Riding the Cycles
In this week's Spot, Sadhguru highlights the cycles one encounters in life, and how we can choose to overcome or ride these cycles. "Most people keep repeating the same cycles in different scenery. The first time some rubbish happened to you, you were in school. The next time it happened, you were in college. The next time it happened, you had a job. The next time, you were married. The scenery is different, but experientially, the same things are happening if you closely observe your life." Enjoy!
 
 
 
 

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Photos from Inner Engineering in Mumbai. Additional photos are available here.

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Most people keep repeating the same cycles in different scenery. The first time some rubbish happened to you, you were in school. The next time it happened, you were in college. The next time it happened, you had a job. The next time, you were married. The scenery is different, but experientially, the same things are happening if you closely observe your life.

If you exist here as just a body, you know where you are going; every second, you are getting closer to the grave. Life will be play, then it becomes pleasure, then it becomes so many things. Then, every joint hurts and one gets terrified because it is coming to an end. For physical life, this is progression; you don’t have to go through it to know it, you have enough intelligence to just sit and see it. But our fortune is we are not just physical, we have other dimensions to us. In terms of your mental status, it can either continue to grow or it can go in cycles. In terms of your emotional status, it can also continue to grow or it can go in cycles. You may not be aware of other dimensions yet, but even there, you can go in cycles or you can go somewhere. When there is a set process, you cannot change things so easily. But when there is a periodic destabilization of the system, there is a great possibility for change.

If you are very balanced, your cycles will happen once in twelve to twelve-and-a-half years. If you are not so balanced, they will happen in a quarter of the time – a little over three years. It could also happen more often, every sixteen to eighteen months, or every three months. The longest cycle is one hundred and forty-four years; this is a Maha Kumbh Mela. I will not go into the whole arithmetic of it because people will complicate things for themselves, but definitely, everything in this system is cyclical; the earth is going in cycles, the moon is going in cycles. If you do not stand up with a certain level of awareness and a certain level of determination, you will naturally become a part of the cycles. These cycles can mean bondage or these cycles can mean transcendence; that from one cycle of life to another, you transcend. Or, you repeat the same cycle.

The difference between astrology and spirituality is just this – astrology is telling you how these cycles bind you. The spiritual process is telling you how you can get away from these cycles. We are not denying the cycles; it would be stupid to deny them, they are definitely there. They are like waves in an ocean, either you can ride them or be thrashed and drowned by them. But we are looking at how you can slip away from them. If you live by being conscious of the cycles, your life will have a certain equanimity, a certain level of success, wellbeing and prosperity. But if you are constantly looking at how to become free from the cycle, you are looking for your liberation. The question is, are you looking for just wellbeing or are you looking for liberation? Accordingly, you must live.

So right now, if your life is going through cycles and repetitiveness, you are not going to reach anywhere; it is time to change the pattern. I want you to observe – is it happening every three months? Once in sixteen to eighteen months? Is it happening once in three-and-a-quarter years, or is it happening once in twelve years? Don’t start imagining all kinds of things, but it is happening whether you are able to notice it or not. It is not just happening with your mental and emotional situations, if you are aware of it, even physical situations around you will repeat themselves. It is so uncanny that even physical situations happen exactly the same way.

So what can you do about your cycles? If they are manifesting every three months, we can push it to eighteen months. If they are manifesting every eighteen months, we can push it to three years, or we can push it to twelve years. Or we can push it to one hundred and forty-four years. Or above all, instead of trying to dodge these cycles, we can ride these cycles.

I have been riding my cycles. I am now approaching my twelve-year cycle. Every time it comes, my life changes and it will change dramatically in the next four to six months. Every time I approach these times there will be a significant presence of a serpent. Shiva’s compassion lest I should forget - this time around, it is a king cobra. Exciting times ahead. Be with me with all your being, do not mess your Destiny. Of course, don’t miss the fun.

