट थी, उन्होंने कहीं से उसे मंगाया था या किसी के पास इतनी दूरदृष्टि थी कि वे पांच हजार साल बाद होने वाले मोटरबोट के आविष्कार की कल्पना कर सकते थे। जो भी हो, वे धारा की विपरीत दिशा में गए और फिर घने जंगल के अंदर चले गए। जब महल जल गया और वे गुप्त रूप से बच निकले, तो सारा शहर आकर पांडवों की कथित मृत्यु पर विलाप करने लगा। हस्तिनापुर में धृतराष्ट्र ने भी शोकमग्न होने का दिखावा किया। दुर्योधन ने तीन दिन तक खाना नहीं खाने का ढोंग किया।

हर कोई मातम मनाने लगा और प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं। पांडवों और कुंती ने उस आग को एक दुर्घटना की तरह दिखाने के लिए हर संभव कोशिश की थी। कौरव और उनके मित्र नहीं जानते थे कि उनके दुश्मन अब भी जीवित हैं। निषाद स्त्री और उसके बेटों के शव मिलने से ऐसा लगा कि पांडव और कुंती की मृत्यु हो गई है। जब सुरंग खोदने वाले कंकन ने निषाद स्त्री और उसके पांच बेटों के शव देखे, तो उसने सोचा कि कुंती और उसके पुत्र क्या कभी इस अपराध से दोषमुक्त हो पाएंगे। कुंती का भावहीन आकलन यह था कि अगर कौरवों को शव न मिले, तो उन्हें पता चल जाएगा कि पांडव बच निकले हैं और वे उन्हें ढूंढ निकालेंगे। इसलिए छह शव वहां मिलना जरूरी था और उसे इस बात का कोई पछतावा नहीं था।

भीम ने एक राक्षस का काम तमाम किया

उन्होंने अपने सभी निशान मिटा दिए और जंगल में चले गए। वहां बहुत सी घटनाएं हुईं।

उस राक्षस की एक बहन थी जिसका नाम था हिडिंबा। हिडिंबा भीम के प्रेम में पड़ गई।
एक महत्वपूर्ण घटना यह हुई कि एक राक्षस जो आदमखोर था, ने पांचों भाइयों और उनकी मां को देखकर उन्हें खाना चाहा। मगर इसकी बजाय एक भयंकर लड़ाई में भीम ने उसे मार डाला। उस राक्षस की एक बहन थी जिसका नाम था हिडिंबा। हिडिंबा भीम के प्रेम में पड़ गई। वह एक जंगली प्राणी थी। भीम ने उसे थोड़ी सभ्यता सिखाई, उसके बाल छोटे किए, हाथ-पांव के बाल साफ किए और उसे आकर्षक रूप दिया। वह उससे प्रेम करने लगा और उससे विवाह करना चाहता था। वह उसे पाना चाहता था मगर उसे थोड़ा अपराधबोध हो रहा था क्योंकि उसका बड़ा भाई अब तक अविवाहित था।

भीम के पुत्र घटोत्कछ का जन्म

युधिष्ठिर ने उसे इस अपराध बोध से मुक्त किया। उसने कहा, ‘हां, परंपरा तो है कि बड़े भाई की शादी पहले होनी चाहिए मगर दिल किसी परंपरा को नहीं मानता और हम उसके आगे सिर झुकाते हैं।

कुंती ने देखा कि भीम बहुत घरेलू बनता जा रहा है। वह जानती थी कि अगर वह अपनी पत्नी के साथ ही रहा, तो कभी न कभी सभी भाई अलग-अलग हो जाएंगे।
तुम हिडिंबा से विवाह कर सकते हो।’ किसी और को हिडिंबा से कोई मतलब नहीं था। वह एक साल तक भीम के साथ रही और उसके बच्चे को जन्म दिया। बच्चे के सिर पर जन्म से ही बाल नहीं थे और उसका सिर एक घड़े की तरह था। उसका नाम घटोत्कच रखा गया, जिसका मतलब है, घड़े की तरह सिर वाला और बिना बाल वाला। उसका शरीर बहुत विशाल था। बाद में वह युद्ध में बहुत उपयोगी साबित हुआ क्योंकि वह बहुत बलशाली योद्धा बन गया था। कुंती ने देखा कि भीम बहुत घरेलू बनता जा रहा है। वह जानती थी कि अगर वह अपनी पत्नी के साथ ही रहा, तो कभी न कभी सभी भाई अलग-अलग हो जाएंगे। अगर भाई अलग-अलग हो गए, तो उन्हें राज्य कभी नहीं मिल सकता था। इसलिए उसने एक फरमान सुनाया – ‘तुम इस राक्षस स्त्री के साथ अब और नहीं रह सकते, क्योंकि यह आर्य नहीं है।’ फिर वह भीम और उसके चार भाइयों को लेकर वन से एक छोटे से नगर में रहने चली गई, जिसका नाम था एकचक्र।

 


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