शिवांग साधना पुरुषों के लिए

कोरोना प्रतिबंधों के कारण, अब दीक्षा और समापन ऑनलाइन प्रदान किया जा रहा है.
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साधना के बारे में
शिवांग साधना आपमें यह जागरूकता लाने का एक साधन है कि आप शिव के एक अंग हैं, वे शिव जो सृष्टि का मूल स्रोत और परम संभावना हैं | - सद्गुरु
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शिवांग साधना के बारे में
 
पुरुषों के लिए शिवांग साधना 42 दिनों का एक शक्तिशाली व्रत है। सद्गुरु द्वारा दी गई यह साधना ध्यानलिंग की ऊर्जाओं के लिए एक व्यक्ति की ग्रहणशीलता को बढ़ाती है, और व्यक्ति को शरीर, मन और ऊर्जा के गहरे स्तरों को अनुभव करने का अवसर देती है।
यह साधना अपने भीतर की भक्ति को सामने लाने का एक अवसर है। शिवांग का अर्थ है "शिव का एक अंग", और शिवांग साधना एक अवसर है जिससे हम सृष्टि के स्रोत के साथ अपने संबंध को अपनी जागरूकता में ला सकते हैं। यह साधना पवित्र वेलियंगिरी पर्वत की तीर्थयात्रा करने और शिव नमस्कार, जो एक शक्तिशाली अभ्यास है, में दीक्षित होने का एक अवसर है।
शिव के लिंब बनो
 
शिव का एक अंग बनें
 
  • 42 दिनों का एक शक्तिशाली व्रत
  • पवित्र “शिव नमस्कार” प्रक्रिया में दीक्षा
  • "दक्षिण के कैलाश" के रूप में जाने जाने वाले वेलियांगिरी पर्वत की तीर्थयात्रा
  • भीतरी खोज के लिए एक मजबूत शारीरिक और मानसिक आधार प्रदान करता है

 

वेलियांगिरी के बारे में
 
वेलियांगिरी के बारे में
 
वेलियांगिरी पर्वत को ‘थन्कैलायम’ या ‘दक्षिण का कैलाश’ के नाम से भी जाना जाता है - एक ऐसा स्थान जहाँ आदियोगी शिव ने स्वयं कुछ समय बिताया था। सदियों से, कई सिद्धों और द्रष्टाओं ने इन पहाड़ों में अपनी ऊर्जा और कृपा को प्रस्थापित किया है, जिन्हें आज भी प्राप्त किया जा सकता है। हर साल, लाखों भक्त वेलियांगिरी के पवित्र सातवें पर्वत की तीर्थ यात्रा करते हैं, जो अत्यधिक शक्ति और ऊर्जा का स्थान है।

 

 

तीर्थयात्रा क्यों?
 
तीर्थयात्रा का महत्त्व
 
सद्गुरु: यात्रा, सफ़र और तीर्थ यात्रा में क्या अंतर है? लोग कई कारणों से एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं। ऐसे खोजी हैं जो हमेशा नयी जगहों  की तलाश में रहते हैं जिसपे वे अपना पदचिह्न लगाना चाहते हैं। वे कुछ साबित करना चाहते हैं। ऐसे यात्री हैं जो सब कुछ देखने के लिए उत्सुक हैं, इसलिए वे यात्रा करते हैं। ऐसे पर्यटक हैं जो बस आराम करने जाते हैं। अन्य प्रकार के पर्यटक हैं जो सिर्फ अपने काम या परिवार से बचने के लिए जाते हैं। लेकिन तीर्थयात्री इनमें से किसी भी उद्देश्य के लिए नहीं जा रहे हैं। तीर्थ यात्रा खोज नहीं है, यह समर्पण है। यह खुद को रास्ते से हटाने का एक तरीका है | अगर आप हटते नहीं हैं, तो यह अपने आपको  व्यय करने का एक तरीका है। आपके बारे में हर वो चीज़ जो सीमित एवं बाध्यकर है उसे नष्ट करने की, और चेतना की एक असीम अवस्था तक पहुंचने की एक प्रक्रिया ह
अधिक पढ़ें… ( लोग तीर्थ यात्राओं पर क्यों जाते हैं? )
साधना तिथि
 
