धन्यवाद गीत : साउंड्स ऑफ़ ईशा की अनूठी प्रस्तुति

यह विडियो ब्लॉग हमारी संगीत मंडली – साउंड्स ऑफ़ ईशा – की भेंट है। इस गीत में वे सद्‌गुरु के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट कर रहे हैं

जीवन प्रदान करने वाली हवा के प्रति कोई आभार कैसे प्रकट कर सकता है? भोजन के प्रति कृतज्ञ होने का क्या तरीका है? हमें दृष्टि प्रदान करने के लिए हम किसके प्रति कृतज्ञ बनें?

और कोई कृतज्ञ बनें बिना रहे भी कैसे? जब आप यह जानते हैं कि जीवन का स्रोत आपने चेतन होकर नहीं गढ़ा है। कोई कृतज्ञ हुए बिना रह कैसे सकता है? जब आप अपने अज्ञान से उपर उठना शुरू करते हैं, तो आप उस अस्तित्व के प्रति अहोभाव से भरे बिना कैसे रह
सकते हैं।

ऐसा नहीं है कि उन्हें हमारे धन्यवाद से कोई फर्क पड़ता है – लेकिन हमारे लिए, हमारे गुरु के प्रति धन्यवाद से भरे होना बहुत मायने रखता है, क्योंकि गुरु ही हमारे राह की रौशनी हैं और वे ही हैं जो हमारे जीवन को अर्थपूर्ण बनाते हैं।

धन्यवाद

वो बताने के लिए कि मैं क्या नहीं हूँ,
और वो भी बताने के लिए जो मैं बन सकता हूँ।

 

धन्यवाद - साउंड्स ऑफ़ ईशा

यह गीत एक प्रयास है, आभार प्रकट करने का
यह आभार पर्याप्त तो नहीं पर मेरी पूरी कोशिश है।

एक दर्पण हैं, आप मेरे लिए
जो मुझे वो दिखाता है जो मैं नहीं हूँ
उस गहरी खाई में जो एक समय पर मैं खुद था।

एक-एक करते परते हटाते हैं आप,
यह दुखदायी है, पर आनंदमय बना देता है।

 

आपका धन्यवाद मुझे वो दिखाने के लिए, जो मैं नहीं
और वो भी दिखाने के लिए जो मैं बन सकता हूं।
अनंत बार धन्यवाद।

आह, अगर मैं बस अस्तित्व भर बन जाऊं,
तो आप मुझे उन सभी चीज़ों के दर्शन करा सकते हैं,
जिन्हें देखने की चाहत मेरे अंदर हो।

सिर्फ आप ही हैं जिन्होंने मेरा दर्द मिटा दिया है,
निराशा से भरा था मैं, और न था कोई सहारा
आपने मुझे बचा लिया, हां सच में बचा लिया।

मेरे भीतर बारिश लाने के लिए धन्यवाद
मेरे उन छुपे हुए आंसुओं को बहने देने के लिए धन्यवाद।
मेरे भीतर ही बसे प्रेम से मेरा परिचय कराने के लिए धन्यवाद
वो प्रेम जिसे जानने के लिए मुझे कई वर्ष या फिर जन्म लग जाते।

आह, अगर बस मैं खुद को समर्पित कर दूं
तो आप मुझे ऐसी यात्रा पर ले जा सकते हैं,
जिसकी न कोई शुरुआत है न अंत।

पूर्ण समर्पण करने में मेरी मदद करें …

आप मेरे लिए दिव्य हो
आपने मुझे ढूंढ लिया।
तब, जब मैं लोगों और जगहों को
ढूंढते हुए थक-हार गया था।
निरानंद था मैं, पूरी तरह निरानंद
जब आपने मुझे दुःख की चोटियों
से नीचे उतारा और मुझे थाम लिया।

मुझे अपने भीतर ही एक आनंद दिखाने के लिए धन्यवाद
स्वयं को न जानने की भूल को प्रेम से मुक्त करने के लिए।
धन्यवाद, इन सभी चीजों के लिए
मैं आपको सभी चीजों के लिए धन्यवाद देता हूं
उन चीज़ों के लिए भी जिनका मुझे बोध ही नहीं है।

आेह, अगर मैं पूर्ण समर्पित हो सकूं
तो मुझे बूंद बूंद नहीं मिटना होगा
सबकुछ एक ही बार में विसर्जित हो जाएगा

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