यक्ष का आनंद और उल्लास
इस हफ्ते के स्पॉट में, सद्‌गुरु ईशा योग केंद्र में होने वाली रोमांचक गतिविधियों के बारे में बता रहे है - जिनमे यक्ष उत्सव भी शामिल है। "शास्त्रीय नृत्यों में विचारों व भावनाओं की बारीकियों को जिस तरह से शामिल किया जाता है...
 
Yaksha -music and dance festival
 
 
 

इस हफ्ते आश्रम में सम्यमा का आयोजन हुआ। यह एक शानदार हफ्ता था। इतनी बड़ी तादाद में लोगों द्वारा अपनी सीमाओं से बाहर आने की जबर्दस्त  कोशिश वाकई सराहनीय और संतोषजनक थी। सम्यमा के साथ एक महत्वपूर्ण बात है कि अगर इसके लिए जरूरी साधना न की जाए, तो यह व्यक्ति के शरीर पर भारी भी पड़ सकता है। आदि योगी आलयम उत्साही और लक्ष्य की ओर केंद्रित साधकों से पूरी तरह से भरा हुआ था। उनमें से बहुत से साधक सही मायनों में अपनी उच्च अवस्था में पहुंच रहे थे। हालांकि सम्यमा प्रोग्राम में यह परंपरा रही है कि इसमें कई प्रतिभागी बार-बार हिस्सा लेते हैं। लेकिन इस बार ऐसे प्रतिभागियों को कार्यक्रम में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं थी, जो पहले सम्यमा कर चुके हैं।

सम्यमाइस बार के सम्यमा में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागी पहली बार हिस्सा ले रहे थे। कार्यक्रम में जिस तरह से स्वयंसेवियों ने अपना योगदान दिया, उनकी भागीदारी ने हर किसी को प्रभावित किया। कार्यक्रम का समापन दिल छू लेने वाला रहा और उसके तुरंत बाद हुई यक्ष की उल्लासमयी शुरुआत। इस हफ्ते नृत्य और संगीत के कुछ शानदार कार्यक्रम होने वाले हैं। इतना ही नहीं, यक्ष के साथ ही एक दूसरा कार्यक्रम ‘इनर वे’ भी चल रहा है।

बीती शाम ओडिसी नृत्यांगना सुश्री माधवी मुदगल ने एक बेहतरीन नृत्य पेश किया, जिसमें उन्होंने पारंपरिक शास्त्रीय नृत्य के बहुत सारे प्रसंगों का बेहद खूबसूरत व भावपूर्ण प्रदर्शन किया। शास्त्रीय नृत्यों में विचारों व भावनाओं की बारीकियों को जिस तरह से शामिल किया जाता है, वह वाकई सब को प्रभावित करता है। हिंदुस्तानी संस्कृति की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि इसमें विचारों और भावनाओं का बेहतरीन मेल है।

 जितना जरूरी विचारों की शुद्धि है, उतना ही महत्वपूर्ण भावनाओं की शुद्धि भी है।
यहां दोनों को एक दूसरे से अलग नहीं किया जाता। आम तौर पर, आज के समाजों में केवल विचार के स्तर पर ही कुशलता देखने को मिलती है, जिसकी वजह से जीवन शुष्क हो जाता है। जितना जरूरी विचारों की शुद्धि है, उतना ही महत्वपूर्ण भावनाओं की शुद्धि भी है। योगिक क्रिया सिर्फ विचार व भावनाओं को ही नहीं, बल्कि शरीर और ऊर्जा को भी विशुद्ध करती है और इंसान को इस तरह तैयार करती है कि जिससे वह चैतन्य को अनुभव कर सके। ईशा की लगातार कोशिश रही है कि यह संभावना सभी को भेंट किया जाए। मेरी यह खवाइश है कि यह संभावना आप सभी के जीवन में एक सच्चाई बने।

लगभग आधी रात होने को आई, लेकिन अभी भी करने को कई काम बचे हैं। अब से कुछ ही देर में मैनचेस्टर यूनाइटेड और रीयल मैड्रिड की टीम आपस में भिड़ने वाली हैं। अब मुझे फुटबॉल के खेल का आनंद लेने दीजिए। इस मैच में फुटबॉल की दो अलग तरह की शैलियों का टकराव देखने को मिलेगा।

Love & Grace

 
 
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