इस हफ्ते के स्पॉट में सद्‌गुरु अपनी पिछले दो हफ़्तों की यात्राओं के बारे में बता रहे हैं। सद्‌गुरु ने आंध्र प्रदेश से शुरू करते हुए और मध्य प्रदेश से होते हुए टेनेसी, ह्यूस्टन से पाम बीच तक का सफर किया। सद्गुरु नेपाल में हुई त्रासदी के बारे में भी लिख रहे हैं और नेपाल के लोगों को प्रेम और आशीर्वाद भेज रहे हैं...

पिछले दो हफ्ते में हम इतनी जगह गए कि जिनके बारे में बताने में भी खासी मेहनत करनी होगी। भोपाल जाने से पहले हम तीन घंटे के लिए विजयवाड़ा रुके, जहां हमने चार जगह जमीन देखी। दरअसल, आंध्र प्रदेश सरकार ने अपने यहां ईशा लीडरशिप अकेडमी और लॉ स्कूल बनाने के लिए इन जमीनों का प्रस्ताव रखा था। ये योजनाएं अभी विचाराधीन हैं। आंध्र प्रदेश के मानव संसाधन मंत्री व सभी संबंधित अधिकारी बेहद विनम्र, सहयोगी और आगे बढ़कर काम करने वाले थे। आंध्र प्रदेश प्रशासन जिस उत्साह और जोश के साथ काम करता है, वह तमाम दूसरे प्रशासनों के सीखने के लिए अपने आप में एक सबक व प्रेरणा है। लोक जीवन में इतने साल गुजारने के बाद मैंने ऐसी तत्परता कहीं और नहीं देखी।फिलहाल मैं टिड्डे सरीखे एक छोटे से हवाई जहाज पाइपर मालिबू में हूँ, जिससे मैं साफ आसमान में उड़ता हुआ 11 घंटे की मैराथन उड़ान के जरिए वेस्ट कोस्ट की ओर जा रहा हूं। अफसोस की बात है कि मीडिया के कुछ हिस्से और कुछ अपने हितों के चलते बने समूह इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं, जबकि यह आने वाले समय में राज्य के लिए खासा महत्व का होने जा रहा है। यह बेहद दुख की बात है कि राज्य को समृद्ध और एक नए शानदार शहर को बनाने का मुख्यमंत्री का जो नजरिया है और मेहनत है, उसे तमाम ऐसे लोगों का साथ नहीं मिल पा रहा है, जो राजनैतिक रूप से शह और मात के खेल में लगे हैं।

हालांकि मध्य प्रदेश प्रशासन का तरीका भी आंखें खोलने वाला है। वहां के मुख्यमंत्री व उनके सहयोगियों की सादगी और लगन प्रशंसनीय है। इस राजनेता की विनम्रता को हरेक नेता को अपने भीतर संजोने की कोशिश करनी चाहिए। मध्य-प्रदेश दौरे के दौरान मैं थोड़ समय के लिए नर्मदा के किनारे भी ठहरा। स्थानीय लोगों द्वारा नर्मदा नदी को एक जीवंत देवी मां जैसा सम्मानित भाव देना वाकई दिल को छू जाता है। उनके लिए जल कोई उपभोग की वस्तु न होकर एक ऐसा दैवीय रस या द्रव्य है, जो हमें जीवन देता है।

उज्जैन में होने वाले आगामी कुंभ मेला की भूमिका के तौर पर आयोजित एक समारोह में मैंने व्‍याख्‍यान दिया। मुख्यमंत्री का विचार इस सिंहस्थ कुंभ आयोजन को एक ऐसे मौके में बदलना है जिसमें सांसारिक और अलौकिक ज्ञान को बढ़ाया जा सके और उसका आदान प्रदान किया जा सके। सिंहस्थ कुंभ की इस शक्तिशाली स्थिति का सभी को अनुभव लेना चाहिए। हर 12 साल बाद होने वाले इस कुंभमेला के मौके पर ईशा मध्यप्रदेश प्रशासन के साथ मिलकर आयोजन में हाथ बटाएगी। ईशा दक्षिण भारतीयों और विदेशियों के लिए व्यवस्था में सहयोग करेगी। मैं यह वाकई चाहता हूँ कि मैं इस दौरान महाकुंभ के पीछे छिपे विज्ञान और उन दंत कथाओं को सामने लाऊं, जो इस आयोजन को हजारों साल से लेकर आज तक इतना शानदार बनाते आए हैं। उज्जैन महाकाल का घर है, इस तौर पर आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिए इसका विशेष महत्व है।

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मुंबई में एक दिन रुक कर कुछ महत्वपूर्ण मीटिंग्स निबटाकर मैं फिलहाल अमेरिका पहुँच गया हूं। इसमें से पहले दो दिन में ईशा अंतरराष्ट्रीय संस्था यानी आईआईआई में रहा, जहां आदियोगी मंदिर के निर्माण का काम लगभग पूरा होने को है। कुछ अवरोधों के बावजूद हम 23 सिंतबर प्राण-प्रतिष्ठा की तारीख को बरकरार रख रहे हैं। यह प्राण-प्रतिष्ठा अमेरिका में अब तक हुए तमाम आध्यात्मिक कामों में सबसे महत्वपूर्ण आयोजन होने जा रही है। हालांकि इससे पहले हमने यहां कुछ प्रतिष्ठाएं की हैं, लेकिन यह सबसे महत्वपूर्ण होने जा रहा है।

