कोई कैसे जाने कि वह योग के लिए तैयार है
अगर आपको अपने जीवन को सुंदर बनाना है तो इसके लिए आपको अपने भीतर काम करना होगा, इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं है।
 
कोई कैसे जाने कि वह योग के लिए तैयार है
 

क्या आप जानते हैं कि जब पतंजलि ने योग सूत्र लिखा तो उनका पहला सूत्र आधे वाक्य का था? वह वाक्य था - ‘अथ योगानुशासनम्’, यानी ‘ अब योग का अनुशासन ’, दूसरे शब्दों में ‘अब योग’। उनका मतलब था कि जब आप अपनी बेहतरी के लिए अपने जीवन में हर चीज आजमाकर देख चुके होते हैं और यह समझ चुके होते हैं कि कुछ भी आपको स्थाई खुशी नहीं दे सकता, तो... अब योग।

अगर आपको अपनी जिंदगी में कुछ जबरदस्त और थोड़ा बेहतर महसूस करना है, तो आपको अपने भीतर ही काम करना होगा।
आपने पैसा कमाने, ऐशोआराम पाने, खुशी पाने सहित सब कुछ करने की कोशिश की होगी। इनमें से हर चीज ने आपको कुछ पल के लिए खुशी दी भी होगी, फिर इन सबमें आपको एक समस्या सी नजर आने लगी होगी। आपको लगा होगा कि नौकरी मिलने के बाद आपका जीवन बेहतर हो जाएगा। हालांकि शुरू में ऐसा हुआ भी होगा। फिर? आपको लगा था कि शादी के बाद सारी चीजें बेहद शानदार हो उठेंगी और हुई भी होंगी। आपने जो कुछ भी किया, उसने कुछ समय तक तो काम किया, लेकिन उसके बाद हर चीज में एक समस्या आ गई। अगर आपको इस बात अहसास हो गया है किये सारी चीजें कुछ समय के लिए तो ठीक हैं, लेकिन आखिरकार वो कारगर साबित नहीं होतीं, तो आप सोच सकते हैं कि - ‘अब योग’। इसका मतलब है कि आपको यह समझ में आ गया कि आपके लिए केवल एक ही चीज सही मायने में काम कर सकती है और वह है - अपने भीतर काम करना। अगर आपको अपने जीवन को सुंदर बनाना है तो इसके लिए आपको अपने भीतर काम करना होगा, इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं है।

आप अपने करियर पर मेहनत करते हैं तो आपके आर्थिक हालात सुधर सकते हैं। अगर आप अपने पारिवारिक पहलू पर ध्यान देते हैं तो आपके आसपास का माहौल सुधर सकता है, आपकी सामाजिक स्थिति बेहतर हो सकती है, लेकिन आपका जीवन नहीं सुधरेगा। अगर आपको अपनी जिंदगी में कुछ जबरदस्त और थोड़ा बेहतर महसूस करना है, तो आपको अपने भीतर ही काम करना होगा। ऐसे में ‘अथ योगानुशासनम्’ के अलावा, किसी और चीज से बात नहीं बनेगी।

जब आप योग का जिक्र करते हैं तो अधिकांश लोगों के लिए इसका मतलब कुछ मुश्किल सी शारीरिक मुद्राएं होती हैं। योग का मतलब शरीर को तोडऩा-मरोडऩा या सिर के बल खड़ा होना नहीं है। योग महज शारीरिक कसरत नहीं है। यह तो एक तकनीक है जो आपको उस परम मुकाम तक पहुंचा सकती है, जहां एक इंसान पहुंच सकता है। योग का शाब्दिक अर्थ है- जुड़ाव या मिलन। जब आप सृष्टि की हर चीज के साथ एक होने लगते हैं, तो यही योग होता है। अब सवाल उठता है कि कैसे सारी चीजें एक हो सकती हैं?

योग एक प्राचीन विज्ञान है जो आपको जीवन पर संपूर्ण महारत हासिल करना सिखाता है।
फिलहाल, दो चीजें हैं - एक को आप ‘मैं’ कहते हैं और दूसरी को ‘तुम’ कहते हैं। इस ‘मैं’ और ‘तुम’ की सोच का फैलाव एक समुदाय या एक देश के स्तर तक हो सकता है। लेकिन बुनियादी तौर पर यह ‘मैं’ और ‘तुम’ की सोच ही इस दुनिया की सभी तरह के संघर्षों और टकराव की वजह है। आप किसे ‘मैं’, और किसे ‘मैं’ से अलग समझते हैं? फिलहाल, आपके अनुभव में ऐसी कौन सी चीजें हैं जिन्हें आप ‘मेरा’ समझते हैं? जिसे आप ‘मैं’ या ‘मेरा’ कहते हैं वह है - आपका शरीर, आपका मन, जिसमें आपके विचार और आपकी भावनाएं भी शामिल हैं और आपकी ऊर्जा। हो सकता है कि आपकी ऊर्जा आपके अनुभव में न हो पर आप आसानी से यह अनुमान लगा सकते हैं कि जिस तरह आपका मन और शरीर काम कर रहा है, उसके लिए जरुर कोई ऊर्जा होगी जो इनको अपना काम करने की क्षमता देती होगी। तो यही तीन वास्तविकताएं हैं, जिनके साथ आप कुछ कर सकते हैं - शरीर, मन, और ऊर्जा। योग या आध्यात्मिक प्रक्रिया का कुल मकसद यही है कि आपको एक ऐसे अनुभव तक ले जाया जाए जहां आपके लिए ‘मैं’ और ‘तुम’ जैसी कोई चीज न रह जाए। या तो सब कुछ ‘मैं’ बन जाए या फिर सब कुछ ‘तुम’ हो जाए। और यह अनुभव बाहर नहीं अपने अंदर ही किया जा सकता है। और इसके लिए आपको अपने शरीर, मन, और ऊर्जा पर काम करना होगा। योग एक प्राचीन विज्ञान है जो आपको जीवन पर संपूर्ण महारत हासिल करना सिखाता है। इसके जरिए न सिर्फ आप मनचाहे तरीके से अपना जीवन रच सकते हैं, बल्कि अपने जीवन, मृत्यु व पुनर्जन्म की प्रक्रिया को भी तय करने के काबिल हो जाते हैं।

 
 
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