कड़वाहट का तेजाब
आखिर किसे जला रहा है?
कड़वाहट, पैदा होती है
पुरानी यादों की सड़ांध से।
पर जब डंक लगता है तेजाब का,
तो आप खुद बन जाते हैं वही।
कड़वाहट, उन बातों की जो बीत चुकी हैं,
और नहीं आएँगी कभी वापस,
हम पकड़े रहते हैं उन्हीं को
हम सँभालते रहते हैं,
गुजरे कल की कब्रों को
और नहीं देख पाते
भविष्य के गर्भ में छिपी
नई संभावनाओं को।
कड़वाहट के इस जलते तेजाब में,
उन पर ध्यान होता है अधिक
जो जा चुके हैं,
और उन पर कम
जो हमारे सामने हैं या आने वाले हैं।
बीते हुए समय की यह सड़ांध,
घोल सकती है जहर
अपने लिए और दूसरों के लिए।
ऐसी ताकत है
उन चीजों की, जो जा चुकी हैं
और लौटकर कभी नहीं आने वाली...