आखिर यह जीवन बनता कैसे है
इस हफ़ते के स्पॉट में देखें नन्हें पिल्लों को जिन्हें सद्गुरु की पालतु कुतिया गुगी ने जन्म दिया है। सद्गुरु बता रहे है कि “इस शरारती कुतिया ने कुछ ही घंटों के भीतर कैसे एक जिम्मेदार मां के रूप में...”

हमारे आस पास की साधारण सी लगने वाली परिस्थितियों में जितनीबुद्ध है, वो अविश्वसनीय है। एक फूल का सही मौसम के आने पर खिलने में जो बुद्धिमानी है, वह जबर्दस्त है। हो सकता है कि कुछ लोग यह तर्क करें कि यह सब तो अपने आप ही होता है। ऐसे तर्क वही लोग करते हैं, जो जीवन प्रक्रिया पर भरपूर ध्यान नहीं देते - न अपने भीतर, न बाहर।
पिछले कुछ सालों में, हमें बहुत लोगों ने पग प्रजाति के कुत्ते भेंट किए। इसी वजह से हमारे घर में चार पग कुत्ते हैं, जिनमें से एक बूढ़ा है। इन्हीं कुत्तों में से एक की उम्र एक साल से कुछ ज्यादा है। यह सही मायनों में बड़ी शरारती और जिंदादिल किस्म की कुतिया है। कुछ समय पहले यह गर्भवती हो गई। अभी तीन दिन पहले ही उसने तीन छोटे पिल्लों को जन्म दिया, जिनका आकार मध्यम आकार के चूहों जैसा है। यह देखना बड़ा ही आश्चर्यजनक रहा कि इस शरारती प्राणी ने कुछ ही घंटों के भीतर कैसे एक जिम्मेदार मां के रूप में अपना रूपांतरण कर लिया। तीन नई जिंदगियों का इस दुनिया में आना तो चमत्कार है ही, पर इनकी मां का रूपांतरण भी वाकई हैरान कर देने वाला है।
मेरा मन था कि इन तीन बच्चों को बढ़ते हुए, और इनके साथ-साथ इनकी मां की गतिविधियों को भी अगले कुछ हफ्तों तक नजदीक से देखूं और महसूस करूं। लेकिन हुआ यूं कि अभी मैं हैदराबाद में हूं और बेंगलुरू और मुंबई से होता हुआ अमेरिका जाने वाला हूं। अपने आस पास की दुनिया की जरूरतों को देखते हुए मेरा बिजी शिड्यूल अनिवार्य हो गया है। जीवन के प्रति मेरा नजरिया है - इंतजार करना, देखना और समाहित करना।
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अपनी परंपराओं से हम जानते हैं कि मां के दूध की संरचना बच्चे के लिंग पर निर्भर होती है। बच्चे के लिंग के हिसाब से मां के दूध की बनावट अलग अलग होती है। बेटे के लिए मां के दूध की संरचना अलग होती है और बिटिया के लिए अलग। यह अंतर बच्चे की शारीरिक और मनोवैज्ञानिक विकास की जरूरतों के अनुसार होता है। हमारे यहां हमेशा से यह परंपरा रही है कि जब कोई महिला बच्चे को जन्म दे, तब उसका पति उसके साथ हो। अपने बच्चे और पत्नी के साथ एक गहरे जुड़ाव को स्थापित करने के लिए यह बहुत ज़रूरी है, क्योंकि बच्चे को जन्म से महिला की प्रकृति में इतना ज्यादा नाटकीय बदलाव आता है कि वह पहले वाली महिला नहीं रह जाती। आज तमाम अध्ययन यह बताते हैं, कि जब कोई पुरुष अपने नवजात बच्चे की गंध सूंघता है तो उसका टेस्टेस्टेरॉन स्तर नीचे चला जाता है और उसका रूपांतरण एक पुरुष से पिता में हो जाता है। यह एक सहज वृत्ति ही है कि जब कोई पुरुष अपने नवजात बच्चे को गोद में लेता है तो उसे अपने चेहरे के करीब लाना चाहता है। यह गंध उसे पितृत्व की और ले जाती है।
इस जगत के हर पहलू और हर जीवन के बनने के पीछे जो असाधारण बुद्धिमत्ता या ज्ञान है वह बिल्कुल अविश्वसनीय है और किसी भी मानव मस्तिष्क की समझ से परे है। यह ब्रह्माण्ड एक जीता जागता मस्तिष्क है। बुद्धिमत्ता या ज्ञान आपके या मेरे भीतर नहीं है। अगर हम अपने बोध के दरवाजे पूरी तरह से खुले रखें - तो इस पूरी सृष्टि और सृष्टिकर्ता का ज्ञान हमारा है। वरना हम अपने इन्द्रिये-बोध की सीमाओं के भीतर ही रहते रहेंगे जो कई टुकड़ो में बंटा हुआ है।
ईश्वर करे आप इस ब्रह्मांडीय रूप में विकसित हों।