साधना की तिथि
 
यह साधना पुरुषों के लिए उपलब्ध है। यह 42-दिवसीय व्रत पूर्णिमा से शुरू होता है और शिवरात्रि पर समाप्त होता है| इसका समापन ध्यानलिंग को अर्पण और सुंदर वेलियांगिरी पर्वत की चोटियों की यात्रा किए जाने पर होता है।
नोट: दीक्षा और समापन ऑनलाइन आयोजित किए जाएंगे। ध्यानलिंग में समापन और वेल्लिंगिरी पर्वत की यात्रा – ये दोनों वैकल्पिक हैं।
दीक्षा
समापन की तारीख
यात्रा की तारीख
27 फरवरी
10 अप्रैल
11 अप्रैल
28 मार्च(पान्गुनी उतिरम)
9 मई
10 मई
26 अप्रैल
8 जून
9 जून
26 मई
8 जुलाई
9 जुलाई
24 जून(ध्यानलिंग प्राण-प्रतिष्ठा दिवस, 22 वां वर्ष)
6 अगस्त
7 अगस्त
23 जुलाई
5 सितम्बर
6 सितम्बर

 

पुरुषों के लिए साधना दिशानिर्देश:

अंग्रेजी, हिंदी, मलयालम, कन्नड़, तमिल, और तेलुगु

पुरुषों के लिए साधना दिशानिर्देश:

  • साधना पूर्णिमा (पूर्णिमा के दिन) से शुरू होती है और 42 दिन बाद शिवरात्रि (अमावस्या से एक दिन पहले) पर समाप्त होती है।
  • शिवांगों को शिव नमस्कार अभ्यास और उपयुक्त मंत्रों में दीक्षित किया जाएगा।
  • शिव नमस्कार खाली पेट की स्थिति में दिन में 21 बार, सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद किया जाना चाहिए। इसे पूरी भक्ति के साथ किया जाना चाहिए।
  • शिवरात्रि पर कोयंबटूर में शिवांगों का ध्यानलिंग में आना वैकल्पिक है।
  • शावर / स्नान दिन में दो बार लेना चाहिए। साबुन के बजाय हर्बल स्नान पाउडर (स्नानमपोडी) का उपयोग किया जा सकता है।
  • भिक्षा कम से कम 21 लोगों से प्राप्त की जानी चाहिए। (वैकल्पिक)
  • व्रत की अवधि के दौरान, धूम्रपान, शराब का सेवन और मांसाहारी भोजन खाने की अनुमति नहीं है।
  • दिन में केवल 2 बार भोजन किया जा सकता है। पहला भोजन दोपहर 12 बजे के बाद होना चाहिए।
  • साधना काल के दौरान सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहने जा सकते हैं।
  • साधना के लिए शिवांग किट की आवश्यकता होती है। आप इस किट को ईशा लाइफ से मंगवा सकते हैं।
वहाँ कैसे पहुँचें
 
ईशा योग केंद्र तक पहुँचने के सुझाव
 

ईशा योग केंद्र, कोयंबटूर के पश्चिम में 30 किलोमीटर (20 मील) की दूरी पर वेल्लियांगिरी पर्वत की तलहटी में स्थित है, जो नीलगिरी बायोस्फीयर का हिस्सा है। दक्षिणी भारत का एक प्रमुख औद्योगिक शहर कोयंबटूर, हवाई, रेल और सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। प्रमुख एयरलाइंस चेन्नई, दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर से कोयम्बटूर के लिए नियमित उड़ानें भरती हैं। भारत के सभी प्रमुख शहरों से ट्रेन सेवाएं उपलब्ध हैं। कोयंबटूर से ईशा योग केंद्र के लिए भी बस और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं।

सीधी बसें कोयंबटूर और योग केंद्र के बीच दैनिक उपलब्ध हैं: बस समय सारणी देखें

टैक्सी उपलब्ध हैं – अगर आप ईशा योग केंद्र के लिए टैक्सी बुक करना चाहते हैं, तो कृपया हमारी यात्रा सेवा से संपर्क करें 09442615436, 0422-2515430 या 0422-2515429 पर। डेस्क 24 घंटे खुला रहता है।

Ph: +91 8300083111 

ड्राइविंग निर्देश - कोयंबटूर में उक्कादम से पेरूर/सिरुवानी रोड लें। रास्ते में आलान्दुरई पड़ेगा, इरुतुपल्लम जंक्शन पर दाएं मुड़ें। योग केंद्र जंक्शन (इरुतुपल्लम) से 8 किमी दूर है और इसी सड़क पर स्थित पूंडी मंदिर से लगभग 2 किमी पहले पड़ता है। रास्ते में ध्यानलिंग मंदिर के लिए साइनबोर्ड भी मौजूद हैं।

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