ओह, माई बॉस!

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अकसर हमारे मन में आता है कि हमारे बॉस को कुछ नहीं आता और हम उससे अधिक जानते हैं। कई बार हमारा असंतोष इतना बढ़ जाता है कि आपसी मतभेद के रूप में सतह पर आ जाता है और फिर मुश्किल हो जाता है वहां काम करना। कितनी सही है हमारी सोच, और हमें क्या करना चाहिए जब हमारा बॉस हमसे मूर्ख हो- जानते हैं सद्‌गुरु से-

सद्‌गुरु:

कोई अगर आपका बॉस बना है तो इसलिए कि वह किसी न किसी रूप में आपसे अधिक काबिल है। आप भले यह मानते हों कि आप उससे बेहतर हैं लेकिन वह किसी शैक्षिक योग्यता, काबिलियत या प्रभाव के कारण ही तो उस पद तक पहुंचा है, कोई न कोई चीज उसे वहां तक ले कर गई है। भले ही वह भ्रष्टाचार से वहां तक पहुंचा हो, तो इसका मतलब हुआ कि भ्रष्टाचार का लाभ उठाने में वह आपसे अधिक काबिल है। किसी न किसी तरीके से, जैसी भी सामाजिक स्थितियां रही हों, वह अधिक योग्य है, इसीलिए वहां तक पहुंचा है।

वह वहां तक पहुंचा है और अधिक योग्य है, इसका यह मतलब नहीं कि वह सारा काम ठीक ही करेगा। आप भी सब कुछ सही नहीं करते। इस दुनिया में कोई भी व्यक्ति सब कुछ सही नहीं करता। आम तौर पर, वह वहां इसलिए पहुंचा है क्योंकि आपके मुकाबले अधिक चीजें सही करने और हालात को बेहतर समझने की उससे उम्मीद की जाती है।

ऑफिस में एक स्टेनोग्राफर बहुत अच्छी टाइपिंग कर सकता है। अगर बॉस टाइप करने बैठे तो हो सकता है वह एक बहुत ही बुरा टाइपिस्ट साबित हो, लेकिन फिर भी वह बॉस है। इसलिए स्टेनोग्राफर के मन में आ सकता है, “वह इंसान तो ठीक से टाइप भी नहीं कर सकता, फिर वह मेरा बॉस क्यों है?” वह आपका बॉस इसलिए नहीं है कि उसे आपसे बेहतर टाइपिंग आती है, हो सकता है उसे टाइपिंग के बारे में कुछ भी न पता हो। वह आपका बॉस इसलिए है क्योंकि वह कई और चीजें जानता है, जो आप नहीं जानते। जरूरी नहीं है कि एक बॉस में कोई खास प्रतिभा हो, लेकिन उसे सामान्य जानकारी हर चीज की या ज्यादातर चीजों की होती है। उसके पास लोगों को साथ मिलाकर चलने और काम करवाने का तरीका होता है। आप व्यक्तिगत रूप से अच्छे हो सकते हैं लेकिन हो सकता है कि आप लोगों को साथ जोड़कर रखने में सक्षम न हों। इसलिए, अगर आप वाकई चीजों को व्यवस्थित करने और साथ मिलकर काम करने में माहिर हैं, तो स्वाभाविक रूप से आप अपने जीवन में तरक्की करेंगे, चाहे अपने वर्तमान संस्थान में या कहीं और। कोई आपको रोक नहीं सकता।

अपने बॉस के बारे में मन में असंतोष पालने के बजाय, अपना काम इतनी अच्छी तरह से करें कि आपके बिना आपके बॉस का और आपकी कंपनी का काम ही न चले। अपने आप को उनकी जरूरत बना दें।

इसलिए आप किसी भी पद पर हों, अपने बॉस के बारे में मन में असंतोष पालने के बजाय, अपना काम इतनी अच्छी तरह से करें कि आपके बिना आपके बॉस का और आपकी कंपनी का काम ही न चले। अपने आप को उनकी जरूरत बना दें। इससे आपमें एक क्षमता, एक ताकत आएगी। अगर आप शिकायत करने में खुद को व्यस्त रखेंगे, तो आप अपना काम नहीं करेंगे क्योंकि आप सोचेंगे “यह आदमी बेवकूफ है, मैं इसके लिए इतना काम क्यों करूं?” तब तो आप उनके लिए अनावश्यक हैं, आपकी कोई जरूरत ही नही रह जाएगी और कंपनी आपकी छंटनी कर सकती है या आपका बॉस आपको किसी भी समय निकाल सकता है। आप इस तरह काम करें कि आपके बिना उनका काम ही नहीं चले। इतने उपयोगी बन जाएं कि आपके बिना उनका काम रूक जाए, आगे बढ़ने का यही तरीका है। किसी और की शिकायत करके आप तरक्‍की नहीं करेंगे।

जो लोग टॉप तक पहुंचे हैं, उन्होंने किसी के खिलाफ असंतोष रखते हुए तरक्‍की नहीं की। उन्होंने तरक्‍की की, क्योंकि उन्होंने बेहतरीन काम किया, अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। हम अपनी तरफ से बेहतरीन काम करते हैं, लेकिन हो सकता है कि मेरा बेहतरीन और आपका बेहतरीन एक ही स्तर पर न हो। हम अपनी-अपनी काबिलियत के अनुसार तरक्‍की करेंगे। अगर आप हमेशा दूसरों को देखते रहेंगे और अपनी तुलना करते रहेंगे तो आप जहां भी जाएंगे, आपसे ऊपर कोई न कोई जरूर होगा। तो आपको हमेशा शिकायत रहेगी और आप हमेशा सोचेंगे ‘वह आदमी मेरे जितना बेहतर नहीं है, वह उस ऊंचे पद पर क्यों है?’ फिर आप चाहे जहां भी हों, हमेशा नाखुश ही रहेंगे।

आपको किसी भी हालात में बस अपना सौ फीसदी प्रदर्शन करना है। फिर तो आप अपनी कंपनी, अपने बॉस और पूरी परिस्थिति के लिए एक जरूरत बन जाएंगे, अनिवार्य हो जाएंगे। इस तरह आप तरक्‍की करेंगे। अगर आपके अंदर उससे अधिक काबिलियत है, तो स्वाभाविक रूप से कंपनी आपको ही बॉस बनाएगी।

फोटो: talentegg 

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