छुट्टियों का समय सभी बच्चों के लिए मौज-मस्ती से भरा होता है। खासतौर पर गर्मियों की छुट्टियों में तो बच्चों की सारी छिपी हुई शैतानी बाहर आ जाती है। लेकिन बहुत कम बच्चे ऐसे होते हैं जो अपने छुट्टियों को इस तरह बिताते हैं कि वह उनके लिए मज़ेदार होने के साथ-साथ, दूसरों के लिए भी फ़ायदेमंद हो सके। इस लिहाज़ से ईशा विद्या के बच्चे गर्मी की छुट्टियों को अपने व दूसरों के लिए बहुत ही फ़ायदेमंद बना रहे हैं।

ईशा विद्या के 96 छात्र सिखा रहे हैं ईशा उप-योग

जी हाँ, 25 अप्रैल से, तमिल नाडू के अलग-अलग इलाकों के ईशा विद्या स्कूलों से 96 छात्र ईशा योग केंद्र में आए हुए हैं। वे यहाँ एक माह से हैं और आश्रम में आने वाले मेहमानों को उप-योग सिखा रहे हैं। उप-योग दस आसान अभ्यासों का सैट है जो आपके जोड़ों व मांसपेशियों को नया जीवन देता है और ऊर्जा तंत्र को सक्रिय बनाता है।

हममें से बहुत से लोगों के लिए यह हैरत की बात हो सकती है कि खेलने की उम्र में बच्चे इतनी जिम्मेदारी भरा काम निभा रहे हैं। हमारे ध्यान देने की बात यह है कि वे इस काम को गंभीर शक्लों के साथ नहीं बल्कि इस तरह सिखा रहे हैं मानो कोई खेल खेल रहे हों। सिर्फ इसलिए कि वे एक उपयोगी काम कर रहे हैं, उनके स्वभाविक़ आनंद में कोई कमी नहीं आई है। उन्हें आपस में बातें करते, हँसी-मजाक करते, शरारतें करते देखना अपने-आप में बड़ा सुखदायक है। लेकिन साथ ही वे अपने काम को पूरे लगाव और उत्तरदायित्व के साथ पूरा करते हैं।

ईशा विद्या छात्रों के दिन कुछ ऐसे बीतता है

सुबह छह बजे गुरु पूजा के साथ उनके दिन की शुरुआत होती है और इसके बाद वे योगाभ्यास और मंदिर में ध्यान करते हैं। फिर वे अलग-अलग समूहों में बँट कर, सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक उप-योग की ट्रेनिंग देते हैं। एक समूह आने वालों लोगों का स्वागत करता है, उन्हें उप-योग के बारे में थोड़ी जानकारी देता है, फ़्री क्लास के लिए उन्हें रजिस्टर करता है और दूसरा समूह रजिस्टर्ड लोगों को आधे घंटे के स्लॉट में वीडियो की मदद से उप-योग का प्रशिक्षण देता है। ये विडीयो सद्गुरु के मार्गदर्शन में तैयार किए होते हैं। ये कक्षाएँ हर आधे घंटे में, चार बजे तक चलती रहती हैं।

यह समय ईशा में दक्षिण-पश्चिम मानसून का होता है। हर शाम बारिश होती है और दिन में बहुत गर्मी रहती है। वर्षा हो या उमस से भरी गर्मी, इनमें से कुछ भी बच्चों के लिए बाधा नहीं बनता। वे अपनी प्यारी सी मुस्कान के साथ आने वाले मेहमानों का स्वागत-सत्कार करते रहते हैं।

बाकी बचे हुए समय में बच्चे आश्रम के वातावरण में आनंद मनाते हैं। वे मट्टू मनई में हमारी गौओं के साथ समय बिताते हैं, सूर्यकुंड में डुबकी लगाते हैं, आदियोगी के साथ समय बिताते हैं और हमारे ‘कल्याणी’ सरोवर में तैरते हैं।

बच्चे सभी से घुलने मिलने लगे हैं

हम देख सकते हैं कि इस एक माह के समय ने उनके जीवन को कई रूपों में बदल दिया है। कई शर्मिले बच्चे अब आसानी से लोगों के साथ घुल-मिल सकते हैं। उन्हें कई तरह के लोगों से मिलने का अवसर मिला और उन्होंने सीखा कि अलग-अलग तरह के लोगों के साथ कैसे पेश आना चाहिए।

