3 सितम्बर से शुरू होगा राष्ट्रव्यापी आन्दोलन – युवाओं जुड़ो सत्य से!

3 सितंबर से सद्‌गुरु देश भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में युवाओं के साथ बातचीत करेंगे जहां युवा अपनी पसंद के किसी भी विषय पर उनसे प्रश्न पूछ सकते हैं, इसमें कोई प्रतिबंध नहीं होगा। सद्‌गुरु इसे ‘यूथ एंड ट्रुथ’ (युवाओं जुड़ो सत्य से) आंदोलन का नाम दे रहे हैं।
युवाओं जुड़ो सत्य से!
 

प्रश्न: किसी देश की प्रेरक शक्ति युवाओं के हाथ में होती है। आज उनके दैनिक जीवन में एक रोल मॉडल की कमी है। युवा परेशान हैं, निराश हैं, उनके पास नौकरियां नहीं हैं। ऐसे में युवाओं को आप क्या सलाह देना चाहेंगे?

सद्‌गुरु: युवा का अर्थ है, तैयार हो रही मानवता। इनमें तैयार हो चुकी मानवता जैसा घमंड नहीं होता, इसलिए उनके पास अब भी दुनिया में एक नई संभावना पैदा करने का एक मौका होता है। लेकिन अगर पुरानी पीढ़ी खुद में कोई बदलाव लाना न चाहे, तो युवाओं से कुछ चमत्‍कार करने की उम्‍मीद करना बेकार है। आम तौर पर युवाओं की प्रकृति ऐसी होती है कि उनमें ऊर्जा तो अधिक होती है, लेकिन वे प्रतिक्रया भी जल्दी करते हैं। तो अगर पुरानी पीढ़ी इस धरती पर समझदारी से जीने की भावना और प्रेरणा नहीं दिखाती, तो युवा हमसे भी खराब उदाहरण रखेंगे। यह बहुत महत्‍वपूर्ण है कि आपकी उम्र चाहे जो भी हो, आप गर्मजोशी दिखाएं और उन्‍हें बताएं कि वे बदलाव ला सकते हैं।

युवाओं पर निर्भर हैं हमारे देश की संभावनाएं

भारत की 50 फीसदी से ज्यादा आबादी युवा है। आधा अरब अस्‍वस्‍थ, अस्थिर, अनट्रेंड युवा किसी तबाही का कारण बन सकते हैं। मगर यही आधा अरब युवा एक जबर्दस्‍त संभावना बन सकता है, अगर वे सेहतमंद, ट्रेंड और किसी लक्ष्‍य पर फ़ोकस्ड हों।

हम युवाओं को किस तरह आगे बढ़ाते हैं, इससे यह तय होगा कि हम इस संभावना का पूरा इस्‍तेमाल कर पाते हैं या नहीं।

फिलहाल यह देश एक संभावना की देहरी पर खड़ा है। लोग पीढ़ियों से इसी स्थिति में रहते आ रहे हैं। अब पहली बार हम एक बड़ी आबादी को जीवन जीने के एक स्‍तर से दूसरे पर ले जा सकते हैं।

हम युवाओं को किस तरह आगे बढ़ाते हैं, इससे यह तय होगा कि हम इस संभावना का पूरा इस्‍तेमाल कर पाते हैं या नहीं। वे कितने स्‍वस्‍थ और केंद्रित हैं, कितने प्रशिक्षित और काबिल हैं, इससे तय होगा कि देश किस ओर जाएगा।

3 सितम्बर को शुरू होगा एक राष्ट्रव्यापी आन्दोलन

युवा या तो भारी विनाश कर सकते हैं या अगर उनमें अपनी ऊर्जा को सकारात्‍मक(पॉजिटिव) तथा रचनात्‍मक(क्रिएटिव) तरीके से इस्‍तेमाल करने के लिए जरूरी स्थिरता है तो वे जबर्दस्‍त सृजन(रचना करने) में भी सक्षम हैं। पृथ्‍वी पर युवाओं के साथ जो सबसे महत्‍वपूर्ण चीज़ होनी चाहिए, वो ये है कि उन्‍हें ध्‍यानमय होने की जरूरत है। चाहे वे शिक्षा प्राप्‍त कर रहे हों, वोकेशनल ट्रेनिंग ले रहे हों या वे कोई भी मनचाहा काम कर रहे हों, अगर वे थोड़े अधिक स्थिर होंगे तो वे अपनी ऊर्जा को बेहतर उपयोग में ला सकते हैं। यह उनकी अपनी और दूसरों की खुशहाली के लिए जरूरी है।

