मेरा राज़
इस हफ्ते के स्पॉट में सद्‌गुरु ने हमें अमेरिका से एक कविता भेजी है, जिसका शीर्षक है- ‘मेरा राज़‘। यह कविता उनके भीतर छिपी असीम करुणा की झलक देती है। "चलो तुम्हें बताऊँ अपना एक राज़, मेरे पास एक नहीं , दिल हैं दो...
 
Conversation with the Mystic
 
 
 

मेरा राज़

चलो तुम्हें बताऊँ अपना एक राज़
मेरे पास एक नहीं , दिल हैं दो

एक जो हमेशा रिसता है करुणा से
और दूसरा जो रहे हमेशा आनंद मगन

एक भर उठता है करुणा से कीड़े के लिए
और दूसरा खुश होता है पंछी के लिए

दुख मनाता हूं हारने वाले के लिए
झूम उठता हूं विजयी के लिए

कीड़े-मकोड़े,
पशु- पंछी या इंसान और निःसंदेह
पेड़ -पौधों की मौत पर रोता हूं मैं

आनंदित होता हूं हर जीवन के लिए
आज से अनंत तक

Love & Grace

 
 
 
 
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5 वर्ष 4 महिना पूर्व

Great Poetry...Sadhguru...:)
I bow down to u....<3

5 वर्ष 4 महिना पूर्व

सद्गुरू की इस कविता में सृष्टि के सभी प्राणियों के प्रति प्रेम और करुणा की नदी उफन कर बहती दिख रही है। सद्गुरू आपको कोटि कोटि नमन।