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विश्व जल दिवस 2018 पर विशेष लॉन्च के लिए संयुक्त राष्ट्र में सद्गुरु

नदी अभियान संयुक्त राष्ट्र पहुँचा

नदी अभियान का नेतृत्व करने के बाद, जो अब मानवता के इतिहास में सबसे बड़ा जनता का समर्थन पाने वाला पर्यावरणीय आंदोलन माना जाता है, मार्च 2018 में सद्‌गुरु को संयुक्त राष्ट्र की अंतर्राष्ट्रीय दशकीय योजना: सतत विकास के लिए पानी (वॉटर फॉर सस्टेनेबल ग्रोथ)2018-2028 के लॉन्च के लिए आमंत्रित किया गया था। सद्‌गुरु को इस विषय पर एक पैनलिस्ट के रूप में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था – “पानी से संबंधित सतत विकास लक्ष्यों (एस.डी.जी.) को लागू करने में जल दशक का योगदान: चुनौतियों का निवारण, और सहयोग एवं साझेदारी को मजबूत करने के अवसर”

नदी अभियान ने न केवल भारत में अभूतपूर्व रूप से जनता का समर्थन प्राप्त करके अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया है, बल्कि इसलिए भी क्योंकि नदियों का सूखना और खेती योग्य भूमि का तेज़ी से कम होना ऐसी चुनौतियां हैं जिन पर पूरे विश्व में चर्चा शुरू हो चुकी है। इस अभियान ने एक ऐसी कार्यवाही योग्य नीति तैयार की है, जो पर्यावरण कल्याण को आर्थिक ज़रूरतों के विरुद्ध खड़ा किए बिना इन चुनौतियों का व्यापक समाधान प्रस्तुत करती है।

पैनल चर्चा में भाग लेते हुए, सद्‌गुरु ने कहा, “भारत ने जिस तरह से नदी अभियान का समर्थन किया है, उसका कारण यही है कि यह एक आर्थिक योजना है। जब तक हम पर्यावरण कार्य को लोगों के लिए एक आकर्षक प्रक्रिया नहीं बनाते हैं, तब तक लोग बड़ी संख्या में इस आंदोलन में कभी शामिल नहीं होंगे।”

अंतर्राष्ट्रीय “डिकेड फॉर एक्शन” के लॉन्च के दौरान संयुक्त राष्ट्र की मुख्य सभा के पैनल द्वारा पानी पर जारी एक वीडियो यह कहता है कि दुनिया की 40% आबादी पानी की कमी से प्रभावित है, और दुनिया का केवल 0.5% पानी ही लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध है। नदियों का पुनर्जीवन भू-जल को पुनः स्थापित करने, मिट्टी को पहले की तरह उपजाऊ बनाने, और जमीन में वर्षा जल सोखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, विशेष रूप से ट्रॉपिकल और सब-ट्रॉपिकल क्षेत्रों में (उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में)। सद्‌गुरु ने कहा, “आप ज़मीन में पानी तभी रोक सकते हैं, जब मिट्टी में आवश्यक जैविक तत्व और वनस्पतियाँ हों”। भारत में बारिश के पानी का नालों में बह जाना जल नष्ट होने का एक प्रमुख कारण है।

25 से अधिक वैज्ञानिकों और शासकीय अधिकारियों की सलाह लेकर नदी अभियान की नीति एवं सिफारिशों को तैयार किया गया है जिसमें जल वैज्ञानिक, भू-जल वैज्ञानिक, वनिकी, कृषि-वनिकी और बागवानी के विशेषज्ञ, किसान उत्पादक संगठन (एफ.पी.ओ.), सिंचाई, कृषि व्यवसाय और कृषि विपणन के विशेषज्ञ, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधक और सरकारी अफसर शामिल हैं, साथ ही साथ खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के विशेषज्ञ, परियोजना वित्तपोषण और सामाजिक व्यवहार के विशेषज्ञ, किसानों की यूनियन और स्वास्थ्य और पोषण के विशेषज्ञ भी शामिल हैं।

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