जून 2026
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बुद्धिमत्ता की पुकार
जब सत्य का भार असह्य हो जाए,
जब तर्क को अपशब्दों से दबाया जाए,
जब विवेक को निराधार कलंक से मिटाया जाए —
तो जान लो, यही पराजय की भाषा है।

धरती का सही आकार बताने वाले को
मृत्यु दी गई है इस धरा पर।

मानव समाज का इतिहास
यही कहता है–
वे विवेक और जागरूकता के बजाय
हमेशा अधीन रहे हैं - धन और दुर्बलता के।

अहम से जन्मा आत्मविश्वास,
अंतर्दृष्टि से जन्मी स्पष्टता का स्थान ले बैठता है।

यदि बुद्धि और स्पष्टता
नहीं करते अपनी वाणी को बुलंद,

तो संसार भटक जाएगा –
उन लोगों के पीछे,
जो छल-कपट और डर से भरे हैं।

निराधार मान्यताएँ
उन उन्मादियों की आँखों पर पर्दा डाल देती हैं,
जो तड़पते रहते हैं हमेशा
और अधिक पाने की भूख से।

इसलिए स्पष्टता की आवाज बनें,
बुद्धिमत्ता की पुकार बनें,

ताकि मानव, उस जीवन की
सुंदरता और समृद्धि को
देख सके, जी सके-
जो स्वयं हम हैं।
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