सेलम में भैरवी देवी का जन्म
सेलम में लिंग भैरवी की प्राण प्रतिष्ठा 4 जनवरी 2014 को हुई। तकरीबन 4000 भक्त देवी की प्राण प्रतिष्ठा को देखने पहुंचे। सेलम अब देवी की पूजा अर्चना व देखभाल की जिम्मेदारी के रूप में मिले इस विशेष अधिकार के लिए धीरे-धीरे तैयार हो रहा है। इस हफ्ते के स्पॉट में सद्‌गुरु इस आयोजन के महत्व के बारे में बता रहे हैं
 
 
 
 

सद्गुरु

सेलम में भैरवी देवी की प्राण प्रतिष्ठा 4 जनवरी 2015 को हुई। प्राण प्रतिष्ठा एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पत्थर की मूर्ति में उर्जा डालकर उसे ऊर्जा के स्तर पर जीवंत बनाया जाता है। प्रतिष्ठित देवी की उर्जा को भक्ति के माध्यम से महसूस किया जा सकता है आइये जानते हैं देवी हमारे जीवन में किस तरह रूपांतरण ला सकती है...

भक्ति के जरिए हम अपने अंदर एक सुखद स्थिति पैदा कर सकते हैं। खुद को एक खुशनुमा माहौल में रखना बेहद जरूरी है और देवी इसके लिए एक जबरदस्त साधन हैं।

सद्‌गुरु:

देवी की कृपा का इस्तेमाल हर जगह किया जा सकता है- जीवन-यापन और परिवार से लेकर काम-काज तक। सबसे बड़ी बात कि उनकी भक्ति के जरिए हम अपने अंदर एक सुखद स्थिति पैदा कर सकते हैं। खुद को एक खुशनुमा माहौल में रखना बेहद जरूरी है और देवी इसके लिए एक जबरदस्त साधन हैं। आप सिर्फ उनका नाम लेकर भी अपने अहसास को खुशनुमा बना सकते हैं। यहां तक कि उनमें यह भी संभावना है कि वे हम सब को मुक्ति की ओर ले जा सकती हैं।

अगर आप किसी जबरदस्त उर्जा स्वरूप के गहन प्रेम में हैं तो आपके जीवन में एक खास तरह की मिठास आ जाती है। फिर आपके साथ भले ही कुछ भी क्यों न हो जाए, आपकी भक्ति आपके भीतर एक स्थायी खुशनुमा अहसास बनाए रखेगी।

जब आप अपना दिमाग कुछ मिनटों के लिए किसी पाठ्य पुस्तक पर केंद्रित करते हैं, तो आपका दिमाग यहां-वहां दौड़ने लगता है। लेकिन आप अगर अपने पड़ोस के किसी व्यक्ति के प्रेम में पड़ जाते हैं, तो बिना किसी कोशिश के आपका दिमाग उसी पर टिका रहता है। भक्ति भी कुछ ऐसी ही है, इसमें आप बिना किसी खास कोशिश के एक उर्जा स्वरूप के गहन प्रेम में पड़ जाते हैं। और तब वह इंसान, इंसान नहीं रहता एक दैवीय स्वरूप हो उठता है।

उनकी स्थापना तो हो गई हैं। अब अगर आप उन्हें अच्छे से रख सके तो वह हमारे और आपके बाद भी रहेंगी। वह 1000 साल या उससे भी ज्यादा रहेंगी। यह सिर्फ हमारे लिए ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक वरदान साबित होगा।

Love & Grace

 
 
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