अमेरिकी अतिथि का अनुभव

इस वीडियो में जानते हैं अमेरिका से आए एक अतिथि की दृष्टि से ईशा विद्या के बारे में।
 
 
 
 

सद्गुरु, संस्था के वार्षिक सूचना-पत्र ‘ईशा विद्या क्रॉनिकल’ में, ईशा विद्या से जुड़े उनके लक्ष्य की चर्चा करते हुए

सद्गुरु: संस्था के वार्षिक सूचना-पत्र ‘ईशा विद्या क्रॉनिकल’ में, ईशा विद्या से जुड़े उनके लक्ष्य की चर्चा करते हुए

ग्रामीण युवाओं के लये ऐसी परिस्थितियाँ नहीं बननी चाहिएं, जहाँ वे अपने जीवन के लिए कुछ भी न कर सकें।

तमिलनाडू के सरकारी स्कूलों में 97 लाख छात्र हैं पर ये केवल आंकड़े भर हैं, क्योंकि शिक्षा की गुणवत्ता दिन-ब-दिन बिगड़ रही है।

हमारे 20 प्रतिशत से भी कम ग्रेजुएट रोज़गार पाते हैं। इन बच्चों के पास न तो अपने माता-पिता का हुनर होता है, और न ही ये कुछ पढ़ सकते हैं या गणित जानते हैं। हमने ईशा की शैक्षिक पहल के साथ इस एक चीज़ को वाकई बदला है। हमारे अध्यापक शिक्षा की गुणवत्ता को निखारने के लिए, और साथ ही बच्चों के लिए इसे एक आनंददायक अनुभव बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

हम और मुट्ठी भर अन्य संगठन जो भी प्रयास कर रहे हैं, वह सागर में छोटी सी बूँद के समान है। इसलिए हम सरकारी स्कूलों को गोद ले रहे हैं और उन्हें अपना कर, यह देख रहे हैं कि वहाँ के इंफ्रास्ट्रक्चर तथा अध्यापन के तरीकों में कैसे सुधार लाया जा सकता है, और दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता कैसे बढ़ाई जा सकती है। हम ऐसे स्कूलों में अपने चार-चार अध्यापकों को भी शामिल कर रहे हैं, और वे स्कूलों की भीतरी कार्यप्रणाली में सुधार लाने का प्रयास करेंगे।

हम सरकारी स्कूल के अध्यापकों के लिए ईशा विद्या स्कूलों को प्रशिक्षण स्थल के तौर पर प्रयोग में ला रहे हैं। हमने इसे प्रमुख अभियान के तौर पर आरंभ किया और इसके अद्भुत नतीजे सामने आ रहे हैं।

ईशा विद्या आने वाले सालों में, इसे विशाल स्तर पर संपन्न करेगा।

केवल एक ही संस्था या संगठन इस महती कार्य को पूरा नहीं कर सकता। हम प्रेरित कर सकते हैं, सुविधाएँ दे सकते हैं, परंतु हम सब कुछ नहीं संभाल सकते क्योंकि यह विशाल स्तरीय परियोजना है। मनुष्य के जीवन में आने वाले बदलाव को केवल आंकड़ों से नहीं मापा जा सकता, पर फिर भी हमें ज्यादा से ज्यादा छात्रों को यह संभावना सौंपनी होगी। ईशा को अपने सद्भाव, सम्मान व योग्यता के बल पर, सरकार, कार्पोरेट व यूनीसेफ जैसे संगठनों के साथ जुड़ना होगा।

मैं आशा करता हूँ कि आप सब भी अपनी पूरी क्षमता के साथ अपना योगदान देंगे, क्योंकि इससे जुड़ कर आप ग्रामीण भारत में एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं।