महिमा
इस बार के स्पॉट में सद्‌गुरु ने अपना आशीष एक कविता के रूप में भेजा है
 
 
 
 

सूरज निकला
और
फिर डूब गया

आकाशीय पिंडों से
आवरण हटा
और फिर
छिप गए सारे
एक आवरण में

सकल संसार ने
वस्त्र धारण किये
और फिर हो गए निर्वस्त्र
शरीर धारण किये
और हो गए फिर बेशरीर

और यह महिमा है निरंतर जारी...

Love & Grace

 

 
 
 
 
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