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आत्मज्ञान का बीज हर जीव में मौजूद है। आत्मज्ञान केवल एक बोध है।
जो कुछ भी आप बिना जागरूकता के करते हैं, उसे आप जागरूक होकर भी कर सकते हैं, और इसी से बहुत बड़ा अंतर आ जाता है।
जो अस्तित्व की संपूर्णता को सुनता है, उसके लिए सब कुछ संगीत है।
आपका व्यक्तित्व एक मुखौटा है जिसे आपने समाज में रहने के लिए बनाया है। समस्या तब होती है जब यह मुखौटा आपसे चिपक जाता है।
आध्यात्मिक प्रक्रिया का पहला मूलभूत सिद्धांत यह है कि आप अपनी सभी धारणाओं को छोड़ दें।
आध्यात्मिकता का इससे कोई लेना-देना नहीं है कि आप कैसे माहौल में रहते हैं। यह उस माहौल के बारे में है जो आप अपने भीतर बनाते हैं।
इसे आनंद में खेलें, सच्चाई से खेलें, तीव्रता से खेलें। जीवन एक बहुत ही छोटा खेल है — और सबसे भव्य भी।
सफलता का मतलब है किसी काम को उस तरीके से करना जो वास्तव में काम करे।
शांति हमारी आंतरिक स्थिति का ही एक स्वाभाविक परिणाम है।
तार्किक बुद्धि सत्य पर जीत हासिल करना चाहती है, जबकि भक्ति सत्य को आत्मसात कर लेती है।
आपका मानसिक नाटक वैसा ही चलना चाहिए जैसा आप चाहते हैं। इसके डायरेक्टर आप हैं।
जीवन में करने के लिए कोई ‘सर्वश्रेष्ठ’ काम नहीं होता। आप जो भी कर रहे हैं, अगर उसमें अपना सब कुछ झोंक देते हैं, तो वही एक महान काम बन जाता है।