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जीवन में अधिकतर लोग एक ही जैसे चक्रों से गुजरते हैं, हालांकि परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं। पहली बार आपके जीवन में कुछ वाहियात तब घटा था, जब आप स्कूल में थे। अगली बार कुछ ऐसा ही तब हुआ, जब आप कॉलेज में पहुंचे। एक बार फिर नैाकरी लगने के बाद आपके साथ कुछ ऐसा ही घटा। फिर कुछ उसी तरह के हालात तब बने, जब आपकी शादी हुई। अगर आप अपने जीवन पर नजदीक से गौर करें तो आप महसूस करेंगे कि भले ही परिस्थितियां हर बार अलग रही हों, लेकिन घटनाक्रम कमोबेश एक जैसा ही था।

अगर आप इस धरती पर एक देह मात्र हैं तो आप जानते हैं कि आप किस तरफ बढ़ रहे हैं? हर पल आप अपनी मृत्यु के नजदीक जा रहे हैं। जीवन को यदि हम खेल समझें तो फिर वह आनंद है। फिर जीवन के कई रूप सामने आ सकते हैं। जब हर जोड़ दुखने लगता है तो इंसान को डर लगने लगता है कि अब अंत निकट आ रहा है। भौतिक जीवन के लिए यह विकास का क्रम है। इसे समझने के लिए आपको इससे गुजरने की जरूरत नहीं है। दरअसल, आप खुद इतने समझदार या बुद्धिमान हैं कि बस इसे आराम से बैठ कर देखिए, चीजें अपने आप साफ हो जाएंगी। लेकिन यह हमारी खुशकिस्मती है कि हम महज एक देह या शरीर नहीं हैं, इससे परे हमारे और भी आयाम हैं। अगर आपकी मानसिक दशा या हालात की बात करें तो या तो यह लगातार विकसित हो सकती है या फिर यह चक्र या दौर में फंस सकती है। इसी तरह आपकी भावनात्मक दशा की बात करें तो या तो यह लगातार विकसित हो सकती है या फिर चक्रों में फंस सकती है। हो सकता है कि अभी आपको दूसरे आयामों की जानकारी न हो, लेकिन वहां भी आप या तो फिर चक्रों में फंस सकते हैं या कहीं और जा सकते हैं। अगर प्रक्रिया निर्धारित हो तो आप चीजों को आसानी से नहीं बदल सकते। लेकिन इस प्रक्रिया में अगर कुछ अंतराल पर अस्थिरता या बाधा आती है तो फिर इसमें बदलाव की संभावना काफी बढ़ जाती है।

अगर आप जीवन में बेहद संतुलित और संयोजित हैं तो यह चक्र आपके जीवन में हर बारह या साढ़े बारह साल पर आएगा। अगर आप उतने संतुलित नहीं हैं तो यह दौर आपके जीवन में इसके चौथाई समय यानी तीन साल या उससे कुछ अधिक समय में आ जाएगा। यह उससे पहले, हर सोलह से अठ्ठारह महीने यहां तक कि हर तीन महीने में भी आ सकता है। इसका सबसे लंबा चक्र एक सौ चवालीस साल का होता है, जो महाकुंभ मेला होता है। मैं इसके और ज्यादा गणित में नही जाऊंगा, वर्ना लोग चीजों को अपने लिए और जटिल बना लेंगे। लेकिन एक बात तय है कि इस पूरी व्यवस्था या प्रणाली में हर चीज चक्रीय है यानी एक चक्र में चलती है। यह पृथ्वी चक्रों में घूम रही है, इसी तरह चंद्रमा भी एक चक्र में घूम रहा है। ऐसे में अगर आप एक खास तरह की जागरूकता और दृढ़निश्चयता के साथ नहीं उठ खड़े होते तो जाहिर है आप भी इस चक्रीय गति का हिस्सा बन जाएंगे। यह चक्र बंधन की वजह भी बन सकते हैं अथवा इन चक्रों से उत्कृष्टता भी पाई जा सकता है, जिसमें आप जीवन के एक चक्र से दूसरे की ओर बढ़ते हैं। या फिर आप उसी चक्र को पुनः दोहराते हैं।

ज्योतिष शास्त्र और आध्यात्मिकता में सिर्फ इतना ही फर्क है कि ज्योतिष में आपको यह बताया जाता है कि कैसे ये चक्र आपको बांधते हैं। जबकि आध्यात्मिकता की प्रक्रिया बताती है कि कैसे आप इन चक्रों से निजात पा सकते हैं। हम चक्रों को नकार नहीं रहे, क्योंकि उन्हें नकारना मूखर्ता होगी। निश्चित रूप से चक्र होते हैं।

दरअसल, जीवन के ये चक्र महासागर की लहरों की तरह होते हैं, जिन पर या तो आप सवार हो जाते हैं या फिर वे आपको पटक कर डुबो देती हैं। लेकिन हम इस पर गौर कर रहे हैं कि कैसे आप इनसे बच कर निकल सकते हैं। अगर आप इन चक्रों के प्रति जागरूक होते हैं तो फिर आपके जीवन में एक खास तरह की समता, खास तरह की सफलता, सुख और समृद्धि आ जाती है। लेकिन अगर आपकी लगातार कोशिश इस बात की है कि कैसे इस चक्र से निजात पाई जाए तो फिर आपकी तलाश मुक्ति की है। सवाल यह है कि आप वाकई क्या चाहते हैं- सिर्फ सुख आराम या फिर मुक्ति? फिर उसी हिसाब से आपको अपना जीवन जीना चाहिए।

