अपने देश को अब इंडिया नहीं, भारत कहें
6 जून 2014, नई दिल्ली में हुई ‘इन कनवरसेशन’ श्रृंखला में डॉ किरण बेदी और सद्गुरु ने ‘एक देश के निर्माण’ पर संवाद किया। आज का स्पॉट इसी बातचीत से उद्धृत है।

6 जून 2014, नई दिल्ली में हुई ‘इन कनवरसेशन’ श्रृंखला में डॉ किरण बेदी और सद्गुरु ने ‘एक देश के निर्माण’ पर संवाद किया। आज का स्पॉट इसी बातचीत से उद्धृत है।
किरण बेदी: एक सफल देश के निर्माण के लिए किस चीज की जरूरत है?
सद्गुरु: एक देश तभी सफल होगा, जब उसके लोगों की आकांक्षाएं जीवित रखी जाएंगी। उस देश के लोगों को लगना चाहिए कि उनके जीवन में एक संभावना है। अगर लोगों की आकांक्षाएं खत्म हो गईं तो समझिए देश खत्म हो गया। इसलिए लोगों की आकांक्षाओं को जगाए रखना और उनके जीवनकाल में पूरी हो सकने वाली संभावनाओं को बनाए रखना बहुत जरूरी है। साथ ही, हमें लोगों की आकांक्षाओं को देश की आकांक्षाएं और देश की आकांक्षाओं को लोगों की आकांक्षाएं बनाना होगा।
एक हजार साल से भी पहले तमिल राजाओं ने कंबोडिया जा कर अंग्कोर वात और अंग्कोरथोम बनाया। अगर आप इन जगहों पर किए गए काम और शिल्प को देखें तो आपको अपने इंसान होने पर गर्व होगा। अंग्कोर वात इस धरती की सबसे बड़ी धार्मिक इमारत है। क्या तमिलनाडु के किसी भी बच्चे ने 12वीं तक की अपनी पाठ्यपुस्तक में इसके बारे में एक भी लाइन पढ़ी होगी?
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अगर आप देश पर गर्व ही नहीं करते, तो आप देश का निर्माण कैसे करेंगे? अगर आपको भारतीय होने पे गर्व नहीं है,तो फिर आप इस देश में रहते ही क्यों हैं? अगर पश्चिमी देशों ने अपनी वीसा नीतियों में ढील दे दी, तो तकरीबन 80 फीसदी भारतीय महासागर को तैर कर पार कर जाएंगे। इसका मतलब है कि आपने उन्हें जगरदस्ती बांध कर रखा है, यानी यह एक तरह से जेल है। लोगों को अपने मन से यहां रुकना चाहिए, जबकि हर व्यक्ति यहां से जाना चाहता है और हमने उन्हें रोक कर रखा है। देश को चलाने का यह तरीका नहीं है।
किरण बेदी: क्या हमने भारत का नाम बदल कर इंडिया करके गलती की?
सद्गुरु: वाकई एक गंभीर गलती की। जब भी कोई किसी देश पर कब्जा करता है तो सबसे पहले वह उस देश का नाम बदलता है। यह लोगों पर धौंस जमाने और उन्हें गुलाम बनाने का तरीका है। अगर आप अफ्रीकी-अमेरिकी इतिहास पर नजर डालें, तो आप देंखेंगे कि जब अफ्रीकी लोगों को अमेरिका लाया गया, तब सबसे पहले उनके अफ्रीकी नामों को हटाकर उन्हें कोई बेतुका सा नाम दे दिया गया। हमारे साथ भी यही हुआ। हमारे ‘तिरुअंनतपुरम’ को ‘त्रिवेंद्रम’, ‘चेन्नई’ को ‘मद्रास’ और ‘भारत’ को ‘इंडिया’ कर दिया गया। आखिर इंडिया का मतलब क्या है? इसका कोई मतलब नहीं है। अगर मैं आपको कोई अर्थहीन नाम दे दूं तो इसका मतलब है कि मेरे सामने आप अर्थहीन और बेवकूफ लगेंगे, क्योंकि मेरा एक अर्थपूर्ण नाम है। मेरी एक परंपरा है, एक संस्कृति है, जबकि आपको कुछ नहीं। तो इस तरह से इन संदर्भों में हम इंडिया बन गए।
मैं जानता हूं कि इस बात पर बहुत सारे बुद्ध जीवियों यह कहेंगे कि ‘नाम में क्या रखा है?’जब आप अपना नाम लेते हैं तो आपको पता होना चाहिए कि उसमें एक ध्वनि होती है। नाम का अर्थ केवल मनौवैज्ञानिक और सामाजिक होता है। जबकि उसकी ध्वनि का अपना एक अस्तित्व और शक्ति होती है। "भारत" शब्द में एक ताकत है। इस देश के हर व्यक्ति का दिल इस शक्ति से गूंजना चाहिए। साथ ही, एक भारतीय होने का क्या आशय है -यह विचार भी हर देशवासी के भीतर साफ होना चाहिए, क्योंकि जब तक हर देशवासी की आकांक्षाएं देश की आकांक्षाओं के अनुरूप नहीं होंगी, तब तक यह देश ही नहीं है।
किरण बेदी: साल 2020 तक भारत को लेकर आपके क्या सपने और विचार हैं?
जैसा कि मैं अकसर कहता हूं कि इस देश की दो सबसे बड़ी समस्याएं हैं- गरीबी और भ्रष्टाचार। भ्रष्टाचार देश के लिए बेहद तक शर्म की बात है, लेकिन गरीबी देश को कमजोर करती है। सबसे पहले गरीबी से निपटना होगा। पहले लोगों को भोजन दो। उसके बाद हम उनसे मूल्यों व नैतकिता की बात कर सकते हैं।
प्रतिभागी: मैं कामना करता हूं कि भारतीय संसद जल्दी ही आपको अपने यहां संबोधन के लिए बुलाए। अगर ऐसा होता है तो संपूर्ण भारत के लिए आप उन्हें क्या अजेंडा देना चाहेंगे?
सद्गुरु: तमिल में एक कहावत है कि जब एक राजा चुनने की बात आए तो आप किसे चुनेंगे- एक अच्छे व्यक्ति को या एक योग्य व्यक्ति को? अगर आप शादी करना चाहते हैं तो एक अच्छे व्यक्ति को चुनेंगे और अगर आप एक ऐसा शासक चुनना चाहते हैं, जो देश को चला सके तो इसके लिए आपको एक योग्य व्यक्ति की जरूरत होगी। योग्यता का एक आयाम रणनीति या कार्यनीति भी है। चाहें आप कोई छोटी सी संस्था चलाना चाहते हों या देश, उन्हें एक खास दिशा में सफलतापूर्वक चलाने का और उनके प्रबंधन का सबसे महत्वपूर्ण आयाम रणनीति है। एक रणनीति तभी अच्छा काम करती है, जब इसे खास स्तर की गोपनीयता और खास तरह की सोच कि क्या लोगों को पता होना चाहिए और क्या नहीं, के साथ हैंडल किया जाए। अगर आपके भी परिवार में दो बच्चे हैं तो आप उन्हें हर बात नहीं बताते। तो इसकी एक नीति होती है कि बच्चे को आज, क्या कल और परसों क्या बताना है। इस तरह से उन्हें राह दिखानी होगी।