नहीं बनना है हमें महाशक्ति


आज हर देश अपने को महाशक्ति बनाने की होड़ में है, लेकिन कितनी सही है ये सोच यह नहीं सोचा जा रहा। सद्‌गुरु कहते हैं कि हमें अपने देश को महाशक्ति नहीं बनाना चाहिए। लेकिन क्यों?

सद्‌गुरु:

जेआरडी टाटा, जिनके परिवार ने एक तरह से भारतीय उद्योग की बुनियाद खड़ी की, से एक बार पूछा गया कि क्या वह चाहते हैं कि भारत एक आर्थिक महाशक्ति बने। उन्होंने जवाब दिया, “नहीं, मैं भारत को एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में नहीं देखना चाहता। मैं चाहता हूं कि भारत एक खुशहाल देश बने।” दरअसल मैं नहीं चाहता कि भारत एक महाशक्ति बने। मैं किसी भी देश को महाशक्ति के रूप में नहीं देखना चाहता। मैं चाहता हूं कि कोई भी देश महाशक्ति बनने की बजाय महाखुशहाल बने, एक ऐसा पावरहाउस बने जिससे वहां के लोगों के लिए खुशहाली पैदा हो।

मैंने आपके सिर पर बंदूक तान रखी है और आपने मेरे सिर पर- और दोनों गोली नहीं चला रहे, यह तो शांति नहीं है, यह पागलपन है। अभी हम लोग दुनिया में इसी तरह शांति लाने की कोशिश कर रहे हैं। किसी दिन कोई गोली चला ही देगा।

अपने देश को महाशक्ति बनाने की चाह बहुत ही मूर्खतापूर्ण और बचकानी है। इस चाहत ने इस धरती को बहुत नुकसान पहुंचाया है। आज दुनिया में यह तर्क दिया जा रहा है कि परमाणु हथियारों के बिना शांति कायम नहीं होगी, जो दुर्भाग्यवश आज की स्थिति में सच भी है। मैंने आपके सिर पर बंदूक तान रखी है और आपने मेरे सिर पर- और दोनों गोली नहीं चला रहे, यह तो शांति नहीं है, यह पागलपन है। अभी हम लोग दुनिया में इसी तरह शांति लाने की कोशिश कर रहे हैं। किसी दिन कोई गोली चला ही देगा। वे जरा से लापरवाह हुए और ट्रिगर दबा दिया, तो पूरी दुनिया तबाह हो जाएगी। जरूरी नहीं कि ऐसा किसी इरादे से ही हो, यह यूं भी हो सकता है।

साठ के दशक में, अमेरिका और रूस एक-दूसरे पर जबरदस्त शक की वजह से हमेशा सोचते रहते थे कि दूसरा उन पर परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने वाला है। इसलिए वे हर समय अपने परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने को तैयार रहते थे। अगर आप उन गोपनीय सूचनाओं को पढ़ें जो अब उनके द्वारा जारी की जा रही हैं, तो ऐसा लगता है कि उनकी पूरी प्रक्रिया कुछ पागलों द्वारा तैयार की गई थी। यकीन नहीं होता कि उन्होंने अपने इस पागलपन में दुनिया को पूर्ण विनाश के कगार पर पहुंचा दिया था। कभी-कभी तो वे अपने परमाणु हथियारों को दागने ही वाले थे बस कुछ ही मिनट की देर थी।

महा-शक्ति नहीं महा-खुशहाल बने भारत

इसलिए महाशक्ति बनने की यह लालसा खत्म होनी चाहिए। किसी भी देश को महाशक्ति बनने की लालसा नहीं रखनी चाहिए। हर देश को अपने निवासियों की खुशहाली की कामना और कोशिश करनी चाहिए। सुख के लिए संसाधन और बाकी चीजों की थोड़ी कमी हो सकती है, इसलिए थोड़ी प्रतिस्पर्धा जरूर होगी। थोड़ी खींच-तान भी होगी, लेकिन कोई बात नहीं। यह इंसानों के बीच होगा लेकिन इसके लिए आपको अपनी बंदूक नहीं निकालनी होगी। किसी और को बड़ी बंदूक रखने और महाशक्ति बनने की जरूरत नहीं होगी।

