“मैं चाहता हूं कि दुनिया यह जाने कि योग के जन्मदाता आदियोगी – यानी खुद शिव ही हैं।” – सद्‌गुरु

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“आदियोगी का अस्तित्व सभी धर्मों से पुराना है। ये 112 फीट ऊंचा भव्य चेहरा उनके साधनों की सार्वभौमिकता का उत्सव मनाने के लिए है।” – सद्‌गुरु

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“आदियोगी, एक प्रतीक और एक संभावना हैं। वे उन साधनों के मूलदाता भी हैं जिनसे आप खुद को रूपांतरित करके अपने जीवन को खुद रच सकते हैं।” – सद्‌गुरु

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“आदियोगी का महत्व यह है कि उन्होंने मानव चेतना के विकास के लिए ऐसी विधियां बताई, जो हर काल में प्रासंगिक हैं।” – सद्‌गुरु

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“आदियोगी ने जिस मौलिक ज्ञान की रचना की है, वह ज्ञान धरती की लगभग हर उस चीज का स्रोत है, जिसे आप आध्यात्मिक कह सकते हैं।” – सद्‌गुरु

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“यौगिक संस्कृति में शिव को आदि योगी या पहले योगी, और ज्ञान और मुक्ति के स्रोत की तरह जाना जाता है।
” – सद्‌गुरु

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