इससे पहले कि वह तुम्हें आगोश में ले ले
आज के ब्लॉग में सद्‌गुरु हमें भेज रहे हैं एक कविता मृत्यु के बारे में...
 
 
 
 

 

 

 

इससे पहले कि वह तुम्हें आगोश में ले ले

शरीर की गहरी दरारें

जहाँ जीवन-सृजन का जादू स्थापित है और दीप्त है।

उन्हीं दरारों में हैं अँधेरी गहराइयाँ – मृत्यु की जड़ता से परिपूर्ण।

जीवन की सबसे ऊँची अवस्था में होने के लिए

ज़रूरत है लगातार जीवंतता की लौ जलाने की।

रोज़ जागने में सूर्य से आगे होने की, इतना जीवंत होने की

कि स्वागत कर सकें चन्द्रमा व तारों का।

आत्मसात कर लेने की फूलों की महक –

मधुमक्खियों व पक्षियों से पहले।

धुंध की शीतलता जानने की इससे पहले कि वह

छू ले पत्ती या घास को, नीचे आते बर्फ़ के फाहे को पकड़ लेने की।

 

मृत्यु की स्थिरता जान लेने की

इससे पहले कि वह तुम्हें खुद में समा ले।

Love & Grace

 
 
 
 
 
 
Login / to join the conversation1
 
 
3 वर्ष 7 महिना पूर्व

सद्‍गुरु के द्वारा लिखित एक बहुत ही गहरी कविता। कविता के सुन्दर हिन्दी अनुवाद के लिये ब्लॉग टीम को अभिवादन।

3 वर्ष 7 महिना पूर्व

ईशा हिन्दी ब्लॉग का नया रूप सराहनीय है।