एक राष्ट्र के रूप में भारत बहुत अनूठा है। यहां ऐसे मूल्य और गुण हैं, जो आपको कहीं और नहीं मिल सकते।

दुर्भाग्य से दुनिया फिलहाल ऐसे ही चल रही है। मेरे ख्याल से अमेरिका के पास इतने परमाणु हथियार हैं कि वह पूरी धरती को तीन बार पूरी तरह तबाह कर सकता है। इसलिए अगर आपके पास इस धरती को छह बार तबाह करने लायक परमाणु हथियार हों, बल्कि आप दूसरे ग्रहों को भी नष्‍ट कर पाने सक्षम हों, तो आप उनसे बड़ी महाशक्ति बन सकते हैं। मुझे नहीं लगता कि किसी भी देश को ऐसी लालसा रखनी चाहिए। मैं नहीं चाहता कि भारत भी इसी दिशा में जाए। काश, बाकी देश भी अपने दिमाग से यह बात निकाल दें। काश, सभी महाशक्तियों की थोड़ी सी धार कम कर दी जाए, उनके जहरीले दांत निकाल दिए जाएं और वे सब सिर्फ अच्छे देश बन कर रहें। महाशक्ति खतरनाक और अपने आप में मगरूर होते हैं। हमें ऐसा नहीं बनना चाहिए। मैं नहीं चाहता कि भारत एक महाशक्ति बने। मैं चाहता हूं कि भारत खुशहाल देश बने, जहां खुशहाली का मानक महज धन-दौलत या दूसरों पर विजय पाना न हो। विजय और लूट अलग-अलग चीजें नहीं हैं। अगर कोई एक इंसान करे, तो वह लूट कहलाती है। अगर कोई गैंग ऐसा करे तो उसे डकैती कहते हैं। और कोई देश ऐसा करे तो इसे विजय या सत्ता परिवर्तन कहते हैं।

लोगों ने हमेशा अच्छा जीवन बिताने के लिए पूरब की ओर देखा है। इस सभ्यता में हमेशा से यह शक्ति रही है। भारत को हर देश को ध्‍यानशील बनाने की कामना करनी चाहिए।

हमारी चाहत एक महाशक्ति बनने की बजाय विवेकशील और सौम्य देश बनने की होनी चाहिए जिससे अपना भी कल्याण हो और जहां तक संभव हो, दुनिया में हर किसी का कल्याण हो।

मैं सिर्फ उम्मीद कर सकता हूं कि भारत महाशक्ति बनने की ऐसी गलती न करे। हमने इस देश में आध्यात्मिक मूल्य विकसित करने में हजारों साल लगाए हैं। एक राष्ट्र के रूप में भारत बहुत अनूठा है। यहां ऐसे मूल्य और गुण हैं, जो आपको कहीं और नहीं मिल सकते। लोगों के जिस जनसमूह को अब हम भारत कहते हैं, उसका एक खास आयाम रहा है, कुछ खास बुनियादी मूल्य रहे हैं, एक खास जागरूकता और समझ रही है जो कहीं और मिलना बहुत मुश्किल है। आप अलग-अलग लोगों में उसे पा सकते हैं, लेकिन ज़िंदगी के कई पहलुओं में अनजाने ही एक खास स्‍तर की जागरूकता रखने वाले लोगों का एक बड़ा समूह आपको दुनिया में कहीं और नहीं मिलेगा। इसलिए भारतीयों के लिए यह बहुत खतरनाक होगा कि हम हर देश की ओर परमाणु हथियार तानते हुए कहें कि ‘देखो हम महाशक्ति हैं’। शक्तिशाली होने का मतलब दुनिया की सबसे बड़ी सेना रखना नहीं है। शक्तिशाली आप तब भी हैं जब दुनिया में हर कोई आपकी तरफ मार्गदर्शन के लिए देखे- – एक अच्छा जीवन जीने के लिए आपसे मार्गदर्शन चाहे, यह असली ताकत है। लोगों ने हमेशा अच्छा जीवन बिताने के लिए पूरब की ओर देखा है। इस सभ्यता में हमेशा से यह शक्ति रही है। भारत को हर देश को ध्‍यानशील बनाने की कामना करनी चाहिए।

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