इसलिए फिलहाल अगर आपकी जिंदगी चक्रों और उसकी पुनरावृत्तियों या दोहरावों से गुजर रही है तो आप कहीं नहीं पहुंच सकते। यही समय है कि आप अपने ढर्रे या ढांचे को बदलें। मैं चाहता हूं कि आप अपने जीवन के इन चक्रों पर गहराई से गौर करें। देखें कि यह आपके साथ हर तीन महीने में हो रहा है? या फिर हर सोलह से अठ्ठारह महीने में? या फिर हर सवा तीन साल में ऐसा होता है? अथवा यह हर बारह साल में एक बार हो रहा है। अब इतने भर से आप तरह-तरह की कल्पनाएं करना शुरू मत कीजिए, हालांकि यह सच है कि भले ही आप नोटिस कर पाएं या नहीं, लेकिन ये चीजें होती हैं। ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ आपके मानसिक या भावनात्मक परिस्थतियों में होता है, बल्कि अगर आप जागरूक हैं तो पाएंगे कि आपके आसपास की भौतिक परिस्थतियां भी अपने आपको दोहराती हैं। यह इतना विचित्र है कि यहां तक कि भौतिक परिस्थितयां भी हूबहू उसी तरह घटित होती हैं।

सवाल है कि आप अपने चक्रों के बारे में क्या कर सकते हैं? अगर यह हर तीन महीने में सामने आ रहे हैं तो हम इन्हें हर सोलह से अठ्ठारह महीनों की ओर ले जाने का प्रयास कर सकते हैं। अगर यह हर सोलह से अठ्ठारह महीनों में घट रहे हैं तो हम इन्हें खींचकर तीन सालों या बारह सालों की तरफ ले जा सकते हैं। यहां तक कि हम इन्हें एक सौ चवालीस सालों की तरफ खींच सकते हैं। या फिर सबसे महत्वपूर्ण तो यह है कि हम इन चक्रों को चकमा देने की कोशिश करने की बजाय इन पर सवार भी हो सकते हैं।

मैं तो अपने चक्रों की सवारी कर रहा हूं। फिलहाल मैं अपने बाहर साल के चक्र की तरफ बढ़ रहा हूं। मेरे जीवन में जब भी यह दौर आता है, मेरी जिदंगी बदल जाती है। आने वाले चार से छह महीनों में जिंदगी नाटकीय तौर से बदलेगी। हर बार मैं जब भी इस दौर में पहुंचने वाला होता हूं, मेरे जीवन में हमेशा किसी सर्प की महत्वपूर्ण मौजूदगी देखी गई है। भगवान शिव की कृपा है, कदाचित मैं भूल न जाऊं, इस बार यह सर्प किंग कोबरा या नागराज के रूप में सामने आया। आने वाला समय काफी रोमांचक होने जा रहा है। अपनी पूरे वजूद के साथ आप मेरे साथ रहिए, अपनी किस्मत को बर्बाद मत कीजिए। बेशक, आप इसके आनंद को चूकिए नहीं।
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Love & Grace

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  24 Comments
 
 
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6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

It was a wonderful experience at Inner Engineering program at Mumbai.I enjoyed the event fully.I still feel that Sadhguru is around me and I am energized by his blessings.

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

I have been riding my cycles. I am now approaching my twelve-year cycle.
Every time it comes, my life changes and it will change dramatically in
the next four to six months. Every time I approach these times there
will be a significant presence of a serpent. Shiva’s compassion lest I
should forget – this time around, it is a king cobra. Exciting times ahead. Be with me with all your being, do not mess your Destiny. Of course, don’t miss the fun.
WHAT A MAGNANIMITY TO SHARE SUCH TRUTHS WITH US!!!!   ALWAYS GRATEFUL TO YOU SADHGURU JAGGI VASUDEV, BE WITH US TOO, WE'LL REACH THE HEIGHTS KNOW OUR EXISTENTIAL TRUTHS & SPREAD THIS SPIRITUAL WAVE TO EVERY LIVING LIVES 

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

Sadhguru, bless me so that I can cross this hurdle called life with ease and well being. Also help me come out of sense gratification to get liberation.