इस दिशा में हम ‘यूथ एंड ट्रुथ’ (युवाओं जुड़ो सत्य से!) शुरू करने जा रहे हैं जो हमारे युवाओं को प्रेरित करने और सशक्‍त बनाने के लिए एक राष्‍ट्रव्‍यापी आंदोलन है। यह 3 सितंबर को शुरू होगा। हम अलग-अलग राज्‍यों में बहुत से विश्‍वविद्यालयों(यूनिवर्सिटी) और संस्‍थानों(इंस्टीट्यूशन) के विद्यार्थियों से मिलेंगे और उन्‍हें उनके सामने आने वाली समस्‍याओं के बारे में प्रश्‍न पूछने के लिए आमंत्रित करेंगे। साथ ही उनकी खुशहाली के लिए उन्‍हें सरल तरीके भी सिखाए जाएंगे।

रहस्यदर्शी के साथ होगी ब्रह्माण्डीय स्तर की बातचीत

यह गपशप की तरह होगा। प्राचीन समय से ही जब कोई व्‍यक्ति किसी चीज की सच्‍चाई जानना चाहता था, तो वह हमेशा गॉसिप(गपशप) पर ही भरोसा करता था, न कि आधिकारिक बातों पर। जब अखबार में कोई चीज़ आती है, तो आप उस पर भरोसा नहीं करते, आप इधर-उधर पूछताछ करते हैं। कोई कुछ कहता है, वह सच हो जाता है। इसलिए हमेशा गॉस्‍पेल (अलग-अलग धर्म ग्रन्थ) नहीं, गॉसिप सच को सामने लाता है। गॉसिप बढ़-चढ़कर बहुत फैल जाता है, मगर लोग गॉसिप को सुनकर और छानकर उसमें से सच्‍चाई निकालना सीख जाते हैं।

लोग मुझसे कहते रहते हैं, ‘सद्‌गुरु, अगर मैं पच्‍चीस साल की उम्र में आपसे मिला होता, तो मैं कई सारी चीजें कर सकता था।’ तो मैंने सोचा कि युवाओं के साथ जुड़कर देखते हैं कि हम उन्‍हें सच के कितने करीब ला सकते हैं।

सोशल मीडिया के ईजाद होने के साथ गॉसिप ग्‍लोबल(विश्वव्यापी) हो गया है। अब यह स्‍थानीय गॉसिप नहीं रहा है। तो मैंने सोचा कि इसे अगले स्‍तर तक बढ़ाना चाहिए। जब आप रहस्‍यवादी के साथ गपशप करते हैं, तो आपकी गॉसिप ब्रह्मांडीय हो जाती है।

लोग मुझसे कहते रहते हैं, ‘सद्‌गुरु, अगर मैं पच्‍चीस साल की उम्र में आपसे मिला होता, तो मैं कई सारी चीजें कर सकता था।’ तो मैंने सोचा कि युवाओं के साथ जुड़कर देखते हैं कि हम उन्‍हें सच के कितने करीब ला सकते हैं।

जीवन थोड़ा टेढ़ा-मेढ़ा रास्‍ता है, मगर सच्‍चाई एक सीधी रेखा की तरह है। सवाल बस यह है कि आप सच्‍चाई के कितने करीब हैं? आप दिन में या अपने जीवन में कितनी बार उसे छू पाते हैं? यह आपके जीवन की गुणवत्‍ता, संतुष्टि और गहनता को तय करता है। हर बार उसे छूने पर आपके भीतर कुछ असाधारण होगा जो आपको आगे बढ़ाता रहेगा।

संपादक का नोट : चाहे आप एक विवादास्पद प्रश्न से जूझ रहे हों, एक गलत माने जाने वाले विषय के बारे में परेशान महसूस कर रहे हों, या आपके भीतर ऐसा प्रश्न हो जिसका कोई भी जवाब देने को तैयार न हो, उस प्रश्न को पूछने का यही मौक़ा है! - unplugwithsadhguru.org

 
 
 
 
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