महाशिवरात्रि साधना का एक अनुभव

महाशिवरात्रि साधना का एक अनुभव

महाशिवरात्रि साधना एक अवसर है जिसके माध्यम से आप महाशिवरात्रि की शुभ रात्रि को प्रकट होने वाली शक्तिशाली ऊर्जाओं को प्राप्त करने के लिए ग्रहणशील हो जाते हैं। बंगलौर की काव्या अपने उन अनुभवों को बाँट रही हैं, जो उन्होंने  2016 की साधना के दौरान पाए, वे इनके द्वारा जीवन में आने वाले बदलावों के बारे में भी बता रही हैं।


कुछ वर्ष पूर्व, जब मैं अपनी आईटी की नौकरी से परेशान हो गई तो मेरे भीतर आत्मा की तलाश से जुड़ा यह प्रश्न पैदा हुआ। ‘मैं प्रसन्न नहीं हूँ। मैं यह नौकरी क्यों कर रही हूँ?’ मैंने यह जानने के लिए नौकरी छोड़ दी कि क्या करने से मुझे खुशी मिल सकती थी। मैंने बहुत कुछ आज़माया जिसमें फोटोग्राफी से ले कर, निजी फिटनेस ट्रेनर बनना तक शामिल था। कोई भी चीज़ भीतर के अधूरेपन को नहीं भर सकी और मेरे भीतर से किसी ने कहा, ‘मुझे मदद चाहिए! हे ईश्वर! मुझे मार्ग दिखाओ।’

एक ट्रेंडिंग गुरु को न्यूज़ चैनल पर देखना

मैं असहाय भाव से अपने उत्तरों की तलाश में थी। एक दिन, मेरे पति ने मुझे जोर देकर कहा कि मैं एक न्यूज़ चैनल पर आ रहा कार्यक्रम देखूँ जिसमें सद्‌गुरु का साक्षात्कार दिखाया जा रहा था, वह उस समय बहुत चलन में था।

उसी दिन से, सद्‌गुरु के वीडियो देखना, मेरे जीवन का नियमित अंग हो गया और इस तरह मेरी जीवन की अनुभूति बदल गयी।
मुझे देखने में हिचकिचाहट थी क्योंकि मेरे मन में गुरुओं के नाम पर एक अलग ही छवि बनी हुई थी, पर मैंने सोचा, ‘देखूँ तो सही कि एक ट्रेंडिंग गुरु कैसे होते हैं?’ जब मैंने उन्हें देखा तो मेरे विस्मय की सीमा न रही। सद्‌गुरु कितनी सरलता से जटिल विषयों को समझा रहे थे, और किस तरह मेरे जीवन में पहली बार, सब कुछ आसानी से समझ आने लगा था। उसी दिन से, सद्‌गुरु के वीडियो देखना, मेरे जीवन का नियमित अंग हो गया और इस तरह मेरी जीवन की अनुभूति बदल गयी।

महाशिवरात्रि साधना : मेरी पहली साधना

एक दिन, मैंने ईशा के वेबसाइट पर महाशिवरात्रि साधना के बारे में जाना। मेरे मन ने कहा, ‘भले ही जो भी हो, मुझे इसे करना है।’ हालांकि मैंने उससे पहले कभी कोई साधना नहीं की थी।

ज्यों-ज्यों दिन बीतते गए, यह मेरे लिए और भी गहन और आनंददायक होता चला गया।
मुझे लगा कि सद्‌गुरु ही मुझे साधना के उस पथ पर चलने के लिए कह रहे थे। मैंने पूरे उत्साह के साथ प्रक्रिया आरंभ की – मैं सुबह चार बजे उठी, जो मैंने पहले कभी नहीं किया था। फिर शिव नमस्कार और मंत्र जाप किया। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं अपने जीवन में यह सब कभी कर सकूँगी। अभ्यास करने के तीन दिन के भीतर, मैंने जीवन में पहली बार स्थिरता का अनुभव किया। यह इतना गहन था कि मैं इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकती। ज्यों-ज्यों दिन बीतते गए, यह मेरे लिए और भी गहन और आनंददायक होता चला गया।

महाशिवरात्रि : शब्दों से परे का अनुभव

महाशिवरात्रि की रात को, मैंने बड़ी उत्सकुता के साथ, टी.वी. पर ईशा योग केंद्र में चल रहे कार्यक्रम का आनंद लिया। आधी रात को होने वाली साधना के दौरान, जिसका मार्गदर्शन सद्‌गुरु स्वयं कर रहे थे, अपने जीवन में पहली बार मैंने अपने मन और शरीर से परे जाने का अनुभव पाया।

इनर इंजीनियरिंग का हिस्सा बनने के बाद मेरा जीवन सदा के लिए बदल गया और अब मैं ऐसे काम कर रही हूँ जिनके बारे में यह सोचा नहीं था कि मैं उन्हें कभी भी कर पाऊंगी।
यह अपने-आप में परमानंद के क्षण थे। ध्यान जारी रहा और मेरी आँखों से आनंद के अश्रु प्रवाहित होते रहे, मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे जैसे सामान्य इंसान के साथ भी ऐसा हो सकता था। मेरी आँखें बंद थीं और मैं उन्हें खोलना नहीं चाह रही थी। मैं उस अवस्था में थी, जहाँ परमानंद के अतिरिक्त कुछ नहीं था। भले ही यह अवस्था कुछ क्षणों तक रही पर यह अनुभव इतना गहन था कि मैं इसे पाने के लिए तरस उठी। मैंने झट से निर्णय लिया कि मैं इनर इंजीनियरिंग प्रोग्राम का हिस्सा बनूँगी।
इनर इंजीनियरिंग का हिस्सा बनने के बाद मेरा जीवन सदा के लिए बदल गया और अब मैं ऐसे काम कर रही हूँ जिनके बारे में यह सोचा नहीं था कि मैं उन्हें कभी भी कर पाऊंगी। मेरा जीवन सहज हो गया है। मैं सद्‌गुरु की हृदय से आभारी हूँ जिन्होंने ऐसी संभावना को मेरे लिए साकार कर दिया।

सदैव आभारी
काव्या बी वी, बंगलौर

संपादक की ओर से:

महाशिवरात्रि साधना, महाशिवरात्रि की तैयारी है – जो असीम संभावनाओं से भरी रात है। आठ वर्ष से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति इसमें भाग ले सकता है, जिसे 40, 21, 14, 7 या 3 लगातार दिनों तक, 24 फरवरी 2017 की महाशिवरात्रि आने तक किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए ये ब्लॉग पढ़ें –
http://isha.sadhguru.org/blog/hi/isha-mein-chahal-pahal/utsav/msr-sadhana/


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