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समाज को मानव चेतना को नहीं गढ़ना चाहिए, बल्कि मानव चेतना द्वारा समाज गढ़ा जाना चाहिए।
मन एक शक्तिशाली साधन है। आपके द्वारा पैदा किया गया हर विचार और हर भावना आपके शरीर के रसायन को बदल देती है।
मानव मन की सुंदरता यह है कि वह कल्पना कर सकता है, और बदसूरती यह है कि वह कल्पना में खो सकता है।
जब तक आप यह सोचते हैं कि आप जैसे हैं उसके लिए कोई और जिम्मेदार है, तब तक आप वैसे नहीं बन सकते जैसा आप बनना चाहते हैं।
तनाव में आपकी बोध-क्षमता खत्म हो जाती है। शिथिलता में भी बोध-क्षमता नहीं होती। जब आप तीव्र और सहज होते हैं, केवल तभी आप हर चीज को बिल्कुल वैसा देख सकते हैं जैसी वह है।
हमारे पूर्वजों के बिना हमारा अस्तित्व संभव न होता। पिछली पीढ़ियों के योगदान को महत्व देना समझदारी है।
करुणा सभी भावनाओं में सबसे ज्यादा मुक्त करने वाली भावना है।
बोध, योग का मूल है। जितना गहरा आपका बोध होगा, उतना ही गहरा जीवन का आपका अनुभव होगा, और उतना ही समृद्ध आपका ज्ञान।
भक्ति एक ऐसी अवस्था है जहां आप खुद मौजूद नहीं होते – जीवन बस एक खास मिठास और सुंदरता बनकर आपके भीतर से बहता है।
अगर आपके आस-पास के लोग आपके लिए आपकी अपनी इच्छाओं से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएं, तो आपका जीवन सरल और अद्भुत हो जाएगा।
आप शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को अलग नहीं कर सकते। स्वास्थ्य हमेशा संपूर्ण ही होता है।
महात्मा का अर्थ है महान-आत्मा। कोई महात्मा तभी बनता है, जब वह अपनी सभी पहचानों से परे जाकर केवल एक 'जीवन' के रूप में कार्य करता है।