धर्मों की सर्वव्यापकता

23 जून, 2013 को ध्यानलिंग की प्राण प्रतिष्ठा की चौदहवीं वर्षगांठ थी। इसके उत्सव में ‘धर्मों की सर्वव्यापकता’ पर अंतर्धार्मिक विचार-विमर्श का एक सत्र भी था, जहां तमाम धर्मों और परंपराओं के प्रसिद्ध वक्ताओं ने सभा को संबोधित किया।
 
 
 
 

23 जून, 2013 का दिन ध्यानलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की चौदहवीं वर्षगांठ के रूप में मनाया गया। समारोहों में ‘धर्मों की सार्वभौमिकता’ नामक विषय पर विभिन्न धर्मों व विश्वासों से जुड़े विचारों का एक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विविध धर्मों व परंपराओं से आए विद्वानों ने उपस्थित श्रोताओं को संबोधित किया। गणमान्य अतिथियों की सूची में लद्दाख से द्रुक्पा पंथ के ग्यालवांग दु्रकपा जी, नई दिल्ली से दिल्ली कैथोलिक आर्क डायोसिस के निदेशक व प्रमुख वक्ता फादर डाॅक्टर डोमिनीक इमेनुएल, आॅल इंडिया आर्गेनाइजे़शन आॅफ़ इमाम एंड माॅस्क्स के प्रेज़ीडेंट इमाम उमर अहमद इलियासी, जैन मठ मुदाबिदरी के स्वस्ति श्री भट्टारक चारुकीर्ति पंडित आचार्यवर स्वामीजी, पेरूर अधीनम, इल्यापट्टम तव तिरूमरुथाचल आदीगलर, सिरवई अधीनम तव तिरू कुमारगुरु परा आदीगलर, गौमारा मठ, मैसूर के रामकृष्ण मठ से स्वामी मुक्तिदानंद, बाइलाकुप्पे के सेरा लाची बौद्ध मठ से गेशे नगवांगजुग्ने, चिन्मय मिशन से स्वामी शिवयोगानंद तथा ब्रह्मकुमारी, सिक्ख धर्म व इस्काॅन से आए प्रतिनिधि शामिल थे।