चेतना जागृति अभियान: सद्‌गुरु ने किया कई देशों का भ्रमण्‍ा

 
 
 
 

सद्‌गुरुआज के स्पॉट में सद्‌गुरु अपने पिछले कुछ हफ्तों के कार्यक्रमों के बारे में बता रहे हैं कि कैसे उन्हें पूरी दुनिया घूमना पड़ा - अमेरिका व कनाडा से लेकर हांगकांग, भारत व रूस, जर्मनी और अब लंदन।

लंदन, 15 नवंबर 2017

पिछले महीने ‘नदी अभियान’ करने के बाद इन दिनों मैं यात्रा और कई आयोजनों की हलचल में हूं, जो सात देशों में होना है। पहले कनाडा में एक छोटा सा ठहराव था, जहां शांभवी का एक मेगा दीक्षा आयोजन व कुछ दूसरे छोटे कार्यक्रम हुए। उसके बाद अमेरिका गया, जहां अपेक्षाकृत लंबे समय तक रुका। वहां भावस्पंदन का जबरदस्त कार्यक्रम हुआ। इसके लिए रजिस्ट्रेशन खुलते ही अगले 15 मिनटों में 750 बुकिंग हो गईं। ये बुकिंग 15 मिनटों में हुईं, दिनों में नहीं।

सैनफ्रांसिसको में एक दिन के दौरे में मोटाउन फेम वाले बैरी गॉर्डे परिवार में हुए दो कार्यक्रम अपने आप में अनूठे हो गए थे, जिसकी वजह थी - कार्यक्रम का स्वरूप और वहां मौजूद लोग। दर्शकों में अमेरिकी गायक व संगीतकार स्टीव वंडर व गायक और गीतकार स्मोकी रॉबिन्सन जैसे लोग भी मौजूद थे। जहां स्टीव ने भी गाया, स्टीव को अपने अलग अंदाज व आवाज में देखना व सुनना किसी ट्रीट से कम नहीं था।

हांगकांग की ये मेरी पहली यात्रा थी, जहां तीन दिन का इनर इंजीनियरिंग कार्यक्रम हुआ। काफी लंबे अर्से बाद मैंने इनर इंजीनियरिंग का पूरा कार्यकम संचालित किया। इसमें भाग लेने वाले कुल 2700 प्रतियोगियों में से 1600 चीन से थे। इन लोगों में भाग लेने व जानने की जबरदस्त लालसा नजर आई।

इस बीच एक दिन के लिए दिल्ली में भी रुकना हुआ, जिसका मकसद ‘नदी अभियान’ के लिए एक राष्ट्रीय बोर्ड का गठन करवाना था, ताकि केंद्र सरकार के साथ मिलकर इस मुद्दे को आगे बढ़ाया जा सके। इस सिलसिले में महत्वपूर्ण व समर्पित लोगों का एक पांच सदस्यी बोर्ड बना। कुछ मीडिया द्वारा नदी अभियान को दुनिया का सबसे बड़ा अभियान करार दिया गया, जिसमें देश के सभी तबकों से 16 करोड़ मिस्ड कॉल व सीधी भादगीदारी के जरिए भाग लिया गया। जल की कमी की गंभीर समस्या के निपटने के लिए देश लगातार एक ठोस समाधान की ओर आगे बढ़ रहा है। दिल्ली के इस बेहद संक्षिप्त व बेहद व्यस्त कार्यक्रम के बाद मैं मॉस्को चला गया।

मैं मॉस्को तब से देखना चाहता था, जब अस्सी के दशक में यहां ओलंपिक खेलों का आयोजन हुआ था। हॉलिवुड की फिल्मों को देखकर मॉस्को की जो छवी बनती है, उससे यही लगता है कि राह चलते हर तरफ आपको केजीबी (रूसी खुफिया एजेंसी) का कोई न कोई एजेंट टकरा जाएगा, लेकिन ऐसी खुशकिस्मती होती नहीं है।

आज मॉस्को एक खूबसूरत व जोशीला शहर है, जिसकी अपनी एक भव्यता और शानो-शौकत है। यहां मेरा तीन दिन रुकना हुआ, जहां कुछ निजी व सार्वजनिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। रूसी समाज में जिज्ञासा और जानने का एक स्पष्ट भाव नजर आता है। साम्यवाद ने लोगों के मानसिक विश्वास सिस्टम को ठीक तो किया, लेकिन इंसान में अपने अस्तित्व को लेकर जो बुनियादी जिज्ञासा होती है, उसके बारे में बिना कोई समाधान दिए लोगों को अधर में ही छोड़ दिया। आध्यात्मिक फसल के लिए यह एक उपजाऊ भूमि है।

रूस में एक शाम को बैले देखा, जो अपने आप में शानदार था। उसके बाद एक आयोजन के सिलसिले में बर्लिन, जर्मनी जाना हुआ, जहां सिर्फ 24 घंटे रुका और अब मैं लंदन में हूं। जहां मैं सांइस म्यूजियम में आयोजित ‘इन कन्वरसेशन’ कार्यक्रम के सिलसिले में आया हूं। यहां आकर वैम्बले में एक शानदार शाम बिताई, जहां गोल्फ खेला। बेहद भागदौड़ और थकावट से भरे मेरे शरीर को कुछ आराम की जरूरत थी। व्यस्स्ता के चलते पिछले कई महीनों से मेरे शरीर को आराम और उचित पोषण नहीं मिल पाया था।

Love & Grace

 
 
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