विवाह: वर, वधु के लिए सद्‌गुरु का तोहफा
भारत में हमेशा से ही शादियों में बहुत सारी रस्में निभाई जाती रही हैं। शादी के अग्नि-कुंड से लेकर इस्तेमाल की जाने वाली तमाम चीज़ें - जैसे की जल, घी, इत्यादि एक स्थापित रिवाज की तरह है। क्या है इन रिवाजों का लक्ष्य... बता रहे हैं सद्‌गुरु, और साथ ही भेंट कर रहे हैं एक ऐसी ही विधि ..
 
 
 
 

भारत में हमेशा से ही शादियों में बहुत सारी रस्में निभाई जाती रही हैं। शादी के अग्नि-कुंड से लेकर इस्तेमाल की जाने वाली तमाम चीज़ें - जैसे की जल, घी, इत्यादि एक स्थापित रिवाज की तरह है। क्या है इन रिवाजों का लक्ष्य... बता रहे हैं सद्‌गुरु, और साथ ही भेंट कर रहे हैं एक ऐसी ही विधि... 

हम लोग जल्दी ही शादियों का एक प्रतिष्ठित रूप ‘विवाह’ नाम से शुरू करने जा रहे हैं। वैसे यह रूप कोई नया नहीं है, बल्कि बेहद प्राचीन है, लेकिन पिछले लंबे अरसे से प्रचलन में नहीं है। इसकी शुरुआत यौगिक पद्धति में हुई थी। इसके मूल में भूतशुद्धि प्रक्रिया है। भूतशुद्धि का मतलब जीवन के पांच महत्वपूर्ण तत्वों के चमत्कार के बारे में जानना और उन पर महारत हासिल करना है। योग का पूरा सिस्टम ही इस पर टिका हुआ है।

हर व्यक्ति की अपनी विषिष्टता या उसका अलग अस्तित्व उस व्यक्ति में मौजूद तत्वों की अशोधित अवस्था से तय होता है।
जब कोई व्यक्ति अपनी सीमाओं से परे जाना चाहता है तो वह इसके लिए संन्यास लेता है, और भौतिकता से परे जाने का एक मार्ग बनाने के लिए भूतशुद्धि का सहारा लेता है। लेकिन जो लोग जीवन की प्रक्रियाओं में फंस गए हैं या फिर जीवन के इस रूप से आकर्षित होकर अपने परम लक्ष्य पर ध्यान नहीं दे पाते, उनके लिए एक अलग तरीका है। भूतशुद्धि की उसी प्रक्रिया का इस्तेमाल कुछ ऐसे भी किया जा सकता है, कि दो लोगों के बीच आपसी जुड़ाव और मिलन का भाव तो बढ़े, लेकिन उनमें जीवन के प्रति उलझन का भाव कम से कम हो।

भूतशुद्धि का मतलब पांच तत्वों के शुद्धिकरण से है। इन्हीं तत्वों की शुद्धि से यह निर्धारित होता है कि किसी इंसान की जिंदगी कैसी होगी। जब तक ये तत्व स्थूल अवस्था में होते हैं तब तक जीव पूरी तरह से बेजान होता है। जैसे - जैसे इनका शोधन होता जाता है, वैसे - वैसे जीवन के स्वरूप सामने आते हैं। हालांकि इंसान को सबसे शुद्ध रूप माना गया है, फिर भी अगर इंसान और अधिक शुद्ध होता है, तो उसमें दैवीय स्तर तक पंहुचने की संभावना बनी रहती है। योग का पूरा सिस्टम इसी बारे में है। इन तत्वों के शोधन से एक खास तरह का संयोजन भी होता है। दरअसल, हर व्यक्ति की अपनी विषिष्टता या उसका अलग अस्तित्व उस व्यक्ति में मौजूद तत्वों की अशोधित अवस्था से तय होता है।

कई बार आप को ऐसा लगता होगा कि आप अपने शरीर की सीमाओं में बंध कर रह गए हैं। जबकि दूसरे कई मौकों पर आपको ऐसा भी लगता होगा कि आप इस सृष्टि की हर चीज का हिस्सा हैं। यह सबकुछ इससे तय होता है कि आपके भीतर पांचो तत्व किस तरह से काम रहे हैं। महज इन पांच तत्वों ने मिलकर कैसी चमत्कारिक शरारत कर डाली है, जिसे आज हम ब्रह्मांड या जीवन के रूप में जानते हैं।

राधे और संदीप के विवाह से हमने इस प्रक्रिया की शुरुआत की और जल्द ही हम इसे पुरी दुनिया के लिए उपलब्ध कराने जा रहे हैं। लोगों तक इस प्रक्रिया को पहुंचाने के लिए हम कुछ लोगों को -जिनमें एक खास स्तर की निष्ठा और समर्पण हो - एक खास तरह की ट्रेनिंग दे रहे हैं। आप में से जो लोग, खासकर शादीशुदा दंपत्ति, दूसरों के लिए के लिए इसे भेंट करना चाहते हैं - वे हमसे संपर्क कर सकते हैं।

वर, वधु और उनके परिवारजनों को यह सेवा उपलब्ध कराना उनके जीवन में सबसे मूल्यवान और महत्वपूर्ण प्रक्रिया होगी। इस ‘विवाह’ पद्धति का स्वरूप कुछ ऐसा है, जिसका फायदा न सिर्फ वर और वधु को मिलेगा, बल्कि इस विवाह में शामिल होने वाले और इस प्रक्रिया को संपन्न कराने वाले हर व्यक्ति को मिलेगा।

Love & Grace

 
 
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