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

Sadhguru why we fear when you are there....when i think of you tears flows out of ecstasy...
Sadhguru paadham charanam....

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

I attended the Inner Engineering programme conducted by Isha Foundation at BKC, Mumbai; in Dec 2011. I found the experience most humblying and an opportunity to transform my way of perceiving the world around me. I felt calmer, relaxed and at peace with the surroundings. This short two and a half day rejuvenating programme has kindled and commenced a life long chance within me. SUDHIR BEHL

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

My 2 1/2 days program  at BKC Mumbai has been the beginning  of my inner  journey from physical to mental through emotions to energy . I felt I am  with right guide toward my spirtual journey from self awareness to self realisation.  So very grateful for the initiation and felt to be chosen one among masses.

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

Sadhguru - one thing is my head is going in circules. But I have surrendered. Am with you with all my Being. So no mesting with  destiny.

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

Pranam Sadguru, How do i know what is the cycle ?? I think its a 11 year cycle that i have... please guide and bless to see through the cycle and bring peace and contentment of self and family(loved ones)... regards.

6 வருடங்கள் 4 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

Sadhguruvai nambinor kai vida padaar........... 

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

I don't understand this! Give some examples please.

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

Wonderful post and wise words for growth.

Love, Light & Aliveness,
Co-Visionary of www.PlantPoweredLiving

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

Oh my god.. I surrendered in the first paragraph itself...I think i am in very short cycle.. i wants to ride on the wave..not to sink..and i wants to rise..and i too excited to be with u in couple of days.. dear jaggi..!

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

Let me love you more and more...until I am worthy of union with you...

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

I agree Guru

my cycle is every 1 year.

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

Namaskaram Sadhguru,
How do we "ride" these cycles?
I am looking for things beyond wellbeing... 

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

Sadhguru,
Stability, Clarity, Perception above all awareness ...  all these are still just letters and words.. cannot express..anything in words. Your grace, your life just so that we can flower .. all the love for you sadhguru do not know what else...I am still a stupid

Shiva Shambho...

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

Just a little word Sadhguru to tell you how very grateful I am for your grace flowing in my life. I recently came back from the Shoonya program at the Tennessee ashram after having completed the Shambavi last October in LA. Shoonya program was absolutely Divine and so powerful! I am in awe. You were not with us physical, yet you were with us. Tears of love, joy and gratitude are shed for you master. 

I have been awaking up easily every day since the program around 6 Am to do my sadhana, which was absolutely impossible before the program because of this lingering and draining adrenal fatigue I had since my cancer journey four years ago. It is gone for forever!!!

I bow to you, and I am with you 100% with all my being. I feel you deep in my heart, and the Divine throb in every particles of my being. What a precious gift you are to the world! 

Om shanti shanti om, Vivi, your blossoming flower, 

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

  Pranams Sadhguru, I'm sure I don't clearly understand what these cycles are! but am 100% sure that I can ride my cycles with ease only with your guidance and blessings.

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

Dear Sadhguru... wave riding... I have heard the term before and I have always liked the image... What really opens me full in trust is what I can perceive how these body tools have inspired and manifested so much love and life around you... So I have just taken the IE course in Mumbai in such cycle circumstances, some twelve, some three years ones I guess. I am joyfully taking the ride creating blissfull and lifeweaving patterns with you and all the wonderful people who helped me find you and make your teachings available worldwide and supported unclattering my spaces so that I could make you out inside me... taking care of this wonderful space of your ashram to which Isha volunteer Sugukumar took me on a ride - motorbike - first time in decades... Going for it! Blessings from all my heart for the journey Sandra

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

Be with me with all your being, do not mess your DestinyAm Being With You Sadhguru!
Saranadaindhaen Sadhguru naadha!

Anbudan,
Sudha

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

Amazing this Sadhguru's Spot. I feel like it was written to me. As I am just going through a cycle. I have been wondering why this is all repeating itself. I have been feeling like I am not doing my practices correctly because I am back where I was three years ago, when I came to Isha. Now, what should one do to push it to twelve years? Thank you Sadhguru!

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

The difference between astrology and spirituality is just this – astrology is telling you how these cycles bind you. The spiritual process is telling you how you can get away from these cycles.Wonderfully said

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

Dear sadhguru , i am always living with you,not closer by distance but you are always in me.
s.lakshmipriya

6 வருடங்கள் 6 மாதங்கள் க்கு முன்னர்

Sadhguru, yes these cycles have become an integral part of my life. please give me strength to tide over these cycles