अनुपम खेर – सद्‌गुरु के साथ बिताए कुछ पल

अनुपम खेर - सद्गुरु के साथ बिताए कुछ पल

जाने-माने फिल्म अभिनेता अनुपम खेर ने सद्‌गुरु से हुई मुलाकातों और आश्रम में गुजारे अपने कुछ वक्त के दौरान हुए अपने अनुभवों को साझा किया है। उनके अनुभवों को उन्हीं के शब्दों में हम आप से साझा कर रहे हैं। पेश है उसकी पहली कड़ी:

मैं सदगुरु से एक दो बार मिला हूं। मैंने सद्‌गुरु के साथ बातचीत भी की है, लेकिन जब भी मैंने उनसे बातचीत की है, मुझे उनके व्यक्तित्व के एक नए फलक के दर्शन हुए हैं। मैं तो यह कहूंगा कि वह परामानव यानी सुपरह्यूमन हैं। सुपरमेन भी होते हैं, लेकिन उनके साथ इंसानी तत्व भी जुड़ा हुआ है, जो अपने आप में काफी आकर्षक और सादगीपूर्ण है।

मेरी हवाई यात्रा काफी थकाउ और परेशानी भरी थी और फिर उसके बाद इतनी लंबी सडक़ यात्रा। लेकिन जैसे ही मैंने यहां, आश्रम में प्रवेश किया, एक खास किस्म की शांति मेरे भीतर आ गई। वैसे भी मैं जब तक किसी चीज का अनुभव नहीं कर लेता हूं, तब तक उस पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं देता हूं। मैं सिर्फ जगह की सुंदरता की बात नहीं कर रहा हूं। फिल्म अभिनेता होने की वजह से दुनिया की बेहतरीन जगहों पर जा चुका हूं। मेरे दादा जी खुद एक योग शिक्षक थे और मैंने उन्हें इस तरह के तमाम काम करते हुए देखा है। तब मैं बच्चा था और जिस तरह से वह अपने पेट को घुमाते थे और घंटों योगिक क्रियाएं करते रहते थे, वह सब देखना मेरे लिए हैरानी भरा होता था। इसलिए मैं समझ पाता हूं कि अच्छी तरंगें क्या होती हैं।

ईशा योग केंद्र के वातावरण का अनुभव

जैसे ही आप यहां प्रवेश करते हैं, आपको एक खास किस्म की शांति महसूस होती है। आप शांत महसूस करते हैं और खुद को बौना समझने लगते हैं। यहां आकर इस जगत के सामने आपको अपनी सभी उपलब्धियां बौनी लगने लगती हैं। मुझे पता है कि कभी यह बंजर भूमि रही होगी। अब इसमें इतना डिजाइन है, लेकिन फि र भी यह डिजाइन जैसा लगता नहीं। मैं इसे केवल एक धार्मिक स्थान नहीं मानता। यह एक ऐसी जगह भी है जहां आप अपने आपको शुद्ध करते हैं। यह वह जगह है जहां प्रवेश करते ही आपका एक खास किस्म का विरेचन हो जाता है, आपकी शुद्धि हो जाती है। मुझे तो यह महसूस हुआ कि आश्रम के प्रवेश द्वार से तीन चार किलोमीटर पहले से ही आपको अपने भीतर कुछ बदलाव महसूस होने लगते हैं। और यहां जो देवताओं की मूर्तियां भी लगी हैं, वे बस देवताओं का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही हैं। ध्यानलिंग और लिंग भैरवी देवी एक खास किस्म की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करते हैं। जब देवी के मंदिर में जाप हो रहा था और जब मैं ध्यानलिंग में गया तो वह ऊर्जा मुझे महसूस हुई। वहां एक अजीब और आश्चर्यजनक चीज घटित हुई।

ध्यानलिंग में ध्यान करने का अनुभव

मैं ध्यान नहीं करता हूं। यह बात मैं कोई गर्व से नहीं कह रहा हूं। जो लोग ध्यान करते हैं, वे वाकई महान आत्मा होते हैं। मुझे लगता है कि मेरे मन के भीतर इतना कुछ चल रहा होता है कि शांत रह ही नहीं सकता। इसलिए मैं सोचता हूं कि अपनी असली जिंदगी में लोगों से अच्छे संबंध स्थापित करना, शांति बनाए रखना, गुस्से पर काबू रखना और दूसरों को खुश रखना ही मेरे लिए ध्यान है। जब ध्यानलिंग में मैं अपनी आंखें बंद करके बैठा, तो मेरी आंखों से आंसू बहने लगे। फिर मैंने अपने आप से सवाल किया – मेरे साथ क्या गड़बड़ है? ऐसा क्यों हो रहा है? ऐसा नहीं था कि मैं भावनाओं में बह गया। ऐसा बस यूं ही हो रहा था। मुझे महसूस हुआ कि एक लंबे अर्से बाद मैंने अपने आप को खुद के साथ पाया है। नहीं तो जीवन का हमेशा किसी न किसी और चीज से संबंध होता है। चाहे वह पेशेवर जीवन हो, चाहे वे रिश्तेदार हों, परिवार हो, चाहे हमारे चाहने वाले हों। एक लंबे समय के बाद मैं एक ऐसे स्थान पर था जहां मौन था, जिसने मेरी अपने आप से मिलने में मदद की। उस दस मिनट के समय में जब मैं अपने आप से मिला, तो वह एक बेहद निजी किस्म के भाव थे, जो मुझे बहुत अच्छे लगे।

