कैलाश मानसरोवर यात्रा से वापसी पर सद्‌गुरु हमसे यात्रा के यादें बाँट रहे हैं। वे कैलाश की अद्भुत दिव्यता के साथ नेपाल की आध्यात्मिक संभावनाओं के बारे में भी बता रहे हैं...

यह हमारी दसवीं कैलाश यात्रा है, पर आज भी कैलाश की असीम दिव्यता मंत्रमुग्ध कर देती है। इस वर्ष, यात्रा की व्यवस्था करना मुश्किलों भरा रहा, क्योंकि वीज़ा प्रदान करने वाली संस्थाओं ने कुछ चीज़ों को अनिश्चित बना दिया था। हमारे विदेश मंत्री ने अगर इसमें हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो हमारी यात्रा संभव न हो सकी होती। ईशा ग्रुप अकेला ऐसा ग्रुप है जिसने इस साल कैलाश यात्रा की है।

सभी ग्रुपों ने कैलाश मानसरोवर यात्रा सफलता से पूरी कर ली है, और दो ग्रुप अभी काठमांडू वापसी की यात्रा में है। कभी-कभी ऐसा होता है, कि लगातार कई दिनों तक कैलाश बादलों से ढका रहता है। पर यह कृपा ही है कि पिछले दस सालों में एक भी ईशा ग्रुप कैलाश से बिना दर्शन के वापस नहीं लौटा।

प्यारा नेपाल, एक सुंदर और अनूठा देश है, जिसे भूकंप के बाद थोड़े बुरे हालात का सामना करना पड़ रहा है। यहां का पर्यटन व्यवसाय काफी प्रभावित हुआ है, और अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह से प्रभावित हुई है। यह एक ऐसी भूमि है, जो साहसिक पर्यटन के लिए सबसे रोमांचक क्षेत्र और पावन पर्यटन के लिए भी भव्य और प्रसिद्द स्थल प्रदान कर सकती है।
विशेष रूप से भारत के लिए यह एक महान तीर्थ स्थान की तरह उभर सकता है। नेपाल की अद्भुत संभावनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

 

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