सद्‌गुरु श्री ब्रह्मा

सद्‌गुरु, सद्‌गुरु श्री ब्रह्मा के बारे में बता रहे हैं, जो कि एक अद्भुत प्राणी थे और जिन्होंने अपना शरीर सातों चक्रों से छोड़ा।.
 
 

सद्गुरु: सद्गुरु श्री ब्रह्मा कोई भले आदमी नहीं थे। वह कभी किसी को नाम से नहीं बुलाते थे। बस वह कहते थे – ‘ऐ’। सभी के लिए ‘ऐ’ ही एक नाम था। वह जैसे थे, उसकी वजह से लोग उनसे डरते थे। मगर साथ ही, वे उनसे बहुत प्यार भी करते थे। यही अंतर्विरोधों की सुंदरता है।

सद्गुरु श्री ब्रह्मा आग की तरह थे, हर समय प्रज्वलित

वे सद्गुरु से प्यार इसलिए नहीं करते थे क्योंकि वह उनके साथ अच्छा बर्ताव करते थे। वे इसलिए उन्हें प्यार करते थे क्योंकि वे उन्हें प्यार किए बिना रह ही नहीं सकते थे। हजारों लोग उनकी ओर खिंचे चले आते थे। उन्होंने छोटे समय में तमिलनाडु में 70 संस्थाएं स्थापित कीं। वह ज्यादातर समय घूमते रहते थे और एक जगह बहुत कम टिकते थे। मगर वह जहां भी जाते थे, लोग उन्हें जमीन और बाकी चीजें देते थे ताकि वह संस्थान बना सकें। वे ऐसा इसलिए करते थे क्योंकि वे उन्हें प्यार किए बिना नहीं रह सकते थे, इसलिए नहीं कि उनका बर्ताव अच्छा था।

सेवेंथ हिल (सातवीं पहाड़ी) की ऊर्जा काफी अलग ,है क्योंकि सद्गुरु श्री ब्रह्मा ने अपना शरीर वहां छोड़ा था। जीवन में उनका एकमात्र ध्येय ध्यानलिंग की प्राण प्रतिष्ठा थी। मगर अपनी सारी अंदरूनी क्षमताओं के बावजूद, उनमें सामाजिक व्यवहार की कमी ने इस परियोजना को पूरा नहीं होने दिया। समाज उनके विरुद्ध हो गया और उन्हें ऐसा नहीं करने दिया। जब ऐसा हुआ, तो उन्होंने देखना चाहा कि यह परियोजना क्यों विफल हुई, कि क्या उनकी ऊर्जा प्रणाली में कुछ गड़बड़ थी। ऐसा करने के लिए, उन्होंने सातों चक्रों से अपना शरीर छोड़ा।

यह बात सभी पर लागू होती है। अगर आपके जीवन में कोई चीज कारगर नहीं हो रही है, तो सबसे पहले खुद को जांचें कि कहीं आपके अंदर कोई गड़बड़ी तो नहीं है। ज्यादातर इंसानों के साथ यह समस्या है कि अगर कोई असफलता मिलती है, तो सबसे पहले वे किसी और को दोषी ठहराते हैं। आपको पहले अपने आपको देखना चाहिए। अपने जीवन के हर पहलू पर पूरा ध्यान दीजिए और फिर सोचिए कि यह काम सफल क्यों नहीं हुआ। हो सकता है कि आपके अंदर कोई कमी हो। इसे जांचने और यह पक्का करने के बाद कि आपके अंदर सब कुछ ठीक है, फिर आपको देखना चाहिए कि काम को खराब करने वाली कोई और वजह तो नहीं है।.

सद्गुरु श्री ब्रह्मा के पास बहुत सी शक्तियां थीं और वह लगभग चामत्कारिक तरीके से जिए। आपने उनके बहुत से चमत्कारों के बारे में सुना होगा, जैसे जेल के बंद दरवाजे से निकल जाना या किसी लड़के को झील पर चलवाना। ऐसी चीजें उनके आस-पास रोज होती थीं। लोग उन्हें भगवान की तरह देखते थे, मगर उनसे डरते भी थे क्योंकि वह हमेशा गुस्से में ही लगते थे। वह किसी से क्रोधित नहीं थे, बस उनके अंदर प्रचंड तीव्रता थी। सद्गुरु श्री ब्रह्मा आग की तरह थे, हर समय प्रज्वलित।

यह वेल्लिंगिरी पर्वत दुनिया के दुर्लभतम जगहों में से एक है, आपको इस तरह की ऊर्जा कहीं और नहीं मिलेगी।

जब वह आखिरी बार सेवेंथ हिल पर गए, उससे ठीक पहले जब लोग उनके आस-पास इकट्ठा हुए, तो वह बोले, ‘यह जीव फिर वापस आएगा।’ जो व्यक्ति सातों चक्रों से अपना शरीर छोड़ता है, उसे चक्रेश्वर कहा जाता है। इसका मतलब है कि उसे अपनी ऊर्जा प्रणाली पर पूरा अधिकार प्राप्त है। आज भी, लगभग सत्तर साल बाद भी, वहां की ऊर्जा जीवंत है, जैसे कि यह घटना कल ही हुई हो। वह ऊर्जा इतनी तीव्र है कि आपको उड़ा डालती है।

इस बार, हमारी सामाजिक योग्यता बेहतर हुई है। मैंने जानबूझकर खुद को उस हद तक सभ्य बना लिया है, जितना समाज में काम करने के लिए जरूरी है। आज, हमारे पास सामाजिक व्यवहार का कौशल है, जिसकी तब हमारे पास कमी थी। उनके अंदर ऊर्जा की जो तीव्रता थी, उसके कारण उन्हें दूसरी चीजें महत्वपूर्ण नहीं लगती थीं। उनके ख्याल से समाज के दूसरे लोग क्या सोचते हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मगर अज्ञानता की शक्ति को कम करके मत आंकिए। ज्ञान में शक्ति होती है, मगर अज्ञानता में जबर्दस्त शक्ति होती है।

दुनिया में बहुत सी चीजें लोगों की अज्ञानता की वजह से आगे नहीं बढ़ पातीं। चाहे आप कितनी भी कोशिश कर लें, अज्ञानता किसी लंगर की तरह है, वह बड़े से बड़े जहाज को हिलने नहीं देगा। इस बार मैंने शुरू से ही अज्ञानियों पर ध्यान दिया, अज्ञानता को पूरा सम्मान दिया। वह अज्ञानता को हिकारत की नजर से देखते थे। अगर कोई व्यक्ति कुछ मूर्खतापूर्ण कहता था, तो वह उसे भगा देते थे। वे लोकतंत्र की प्रक्रिया को नहीं समझते थे। बहुसंख्यक आबादी हमेशा अज्ञानी होती है और उनके पास शक्ति होती है।

उन्होंने इसे अनदेखा कर दिया क्योंकि उन्हें लगता था कि ऊर्जा की ऐसी तीव्रता से कुछ भी संभव है। और जब काम नहीं बना, तो उन्होंने जांचने की कोशिश की कि क्या उनकी ऊर्जा में उतनी ताकत नहीं थी। इसलिए उन्होंने सातों चक्रों से शरीर छोड़ा, जो कि बहुत विरले देखने को मिलता है। वेलंगिरि पर्वत दुनिया के सबसे विरले स्थानों में से एक है, ऐसी ऊर्जा का अनुभव आपको कहीं और नहीं हो सकता।