यह जो एक उड़ान मैंने भरी थी उसने मुझे शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से हिलाकर रख दिया था। उड़ान भरने में मुझे थोड़ी बेचैनी सी होती है। फि र भी मैं अपने भाषणों में कहता रहता हूं कि यह डर मन का डर है, डर काल्पनिक होता है। लेकिन उड़ान का डर किसी तरह काल्पनिक नहीं है, जब जहाज ऊपर की तरफ उठना शुरु होता है। लेकिन मैं बिल्कुल शांत था। फिर शाम को जब यक्ष 2016 की शुरुआत हुई तो मैंने उस प्रदर्शन का आनंद लिया। मुझे बहुत अच्छा लगा। पहली बार मैं किसी चीज पर ध्यान केंद्रित कर पा रहा था। नहीं तो मेरा मन हमेशा उलझा हुआ रहता है, क्योंकि मेरे मन की यह फितरत है कि वह एक ही समय में दस हजार चीजों के बारे में सोच सकता है और थकता भी नहीं। मैं खुद एक अभिनेता हूं फिर भी मुझे लगा रहा था कि वह महिला – रमा वैद्यनाथ, कितना जबर्दस्त प्रदर्शन कर रही है। खुद वह और उनके साथ काम करने वाले लोग सभी बेहद दिलचस्प थे। लेकिन मेरा सबसे अच्छा डेढ़ घंटा वह रहा जो समय मैंने सदगुरु के साथ बिताया।

मुझे लगता है कि मैंने काफी कुछ पढ़ा है। मेरा ताल्लुक एक साधारण परिवार से है, मैंने जीवन देखा है, मैंने जीवन के उतार चढ़ाव देखे हैं, मैंने सद्‌गुरु का इंटरव्यू किया है, वह भी दर्शकों के सामने। किसी व्यक्ति के मौन में ही आप उस व्यक्ति को खोज पाते हैं। किसी व्यक्ति की मुस्कान में आप कई लोगों को खोज पाते हैं। कोई भी ज्ञानी शख्स यह नहीं दर्शाता कि वह ज्ञानी है। सद्‌गुरु के बारे में यह बात बिल्कुल सच है। वह अपने ज्ञान को आप पर थोपते नहीं हैं, वह बस उसे आपके साथ साझा करते हैं। बहुत सारे गुरु ऐसा नहीं करते, क्योंकि वे बहुत कुछ अपने पास ही रखना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि वह सब उन्हें अपने शिष्यों को नहीं बताना चाहिए।

सद्‌गुरु के साथ संवाद के अनुभव

सद्‌गुरु संवाद में जबर्दस्त हैं। आपको यह नहीं लगता कि वह आपको कुछ बता रहे हैं, आपको ऐसा लगता है जैसे वह आपसे बस बातें कर रहे हैं। आप उनसे किसी भी विषय पर बात कर सकते हैं। उनके अंदर कई गुण बिल्कुल बच्चों जैसे हैं। हालांकि वह दुनिया को अच्छी तरह से समझते हैं, बहुत कुछ जानते हैं, फि र भी उनके भीतर दूसरे लोगों को सुनने की जबर्दस्त क्षमता है। आप उनसे बात कर सकते हैं। आप उनसे किसी भी बात पर चर्चा कर सकते हैं।

उनसे चर्चा करने के दौरान आपको पता चलता है कि वह कितने अद्भुत इंसान हैं। उनके सिद्धांत बहुत ही सादा हैं। वह कर्म, धर्म, पुनर्जन्म, शांति आदि की बातों से आपको उलझाते नहीं। वह बातचीत इसलिए करते हैं क्योंकि वे जो हैं वह दूसरे लोगों से बातचीत करने की वजह से ही हैं। आपको भी ऐसा महसूस होता है कि आप किसी ऐसे शख्स से बातचीत कर रहे हैं, जो आपसे उम्र में बहुत बड़ा नहीं हैं। कोई ऐसा शख्स नहीं है जो हजार साल से इस धरती पर रहा हो। मैंने तमाम फोटो में उन्हें देखा है, लेकिन वह जैसे फोटो में नजर आते हैं, असल में उससे कम उम्र के हैं हालांकि वह कहते हैं कि ये फोटो पंद्रह से बीस साल पुराने हैं। ऐसा उस शख्स के साथ ही हो सकता है जिसने जीवन को समझ लिया हो।

सद्‌गुरु के साथ कार का सफ़र

सबसे जबर्दस्त रोमांच तो मुझे उस वक्त महसूस हुआ जब मैं उनके साथ उनकी एसयूवी में बैठा और वे खुद कार चला रहे थे। वह जबर्दस्त तरीके से गाड़ी चला रहे थे। उसी दौरान मेरी पत्नी का फ़ोन आ गया। किरण ने पूछा कि क्या कर रहे हो। मैंने जवाब दिया कि सदगुरु खुद मुझे संचालित कर रहे हैं यानी ड्राइव कर रहे हैं। उन्हें थोड़ी सी ईष्र्या हुई, क्योंकि वह खुद भी सदगुरु के प्रति आकर्षित हैं और ऐसा काफी पहले से है। उन्होंने मिस्टिक म्यूजिंग्स पढ़ी है। दरअसल, उनकी वजह से ही मैंने वह किताब पढ़ी, जिसमें सद्‌गुरु की मोटरसाइकल पर सवार बड़ी सी फोटो है।

खैर यह सब एक शानदार अनुभव रहा। हमने बहुत सारे विषयों पर बात की, बहुत सारी चीजों पर चर्चा की। मुझे लगता है कि ऐसे अनुभव आपको जीवन में एक बार ही मिलते हैं। मुझे नहीं लगता कि यह अब मेरे साथ दोबारा होगा। मैं बहुत खुश हूं कि मैं ऐसे खूबसूरत अनुभव से गुजरा।

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