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अगर आप विवाह को एक संस्था कहेंगे, तो स्वाभाविक है कि लोग इससे बाहर निकलना चाहेंगे।
ईश्वर भी आपकी भीतरी खुशहाली तय नहीं कर सकते। यदि आप स्वयं को दुःख न पहुंचाने का निश्चय कर लें, तब कोई भी आपको दुखी नहीं कर सकता।
प्रेम का अर्थ है खुद को विलीन कर देना। यह तब घटित होता है जब आप खुद को मिटाते हैं, तब नहीं जब आप अपना फायदा या सुविधा देखते हैं।
जीवन समावेशी है। केवल आपका मन विशेष बनने की कोशिश करता है।
आत्मविश्वास और मूर्खता का मेल बहुत खतरनाक है, लेकिन अक्सर ये दोनों साथ ही पाए जाते हैं।
अपनी यादों या कल्पना के कारण दुखी होने का मतलब है कि आप उस चीज से दुखी हैं जिसका अस्तित्व ही नहीं है।
ये बुरे लोग नहीं हैं जो ग्रह को नष्ट कर रहे हैं—बल्कि हम सभी हैं जो 'सुख की खोज' में ऐसा कर रहे हैं।
हम सिर्फ इस धरती पर रहते नहीं हैं, बल्कि हम स्वयं यह धरती हैं। यदि आप इसे आज नहीं समझते, तो तब समझेंगे जब आपको दफनाया जाएगा।
शांति और आनंद ऐसी चीजें नहीं हैं जिन्हें आप जीवन के अंत में प्राप्त करते हैं। ये तो जीवन का आधार हैं।
अपने भीतर आप कैसे हैं, यह आपके द्वारा तय होना चाहिए। आध्यात्मिक होने का यही अर्थ है।
अगर भीतर सबकुछ अच्छा हो तो बाहरी स्थितियां अद्भुत हो जाती हैं। लेकिन यदि आप भीतर से सही स्थिति में नहीं हैं, तो आपको वसंत भी कष्टदायी लग सकता है।
आपको दुनिया को संभालने की जरूरत नहीं है। यदि आप सिर्फ खुद को संभालना सीख लें, तो सब कुछ संभल जाता है।