आज के स्पॉट में सद्गुरु अपनी अमेरिका यात्रा और सिंगापुर में बिताए एक दिन के बारे में लिख रहे हैं। सद्गुरु फ़ॉर्मूला वन के अपने अनुभव और फ़ॉर्मूला रेसिंग कारों के प्रति अपनी रूचि के बारे में भी बता रहे हैं। साथ ही वे नरेन्द्र मोदी की अमेरिका यात्रा और अमेरिका में उस यात्रा को लेकर जो उत्साह है उसका भी वर्णन कर रहे हैं।
मोदी ने इस अवसर को इतना बड़ा बना दिया कि एक राजनैतिक दौरा एक स्टार परफॉरमेंस में बदल गया।
पिछले हफ्ते की निचोड़ देने वाली भागदौड़ के बाद सिंगापुर में एक दिन के लिए रुकना और F1 रेस में मौजूद होना अपने आप में किसी सुखद अहसास से कम नहीं था। रेसिंग ट्रैक पर इन जबदस्त कारों को दौड़ते देखना एक ट्रीट की तरह है। इन फर्राटेदार कारों की आवाज और रफ्तार आपके दिल में आग लगा सकती है। हालांकि इस बार नए नियमों के लागू होने के चलते रेसिंग कारों की आवाज थोड़ी कम हुई है, लेकिन इनकी रफ्तार अब भी बरकरार है। फरारी का अपना ही मजा है, क्योंकि इटैलियन ऑटो से एक अलग ही तरह की गंध आती है, हालांकि आजकल जर्मन तकनीक वाली गाड़ियों का फ़ॉर्मूला 1 रेस पर प्रभाव अधिक है। पूरी रेसिंग अपनी ग्रीड योजना के अनुसार ही खत्म हुई सिवाए एक रोमांचकारी घटना के - रेसिंग ट्रेक पर नंबर दो की गाड़ी स्टार्ट ही नहीं हो रही थी। सिंगापुर का ट्रेक कुछ ऐसा है जिस पर बहुत ज्यादा रोमांच के लिए कोई गुंजाइश ही नहीं छोड़ी गई है।
शांति दिवस की गरिमा को बचाए रखने के लिए उस दिन शाम को होने वाली आतिशबाजी का कार्यक्रम टाल दिया गया।
अमेरिका टूर के लिए निकलने से पहले के दो दिन बेहद व्यस्तता भरे थे - एक दिन उत्तराखंड में और दूसरा दिन दिल्ली में। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर यहां अमेरिका में काफी उत्साह दिखाई दे रहा है। ऐसा भव्य स्वागत यहां पहले कभी नहीं देखा गया। मोदी ने इस अवसर को इतना बड़ा बना दिया कि एक राजनैतिक दौरा एक स्टार परफॉरमेंस में बदल गया। यह देखना अपने आप में शानदार है कि कैसे एक व्यक्ति जनसाधारण की आकांक्षाओं का स्तर इतना उंचा उठा सकता है। मोदी ने हिंदुस्तानी लोगों व कारोबारी दुनिया में जो आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं, उनका पूरा होना जरूरी है। उम्मीद है कि वह राजनैतिक हालातों में नहीं फंसेंगे और अपनी कोशिशों में सफल होंगे, क्योंकि एक बड़ी आबादी की भलाई उनकी सफलता पर निर्भर है। एक बेहद गरीब परिवार से निकल कर आज देश का नेतृत्व करने वाले इस अजेय इंसान की कहानी भी अपने आप में अतुलनीय है। उम्मीद है ऐसा ही पूरे देश के साथ भी हो।
अमेरिका के ईशा योग केंद्र में विश्व शांति दिवस का आयोजन काफी धूमधाम से और बड़े पैमाने पर किया गया। शांति दिवस की गरिमा को बचाए रखने के लिए उस दिन शाम को होने वाली आतिशबाजी का कार्यक्रम टाल दिया गया।
आदि योगी ने हाल ही में स्वेज नहर से होते हुए अटलांटिक महासागर में प्रवेश किया है। कुछ ही हफ्तों में वे अमेरिका में होंगे। वह एक नए गाथा की शुरुआत होगी।
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