नोटबंदी : प्रधानमंत्री का सराहनीय कदम

नोटबंदी : प्रधानमंत्री का सराहनीय कदम

सद्‌गुरु500 और 1000 के नोटों को बदलने के हाल ही उठाये गए फैसले का कई स्तरों पर स्वागत किया गया है। जानते हैं सद्‌गुरु के नोटबंदी के बारे में विचार…

सद्‌गुरु ने प्रधानमंत्री द्वारा उठाए गए इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि बड़ी मुद्रा को समाप्त करने का प्रधानमंत्री द्वारा हाल में उठाया गया कदम एक क्रांतिकारी, प्रशंसनीय और बहुत ही उल्लेखनीय कदम है। यह स्वच्छ भारत को स्पष्ट रूप से दिखाता है! इस कदम से कानून के पाबंद लोग तो बहुत खुश हैं, मगर जो लोग थोड़े-बहुत हेर-फेर के साथ अपने कारोबार चला रहे थे, उनमें खलबली मच गई है।

कुछ लोगों का एक ख़ास रवैया 

ऐसा अचानक बिना किसी चेतावनी के नहीं किया गया है। कई बार इशारों में बताया गया मगर लोगों ने इन संकेतों पर कोई ध्यान नहीं दिया।

आने वाले समय में भी हमारे नेता ऐसे ही होंगे क्योंकि यह पीढ़ी ऐसे नेताओं को नहीं चुनेगी, जो बदलाव के लिए प्रतिबद्ध नहीं हैं। लोग बदलाव चाहते हैं।
हर तरह की आर्थिक गतिविधि को मुख्य धारा में लाने के लिए यह एक सही कदम है। पारंपरिक व्यवसायों को कुछ समय के लिए परेशानी होगी। बहुत से लोगों को घबराहट हो सकती है, इसलिए नहीं कि उन्होंने कोई अपराध किया है, बल्कि इसलिए कि देश में लगभग पचास फीसदी लेन-देन टैक्स के राडार के नीचे होता है। इसकी कई वजहें हैं। लोग यह महसूस करते हैं कि वे जितना टैक्स दे रहे हैं, उसके हिसाब से उन्हें बुनियादी ढांचे, सेवाओं और दूसरी चीजों में कोई फायदा नहीं मिल रहा। इसलिए उन्होंने एक खास रवैया अपना लिया है कि ‘मुझे टैक्स नहीं देना है।’

देश के लिए कुछ सर्जरी जरुरी है

मगर अब इस देश को सही तरह से व्यवस्थित करने का समय आ गया है। हालांकि इसमें मुश्किलें आएंगी, बहुत से लोग दुखी होंगे, बहुत सारे लोगों को जबर्दस्त आर्थिक किल्लत का सामना करना पड़ेगा, मगर हमें इसे झेलना होगा।

आने वाले समय में भी हमारे नेता ऐसे ही होंगे क्योंकि यह पीढ़ी ऐसे नेताओं को नहीं चुनेगी, जो बदलाव के लिए प्रतिबद्ध नहीं हैं। लोग बदलाव चाहते हैं।
देश के लिए थोड़ी-बहुत सर्जरी जरूरी है, क्योंकि उससे भारत की अर्थव्यवस्था और विकसित होगी। सारी दुनिया भारत को एक संभावना के रूप में देख रही है। दुनिया की सभी मुद्रा प्रणालियों और निवेश प्रक्रियाओं ने हमेशा से भारत की उपेक्षा की है, क्योंकि वे हमारे भ्रष्टाचार, हमारी अक्षमता, गड़बड़ी करने और किसी चीज को शुरू करके छोड़ देने के हमारे तरीकों से डरते थे। अब वह छवि काफी हद तक बदल रही है और मुद्रा बाजार अब भारत की ओर बढ़ रहे हैं। अब आप तेजी से चीजों को बदलते देखेंगे। अगर इस विकास को स्थिर करना है, तो यह बहुत महत्वपूर्ण है कि सब कुछ ऊपर और सामने हो, कुछ भी भूमिगत नहीं। अगर हम चाहते हैं कि दुनिया हमारे साथ लेन-देन करे तो सभी स्तरों पर ईमानदारी दिखाना बहुत महत्वपूर्ण है।

हमारा नेतृत्व प्रतिबद्ध है

अब हमारे पास इसे नया आकार देने का मौका है, क्योंकि बाकी दुनिया तक हमारी पहुंच है, जैसी पहले कभी नहीं थी और हमारा नेतृत्व इन बदलावों को लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

केवल सरकारें या कोई एक अकेला नेता इसे नहीं कर सकता। हर नागरिक को इसे करना होगा।
आने वाले समय में भी हमारे नेता ऐसे ही होंगे क्योंकि यह पीढ़ी ऐसे नेताओं को नहीं चुनेगी, जो बदलाव के लिए प्रतिबद्ध नहीं हैं। लोग बदलाव चाहते हैं। मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में हमें एक काफी बेहतर भारत, एक नया भारत देखने को मिलेगा। हर व्यक्ति, चाहे वह जीवन के किसी भी क्षेत्र में हो, उसके पास जो भी जिम्मेदारी हो या उसका कुछ भी प्रभाव हो, उसे खड़े होकर इसे संभव बनाना होगा। केवल सरकारें या कोई एक अकेला नेता इसे नहीं कर सकता। हर नागरिक को इसे करना होगा।


संबन्धित पोस्ट


Type in below box in English and press Convert