दक्षिणायन – यह साधना और प्रतीक्षा का समय है

दक्षिणायन - यह साधना और प्रतीक्षा का समय है

साल में दो बार सूर्य की स्थिति में परिवर्तन होता है। यह परिवर्तन उत्‍तरायन और दक्षिणायन के रूप में जाना जाता है। यही समय है (21 जून 2014) जब सूर्य दक्षिण की ओर मुड़ जाता है। सद्‌गुरु साल के इस समय का महत्व बता रहे हैं…

सद्‌गुरु:

साल के इसी समय आदियोगी दक्षिण की ओर मुड़ गए और दक्षिणामूर्ति हो गए।
दक्षिणायन वह समय है, जब सूर्य पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध के आसमान में दक्षिण की ओर बढ़ना शुरू करता है। किसी भी तरह का योग करने वाले इंसान के जीवन में दक्षिणायन का महत्व होता है। सूर्य की उत्तरी चाल के दौरान पृथ्वी से आपका जो संबंध होता है, वह इस चरण में भिन्न होता है। खासकर उत्तरी गोलार्ध में रहने वाले लोगों के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि सूर्य अब दक्षिण की ओर जा रहा है और पृथ्वी घड़ी के विपरीत दिशा में घूम रही है। ये दोनों मिलकर मानव शरीर पर एक खास असर डालते हैं। हम जो भी अभ्यास करते हैं, वे इस पहलू को दिमाग में रखते हुए तैयार किए गए हैं।

मदुरई मीनाक्षी मंदिर के दक्षिणी द्वार पर  दक्षिणामूर्ति शिव मूर्ति

 

साल के इसी समय आदियोगी दक्षिण की ओर मुड़ गए और दक्षिणामूर्ति हो गए। उन्होंने अपने पहले सात शिष्यों, जो अब सप्तऋषि के नाम से प्रसिद्ध हैं, को योग विज्ञान की मूल बातें सिखानी शुरू कीं। उन्होंने किसी सनक में दक्षिण की ओर मुड़ने का फैसला नहीं किया था। वह दक्षिण की ओर इसलिए मुड़े क्योंकि सूर्य दक्षिण की ओर मुड़ गया था। सूर्य की दक्षिणी चाल महत्वपूर्ण हो गई क्योंकि यह शिक्षण का पहला चरण था। यह साधना पद बन गया, जहां उन्होंने सप्तऋषियों को सिखाया कि उन्हें क्या करना चाहिए। उत्तरी चाल या उत्तरायण को समाधि पद या कैवल्य पद कहा जाता है। वह ज्ञान प्राप्ति का समय होता है।

छह महीने का यह समय साधना पद है और यह समय बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि अब आप सही चीजें कर सकते हैं।
साधना पद हमेशा ज्यादा महत्वपूर्ण होता है क्योंकि किसी चीज के घटित होने की प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण चीज यह होती है कि हमारे हाथ में जो हो, उसे हम सही तरीके से करें। जो हमारे हाथ में नहीं है, उसके लिए हमें सिर्फ इंतजार करना होता है। साधना एक ऐसी चीज है, जो हमारे हाथ में होती है, हम इसमें कुछ कर सकते हैं। इसका आयाम दूसरे से थोड़ा कम हो सकता है लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, यह हमारे हाथ में है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि हम इसे संभव बना सकते हैं।

किसी पौधे में खाद-पानी डालना बहुत जरूरी है। उसी के कारण उस पर फूल आएंगे। वह हमारा काम नहीं है। यह बिल्कुल ऐसा ही है। छह महीने का यह समय साधना पद है और यह समय बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि अब आप सही चीजें कर सकते हैं। अगर आप सही चीजें करते हैं, तो फल के समय आपको उसका सही फल मिलेगा।

इस सप्ताह संगीतमय बुधवार को साउंड्स ऑफ ईशा का गीत दक्षिणायनम सुनें।


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