इससे पहले कि हो जाए मेरा शरीर
और मेरी अस्थियाँ बस ताजी राख,
मेरे अस्तित्व की शक्ति और सुंदरता
को कर लेने दो स्पर्श इस संसार को।
ले जाने दो मेरी साँसों को
मेरे अस्तित्व की सुगंध तुम तक,
और उस स्वामी की महिमा भी, जो शून्य है।
उस शून्य की गहनता से
नहीं चूक सकता कोई
भौतिक चीजों के उथलेपन के
बंधन और भटकाव में फँसकर
मेरी कामना है, कि ये भटकाव
ना हो सदा के लिए
मैं समय से परे होकर भी, खेलता हूँ समय में,
पर नहीं है कोई सार इस खेल में
क्योंकि हर सार एक ‘मिथक’ है।
हमारा जीवन हो मजबूत और प्रभावशाली,
पर हमारी विरासत केवल ‘राख’ है।