पिछले पांच दिनों में मैं चार अलग-अलग शहरों में गया। जहां टेक्सास के ह्यूस्टन स्थित राइस यूनिवर्सिटी में बेलर कॉलेज ऑफ़ मेडिसिन के डेविड इगलमैन के साथ संवाद का एक कार्यक्रम हुआ, जिसमें खासी संख्या में लोग मौजूद थे। ईगलमैन ने तंत्रिका-विज्ञान यानी न्यूरोसासांइसेस में कुछ अनूठे शोध किए हैं। डेविड अपने आप में बेहद मेधावी और खुशमिजाज इंसान हैं। उनमें कहीं से भी विद्वानों सी बोरियत नहीं दिखती। उसकी जगह उनमें बालसुलभ उत्सुकता व उत्साह नजर आता है, जो आमतौर पर ऐसे लोगों में कम ही दिखाई देता है। बातचीत के लिए एक मजेदार साथी पाकर मैं आध्यात्मिकता पर चर्चा करना ही भूल गया और उसकी जगह हल्की फुल्की बातचीत, गपशप और हंसी मजाक हमारे बीच चलता रहा, जिसका वहां मौजूद 2,500 दर्शकों ने खासा आनंद लिया।

उसके बाद मैं पिछले दो दिनों से पाम बीच पर हूं, जहां डो स्पूनर के साथ काफी मजेदार गोल्फ खेला। दरअसल, डो इंग्लैंड के जाने-माने स्पूनरिजम प्रेमी के वंशज हैं। गौरतलब है कि स्पूनरिजम वह होता है, जिसमें भाषा के साथ कुछ तोड़ मरोड़ की जाती है। यह स्वभावित तौर पर भी हो सकती है और जानबूझ कर भी। महाकुंभ की इस शक्तिशाली स्थिति का सभी को अनुभव लेना चाहिए। हर 12 साल बाद होने वाले इस महाकुंभ के मौके पर ईशा मध्यप्रदेश प्रशासन के साथ मिलकर आयोजन में हाथ बटाएगी। मसलन आपने सुना होगा कि कई लोग पौने नौ को नोने पौ बोलते हैं। मुझे अपने बचपन में ही स्पूनरिजम का खासा अनुभव हुआ, क्योंकि मेरे चचेरे दादा अंग्रेसी के खासे विद्वान थे। इसी दौरान एक शाम मुझे एथल कैनेडी के साथ बिताने काम मौका मिला। एथल स्व. रोबर्ट कैनेडी की पत्नी हैं। उत्साह से छलकती और जीवन से भरी 87 साल की यह महिला अपने आप एक बेहतरीन उदाहरण है कि अगर इंसान अपने जीवन को किसी मकसद के लिए लगा देता है, तो कैसे उम्र उसकी जीवंतता उससे नहीं छीन सकती।

पांच साल के लंबे अंतराल के बाद टेम्पा में कुछ देर के लिए ठहरना हुआ, जहां एक गर्म दोहपर को कुछ घंटे का सार्वजनिक भाषण हुआ।

फिलहाल मैं टिड्डे सरीखे एक छोटे से हवाई जहाज पाइपर मालिबू में हूँ, जिससे मैं साफ आसमान में उड़ता हुआ 11 घंटे की मैराथन उड़ान के जरिए वेस्ट कोस्ट की ओर जा रहा हूं। इस छोटी सी नाजुक फ्लाइट को 50 नौट के विपरीत हवा के झोकों जैसी परिस्थितों में अडिग एक तट से दूसरे तट की ओर उड़ते हुए देखकर लगता है, कि यह मानो अपना लोहा मनवाने पर अड़ी हुई है। मानवीय चतुराई व कौशल हमें अपनी सीमाओं में बांधने वाले प्रकृति के नियमों के विपरीत जाने में मदद करती है। मैं वेस्ट कोस्ट पर पहुँच गया हूं। मनुष्य की नज़ाकत इसके आगे बेअसर हो गयी है। फिलहाल पश्चिमी तट की ओर उड़ रहे हैं हम, वैसे वैमानिकी भाषा में पश्चिम को श्रेष्ठ माना गया है।

पिेछले 12 सालों में नेपाल ने हमारे दिल में अपनी एक खास जगह बनाई है। यहां हाल ही में हुई प्राकृतिक त्रासदी ने दिल को झकझोर कर रख दिया है। इतनी जिंदगियों का खोना वाकई बेहद दुखद है। उम्मीद है कि नेपाल के लोग अपने जिस साहस और फिर लौट आने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं, उन्हीं खूबियों की बदौलत वे इससे बाहर आ जाएँगे और समृद्ध बनेंगे भक्तपुर को बदहाली से निकालकर फिर से आबाद और समृद्ध बनाने में सफल होंगे। भक्तपुर एक हैरिटेज शहर है, जो इस विनाशकारी भूकंप में बुरी तरह से बर्बाद हुआ है। उम्मीद है कि तमाम अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां नेपाली कलात्मकता और कौशल के इस शानदार नमूने को फिर से पुराना रूप देने का काम अपने हाथों में लेंगी। यह वाकई बड़ी बात है कि हमारे प्रधानमंत्री ने अपनी पूरी तत्परता दिखाते हुए नेपाल की ओर मदद के हाथ बढ़ाए और चीनी सरकार ने भी मदद की। नेपाल और उसके लोगों के लिए मेरी गहन व आत्मीय संवेदनाएं और ढेर सारा आशीर्वाद।