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बच्चों को इन कक्षाओं को संभालने की कोई फ़ॉर्मल ट्रेनिंग नहीं दी गई थी। उन्हें केवल कुछ निश्चित निर्देशों का पालन करना था और इसके बाद उन्होंने कुछ रिहर्सलों में हिस्सा लिया था। महत्वपूर्ण बात यह है कि वे इस काम के लिए ख़ुद आगे आए। यह समझते हुए कि यह काम लोगों की भलाई के लिए है, इन बच्चों ने ख़ुद स्वयंसेवक बनने का निर्णय लिया।

इन बच्चों के साथ आए शिक्षक हैरान हैं कि जो बच्चे कक्षा में अपना मुँह तक नहीं खोलते थे, वे इतने आराम से लोगों से बातचीत कर रहे हैं। शिक्षकों और बच्चों के पास अपने अनुभवों की पिटारी में बहुत कुछ है,जो वे हमारे साथ बाँटना चाहते हैं। आइए उनकी कुछ बातें सुनते हैं।

यह अनुभव बिल्कुल ही अलग रहा

‘अपने से बड़ी उम्र के लोगों को कुछ सिखाने का यह अनुभव बिल्कुल ही अलग रहा। हमें यह अवसर देने के लिए ईशा का धन्यवाद। यह सद्गुरु की इच्छा है कि आध्यात्मिकता की कम से कम एक बूँद हर इंसान तक जाए और हमें ख़ुशी है कि हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं’।

- साधना, ईशा विद्या, कोएंबटूर

यह हमारे लिए एक अवसर है

‘यहाँ अलग-अलग तरह के लोग आ रहे हैं। मैं ख़ुश हूँ कि मुझे योग के ज़रिए लोगों की मदद करने का मौक़ा मिला, और वो तब जब मैं ख़ुद अभी स्कूल में हूँ। इस जगह का माहौल बहुत ही शांतिपूर्ण है। मैं अगले साल फिर आ कर योग सिखाना चाहूँगी। यह हमारे लिए एक अवसर है कि हम साहसी बन कर, लोगों से बिना संकोच बात करना सीख सकें।’

- श्रीमती, ईशा विद्या छात्र

आध्यात्मिकता की एक बूँद पहुँचाने में मदद मिलेगी

‘हम 21 जून को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के एक हिस्से के तौर पर लोगों को मुफ़्त में उप-योग सिखा रहे हैं। इस तरह सबके पास आध्यात्मिकता की एक बूँद पहुँचने में मदद मिलेगी। इस अभ्यास को करने में केवल पाँच मिनट का समय लगता है इसलिए इसे कोई भी कर सकता है। इसके लिए आपको जीवनशैली में बदलाव लाने की ज़रूरत नहीं होती। उप-योग करने से शरीर और मन को ताज़गी और नया जीवन मिलता है। अगर पूरे दिन में पाँच मिनट का समय उप-योग को दे सकें तो नए जीवन की राह मिल सकती है।’

-यशवंत, ईशा विद्या छात्र

हमें भी उनसे कुछ सीखने का अवसर मिलता है

‘जब हम यहाँ तरह-तरह के लोगों से मिलते हैं तो न केवल हम उन्हें कुछ सिखाते हैं बल्कि हमें भी उनसे कुछ सीखने का अवसर मिलता है। उप-योग करने से पुराने रोगों से छुटकारा मिलता है और तनाव से मुक्ति होती है। यह अभ्यास बहुत ही कम समय में सीखा जा सकता है।’

-कनिष्का, ईशा विद्या छात्र

छात्रों में भारी बदलाव दिख रहा है

‘हमें अपने उन सभी छात्रों में भारी बदलाव दिख रहा है जो खुद उप योग करते हैं, और दूसरे लोगों को उप-योग सिखा रहे हैं। जब बच्चे ईशा केंद्र में स्वयंसेवक बनने के बाद स्कूल वापस आए तो उनके बोलने और व्यवहार करने के तरीके में भारी बदलाव पाया गया। हमने देखा कि वे कितनी आसानी से लोगों के सवालों के जवाब दे रहे थे। उन्हें दूसरे स्कूलों के बच्चों के साथ भी घुलने-मिलने का मौका मिला।’

- मनोज, अध्यापक, ईशा विद्या स्कूल

ये बच्चे बहुत सौभाग्यशाली हैं

‘मैं ईशा योग केंद्र में आया था और इस जगह आ कर उप-योग सीखने का अद्भुत अवसर मिला, जिसकी हमें कोई उम्मीद नहीं थी। ये बच्चे बहुत सौभाग्यशाली हैं कि इन्हें इस छोटी उम्र में ही ये योग सीखने का मौका मिला है। उन्होंने इसे ख़ुद ही नहीं सीखा बल्कि वे इसे दूसरों को भी सिखा रहे हैं ताकि ये उपयोगी ज्ञान सब तक पहुँच सके।’

- एक प्रतिभागी